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कोटा: MBS अस्पताल में 1 महीने बाद भी डेटॉल खरीद घोटाले में नहीं हुई जांच

लिक्विड शॉप सप्लाई का बिल जब अकाउंटेंट के पास पहुंचा तो डिटोल/ लाइफबॉय की दर बाजार दर से कहीं ज्यादा थी.

कोटा: MBS अस्पताल में 1 महीने बाद भी डेटॉल खरीद घोटाले में नहीं हुई जांच
फाइल फोटो

कोटा/ मुकेश सोनी: एमबीएस अस्पताल प्रशासन लाइफबॉय और डिटॉल की खरीद घोटाला में एक माह बाद भी जांच नही करवा पाया है. अस्पताल प्रशासन मामला दबाने में जुटा है. हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने फौरी तौर पर मौखिक रूप से तीन सदस्य जांच कमेटी का गठन किया था, पर कुछ समय बाद लिखित आदेश में एक सदस्य को बदल दिया गया. जांच कमेटी दो बार बाबुओं से स्पष्टिकरण मांग चुकी है, पर बाबुओं ने अभी तक जवाब नहीं दिया. अब तो बाबुओं के रोब के आगे जांच कमेटी भी नतमस्तक नजर आ रही है.

ये था मामला
अस्पताल में लोकल टेंडर के तहत जनरल आइटम की सप्लाई के लिए साल 2017 में ऑनलाइन निविदा जारी की थी. जिसमे लिक्विड सॉप विद डिस्पेंसर (डेटॉल/लाइफबॉय) प्रति 200 एमएल की दर 135 रुपये अनुमोदित की थी. वर्क ऑर्डर पर फर्म ने माल  सप्लाई किया और बिल में 159 रुपये लगा कर पेश कर दिया.

लिक्विड शॉप सप्लाई का बिल जब अकाउंटेंट के पास पहुंचा तो डेटॉल/ लाइफबॉय की दर बाजार दर से कहीं ज्यादा थी. बाजार में इस लिक्विड सॉप का खुदरा मूल्य 85 से 100 रुपये है. इस बीच फर्म ने अकॉन्टेन्ट पर 20 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप लगाया तो बाबू व अकाउंटेंट में कमीशन की लड़ाई सड़क तक पहुच गई. सप्लायर का लाखों का भुगतान रोक दिया गया.। जी मीडिया ने मई माह में घोटाला उजागर किया था तो अस्पताल प्रशासन ने मौखिक रूप से तीन सदस्य जांच कमेटी बना दी. जिसमे उपाधीक्षक डॉ समीर टण्डन, सीनियर अकॉन्टेन्ट राकेश भारतीय और नर्सिंग अधीक्षक सत्यनाराण वर्मा को शामिल किया पर कुछ दिन बाद अधीक्षक कार्यालय जारी आदेश में नर्सिंग अधीक्षक की जगह डॉ करनेश गोयल को जांच कमेटी का सदस्य बना दिया.

उपाधीक्षक डॉ. समीर टण्डन का कहना है कि 10 जून को मीटिंग बुलाई थी जिसमें कमेटी के सदस्यों ने दोनों अकॉन्टेन्ट को बुलाकर पत्र सौंपकर स्पस्टीकरण मांगा था. फिर 18 जून को रिमांडर भेजा. दो बार पत्र देने के बाद भी दोनों अकाउंटेंट जवाब नहीं दे रहे हैं. वहीं सीनियर अकॉन्टेन्ट राकेश भारतीय का कहना है कि मैं चुनाव ड्यूटी के बाद यात्रा पर चला गया था. कमेटी में बदलाव की मुझे जानकारी नहीं है. चार फेज में सम्बंधित से जवाब मांगेंगे, फिर फाइल का अध्ययन करेंगे. वैसे 7 दिन में जांच पूरी कर ली जाएगी. डेटॉल/ लाइफबॉय की रेट को लेकर आरसी की भी जांच करेगी, परचेज कमेटी के जो भी सदस्य दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी.