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राजस्थान: सरकारी स्कूलों में लगेगा मेडिकल शिविर, शिक्षा परिषद ने जारी किए निर्देश

डिवर्म द वर्ल्ड इनिशिएटिव संस्था की ओर से सरकारी स्कूलों में एक अभियान चलाकर विद्यार्थियों में पेट की कमियों की जांच के लिए एक सर्वे की शुरुआत हुई है.

राजस्थान: सरकारी स्कूलों में लगेगा मेडिकल शिविर, शिक्षा परिषद ने जारी किए निर्देश
डिवर्म द वर्ल्ड इनिशिएटिव संस्था यह सर्वे करेगी. (प्रतीकात्मक फोटो)

जयपुर: राजस्थान का शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पेट संबंधित बीमारियों से बचाने के लिए मेडिकल शिविर का आयोजन करती है. इस दौरान हर साल प्रदेशभर की सभी सरकारी स्कूलों में इसको लेकर अभियान भी चलाया जाता है. इस साल भी सरकारी स्कूलों के बच्चों की पेट की बीमारी से संबंधित एक सर्वे की जा रही है.

डिवर्म द वर्ल्ड इनिशिएटिव संस्था ने सरकारी स्कूलों में एक अभियान चलाकर विद्यार्थियों में पेट की कमियों की जांच के लिए एक सर्वे की शुरुआत की है. इस दौरान राजस्थान के 25 जिलों की प्रत्येक सरकारी स्कूलों के 50 बच्चों की जांच की जाएगी. जांच के दौरान हर बच्चे के मल का नमूना लिया जाएगा. लेकिन इस नमूने के लिए पहले बच्चे के अभिभावकों की सहमति जरुरी होगी. इस संबंध में राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने प्रदेश के हर जिले के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी और पदेन जिला परियोजना समन्वयक समग्र शिक्षा अभियान को निर्देश जारी किया है.

खान-पान और खराब पानी पीने के चलते बच्चों को अक्सर पेट की बीमारियों से जूझना पड़ता है और कई बार ये बीमारियां जानलेवा रुप धारण कर लेती हैं. बच्चों को इन्हीं बीमारियों से बचाने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से एक सर्वे किया जा रहा है और इस सर्वे के तहत 25 जिलों में प्रत्येक विद्यालय में 50 विद्यार्थियों के मल का नमूना लिया जाना है. इस दौरान नमूना लेने से पहले अभिभावकों की सहमति जरुरी होगी. इसके लिए राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने दिशा निर्देश जारी किए हैं. 

इन जिलों में लिया जाएगा बच्चों के मल का नमूना
राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद कीबाड़मेर, जोधपुर,बीकानेर, नागौर, जालोर, अजमेर, जयपुर, भरतपुर, राजसमंद, प्रतापगढ़, बारां, सवाईमाधोपुर, गंगानगर, जैसलमेर, झुंझनूं, सीकर, पाली, दौसा, टोंक, अलवर, भीलवाड़ा, उदयपुर, बांसवाड़ा, बूंदी और कोटा के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी और पदेन जिला परियोजना समन्वयक समग्र शिक्षा अभियान को निर्देशित किया गया है. इस दौरान यह भी निर्देश दिया गया है कि बच्चों के मल के नमूने लेने से पहले उनके अभिभावकों की सहमति लेनी जरूरी होगा.