राजस्थान: लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारों को लेकर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ी

 प्रदेश स्तर की स्क्रीनिंग में सभी 25 लोकसभा के लिए एक, दो और तीन नामों वाली सीटों को अलग से कैटगराइज किया गया है.

राजस्थान: लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारों को लेकर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ी
करीब 10 ऐसी सीटें हैं जहां कांग्रेस को मजबूत उम्मीदवार खोजने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ रही है

मनोहर विश्नोई/राजस्थान: प्रदेश में लोकसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां बढ़ गई हैं. इसी कड़ी में कांग्रेस में भी लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारी को प्रदेश में बैठकों का दौर जारी है. हालांकि खबरों के मुताबिक कांग्रेस के ऐसे कई उम्मीदवार हैं जो एक साथ कई सीटों से अपनी उम्मीदवारी पेश कर रहे है. ऐसे में राजस्थान कांग्रेस के लिए लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार का चुनाव करना चुनौती पूर्ण हो सकता है.

वहीं सूत्रों का कहना है कि पार्टी सभी जाति और समुदायों के वोट साधने के लिए लोकसभा की टिकटो में प्रतिनिधित्व दिया जाएगा. कांग्रेस एक सीट अल्पसंख्यक देने पर भी विचार कर रही है लेकिन इसके लिए किसी भी सीट पर सहमति बनती नजर नहीं आ रही है. पार्टी ने कई दिग्गजों को विधानसभा चुनाव लड़वाकर विधायक बना दिए इसलिए करीब 10 ऐसी सीटें हैं जहां मजबूत उम्मीदवार खोजने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ रही है.

यहां तक कि दिल्ली में रायशुमारी के बाद सीएम अशोक गहलोत ने प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे और पीसीसी चीफ सचिन पायलट को स्टेट प्लेन भेजकर जयपुर बुलवाया और जो फीडबैक मिला उस पर मंथन किया. सूत्रों की मानें तो जयपुर में करीब 4 घंटे चले मंथन में वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर भी चर्चा की गई. बताया जा रहा है कि लोकसभा उम्मीदवार चयन के लिए प्रदेश स्तर पर यह आखिरी बैठक थी. अब दिल्ली में आलाकमान के साथ बैठकर सीईसी के लिए भेजे जाने वाले नामों पर आखिरी मंथन होगा. प्रदेश स्तर की स्क्रीनिंग में सभी 25 लोकसभा के लिए एक, दो और तीन नामों वाली सीटों को अलग से कैटगराइज किया गया है.

राजस्थान में कई ऐसी सीटें हैं जहां से एक ही उम्मीदवार कई जगह से दावेदारी कर रहे हैं. जिनमें सबसे अहम नाम वैभव गहलोत का है जिनका नाम 5 सीटों से चल रहा है. वैभव की प्रबल दावेदारी जालोर-सिरोही और जोधपुर से है वहीं सवाई माधोपुर-टोंक, जयपुर शहर और झुंझुंनूं से भी डिमांड आ रही है. जबकि पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी चूरू और जयपुर ग्रामीण से, पूर्व केन्द्रीय मंत्री नमोनारायण मीणा टोंक-सवाई माधोपुर और दौसा से, पूर्व विधायक मानवेंद्र सिंह का नाम बाड़मेर-जैसलमेर और जोधपुर से, धर्मेंद्र राठौड़ का नाम राजसमंद और अजमेर से चल रहा है.

सबसे प्रबल दावेदारी की बात की जाए तो वैभव गहलोत की जालोर-सिरोही से हैं साथ ही जोधपुर से भी वैभव की बराबर डिमांड है. वहीं अलवर एक मात्र ऐसी सीट है. जहां भंवर जितेंद्र सिंह के सामने किसी ने भी दावेदारी नहीं की है. हालांकि अंदरखाने वर्तमान सांसद डॉ करण सिंह यादव की बात आ रही है. बताया जा रहा है कि डॉ यादव को पिछली बार उपचुनाव में टिकट दी गई तब साफ कह दिया गया था आगे लोकसभा की टिकट नहीं दी जाएगी, इसलिए डॉ यादव अलवर से खुलकर दावेदारी नहीं कर रहे हैं. उनका नाम जयपुर ग्रामीण के लिए सामने आ रहा है.

वहीं कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि चूरू सीट से इस बार जाट की बजाय ब्राह्मण को दी जा सकती है और जयपुर ग्रामीण सीट पर यादव के खाते में नहीं जाती है तो जाट को दी जा सकती है. कुल मिलाकर जयपुर ग्रामीण सीट पर काबिना मंत्री लालचंद कटारिया की ही चलनी है, इसलिए सूत्रों का कहना है कि कटारिया अंदरखाने अपने परिवार के लिए ही टिकट दिलवाने का माहौल बना रहे हैं.

कुल मिलाकर यह समीकरण कांग्रेस के दावेदारों को लेकर बन रहा है. कांग्रेस के कई नेता ऑफ रिकॉर्ड कहते हों कि चुनावी शतरंज बिछने के बाद कई बदलाव होंगे. खासकर भाजपा कई सांसदों की टिकट कटने के आसार है इसलिए कई तो कांग्रेस के संपर्क में है. उनको कांग्रेस में लेकर टिकट भी दिया जा सकता है. उनका कहना है कि कांग्रेस में कुछ भी हो सकता है.