बांसवाड़ा: पढ़े-लिखे शिक्षक भी नहीं संवार पा रहे मूक-बधिरों की किस्मत

बांसवाड़ा के मूक बधिर स्कूलों के बच्चे तालीम हासिल कर अपने अरमानों को ऊंची उड़ान देना चाहते हैं. शिक्षा के प्रति बच्चों की ये रूचि काबीले तारीफ है, लेकिन हाकिमों ने इनकी किस्मत में मुश्किलों का सैलाब भर दिया है.

बांसवाड़ा: पढ़े-लिखे शिक्षक भी नहीं संवार पा रहे मूक-बधिरों की किस्मत
बांसवाड़ा के मूक बधिर स्कूल के बच्चे

अजय ओझा, बांसवाड़ा: जिले के मूक बधिर स्कूलों के बच्चे तालीम हासिल कर अपने अरमानों को ऊंची उड़ान देना चाहते हैं. शिक्षा के प्रति बच्चों की ये रूचि काबीले तारीफ है, लेकिन हाकिमों ने इनकी किस्मत में मुश्किलों का सैलाब भर दिया है. इन बच्चों को ना तो स्कूल में बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं न ही विशेष शिक्षकों की नियुक्ति हो पा रही है. 

बांसवाड़ा के राजकीय मूक बधिर उच्च माध्यमिक स्कूल के बच्चे अपने आप में बेहद स्पेशल है. भगवान ने भले ही इन बच्चों की आवाज इनसे छीन ली है, लेकिन ये बच्चे अपने हौसले से उड़ान भरने की कोशिश कर रहे हैं. इशारों से ये बच्चे तालीम का क, ख, ग सीख कर अपनी मंजिल खुद तय करना चाहते हैं, लेकिन लगता है कि हाकिमों ने सरकार के सब पढ़े, सब बढ़े के नारे को मिट्टी में मिलाना शुरू कर दिया है. बांसवाड़ा के लोधा ग्राम पंचायत में स्कूल 2005 से संचालित हो रहा है, लेकिन अब तक इन बच्चों के लिए स्कूल में जो सुविधाएं मिलनी चाहिए थी, वो नहीं मिल पाई हैं.

मूक बधिर स्कूल में 96 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं. स्कूल में 15 विशेष शिक्षकों के पद हैं, लेकिन 96 बच्चों के बीच महज एक ही विशेष शिक्षक है. स्कूल में 9 साधारण शिक्षक हैं जो इन बच्चों को ठीक से नहीं पढ़ा पा रहे हैं. स्कूल में बने छात्रावास में करीब 40 से ज्यादा बच्चे रहते हैं, लेकिन वार्डन के पद अब तक खाली है. स्कूल प्रशासन संविदा पर वार्डन को रखकर काम चला रहे हैं. कई बार हाकिमों और हुक्मरानों को स्कूल की समस्याओं को लेकर अवगत कराया गया, लेकिन किसी ने ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी.

ये बच्चे कल के भविष्य हैं. मूक बधिर स्कूल के ये बच्चे तालीम के दम पर हर बाधा को पार करना चाहते हैं. तालीम लेकर अपने सपनों को नई उड़ान भरना चाहते हैं, लेकिन जब हाकिम ही गूंगा हो तो फिर इन बच्चों की आखिर कौन सुनेगा?