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क्या बीजेपी बचा पाएगी 2019 में अपनी कोटा लोकसभा सीट, कांग्रेस दे सकती है कड़ी टक्कर

आपको बता दें कि 2018 में प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इज्यराज सिंह कांग्रेस को छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए.

क्या बीजेपी बचा पाएगी 2019 में अपनी कोटा लोकसभा सीट, कांग्रेस दे सकती है कड़ी टक्कर
2018 में इज्यराज सिंह कांग्रेस को छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए.

कोटा: लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर केंद्र और विपक्ष पूरी तरह से चुनावी मोड में आ गया है. लोकसभा चुनावों को लेकर एक ओर जहां केंद्र सत्ता पर काबिज रहने के लिए हर तरह का प्रयास कर रही है तो वहीं विपक्ष द्वारा भी केंद्र को सत्ता से हटाने के लिए पूरी तैयारी की जा रही है. इसी कड़ी में राजस्थान की बात करें तो आपको बता दें, राजस्थान में कुल 25 लोकसभा सीटे हैं. 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के चलते बीजेपी को प्रदेश की सभी 25 सीटों पर जीत मिली थी. 

वहीं यहां की कोटा लोकसभा सीट की बात करें तो आपको बता दें, 2019 लोकसभा चुनाव में यहां के सियासी समीकरण काफी रोचक हो गए हैं. दरअसल, 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र से बीजेपी के ओमबिरला ने जीत हासिल की थी. उन्होंने इस क्षेत्र में कुल 6,44,822 वोट प्राप्त किए थे. वहीं कांग्रेस के प्रत्याशी इज्यराज सिंह को 4,44,040 मतों से ही संतोष करना पड़ा था. 

हालांकि, आपको बता दें कि 2018 में प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इज्यराज सिंह कांग्रेस को छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए. जिसके बाद अब यह देखना बेहद दिलचस्प होने वाला है कि बीजेपी इस बार इस क्षेत्र से चुनाव में किस पर दांव लगाती है. क्या बीजेपी एक बार फिर ओमबिरला को चुनावी मैदान में उतारेगी या फिर इज्यराज को मौका देगी. वहीं कांग्रेस द्वारा भी इस क्षेत्र से किसे प्रत्याशी चुना जाता है यह देखना बेहद दिलचस्प होने वाला है. 

बीजेपी का गढ़ मानी जाती है कोटा लोकसभा सीट
कोटा लोकसभा क्षेत्र में कुल 8 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं. जिनमें केशोरायुपटनम, बूंदी, पिपलादा, संगोढ़, कोटा नोर्थ, कोटा साउथ, लाडपुरा और रामगंज मंडी शामिल है. साथ ही आपको बता दें कि कोटा को बीजेपी का गढ़ भी माना जाता है. बीजेपी द्वारा इस क्षेत्र में 1989, 1991 और 1996 में जीत हासिल की गई थी. जिसके बाद 1998 में कांग्रेस को इस क्षेत्र में जीत मिली थी लेकिन 1999 में एक बार फिर बीजेपी ने कोटा में जीत हासिल की थी. 2004 में भी बीजेपी द्वारा ही जीत हासिल की गई थी लेकिन 2009 में यहां से कांग्रेस के इज्यराज सिंह ने जीत दर्ज की थी. जिसके बाद 2014 में एक बार फिर बीजेपी ने जीत हासिल की थी.