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राजस्थान: 'सुगम मतदान' के लिए जिला अधिकारी आरती डोगरा को मिलेगा राष्ट्रीय पुरस्कार

सुश्री डोगरा को यह पुरस्कार बेस्ट इलेक्टोरल प्रेक्टिस की सामान्य श्रेणी में 'एक्सीसेबल इलेक्शन' के लिए दिया जाएगा

राजस्थान: 'सुगम मतदान' के लिए जिला अधिकारी आरती डोगरा को मिलेगा राष्ट्रीय पुरस्कार
डोगरा वर्ष 2018 के लिए राज्य की एक मात्र अधिकारी हैं जो इस पुरस्कार से सम्मानित होंगी

जयपुर: विधानसभा आम चुनाव-2018 में दिव्यांगजनों के लिए बेहतरीन काम करने के लिएअजमेर की तत्कालीन जिला निर्वाचन अधिकारी, आरती डोगरा को राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद राष्ट्रीय मतदाता दिवस (25 जनवरी) के अवसर पर राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित करेंगे.

आरती डोगरा को यह पुरस्कार बेस्ट इलेक्टोरल प्रेक्टिस की सामान्य श्रेणी में 'एक्सीसेबल इलेक्शन' के लिए दिया जाएगा. उन्हें यह पुरस्कार दिल्ली के मानेशॉ ऑडिटोरियम में प्रदान दिया जाएगा. डोगरा ने जिले में कई नवाचारों के जरिए दिव्यांग मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाने ले जाने सहित कई अनूठे प्रयास किए थे. गौरतलब है कि सुश्री डोगरा वर्ष 2018 के लिए राज्य की एक मात्र अधिकारी हैं जो इस पुरस्कार से सम्मानित होंगी.

आरती डोगरा ने जिला निर्वाचन अधिकारी अजमेर के पद पर रहते हुए 'सुगम निर्वाचन' के अंतर्गत दिव्यांगजन मतदाताओं के लिए मतदान केंद्र तक लाने के लिए निशुल्क यातायात, व्हील चेयर, रैंप की सुविधा एवं वोलेंटियर्स उपलब्ध करवाकर मतदान प्रतिशत में अभूतपूर्व बढ़ोतरी के प्रयास किए थे. उन्होंने दिव्यांगजनों में मतदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कई स्वीप कार्यक्रम भी करवाए, जिसमें सबसे अनूठा कार्यक्रम 20 हजार दिव्यांग मतदाताओं द्वारा स्थानीय स्टेडियम में एकत्रित होकर तिरंगे झंडे के रूप में एक 'ह्यूमन फोरमेंशन' बनाया था. 

उन्होंने इन 20 हजार मतदाताओं को मतदान देने की शपथ भी दिलाई. इस तरह एक ही दिन में दो इवेंट्स को 'इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स' में जगह दी गई है. वहीं राजस्थान में भी चुनाव आयोग 25 जनवरी को नौवां राष्ट्रीय मतदाता दिवस उत्साह और धूमधाम से मनाएगा. 

सन् 2011 से हुई शुरुआत
भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूचियों में नए मतदाताओं तथा महिलाओं के नाम जुड़वाने तथा मतदान करने के प्रति आमजन का रुझान बढ़ाने के लिए ही अपनी 60 वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में 25 जनवरी, 2011 से 'राष्ट्रीय मतदाता दिवस' मनाए जाने की नई शुरुआत की थी. सन् 1950 में स्थापित हुए भारत निर्वाचन आयोग की इस अभिनव पहल से आज देश में होने वाले सभी चुनाव लोकतंत्र का पावन पर्व बन गए हैं.