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राजस्थान सरकार ने गुर्जरों और सवर्णों को दिया आरक्षण, आदेश जारी

बता दें कि गहलोत सरकार की इस घोषणा के बाद गुर्जरों को सभी 17 प्रक्रियाधीन भर्तियों में आरक्षण मिलेगा. इसके साथ ही सरकार प्रक्रियाधीन भर्तियों में छाया पद क्रिएट करेगी.

राजस्थान सरकार ने गुर्जरों और सवर्णों को दिया आरक्षण, आदेश जारी
इस आरक्षण के बाद 8 हजार से ज्यादा पदों पर नियुक्तियां होगी.

जयपुर: राजस्थान सरकार ने आरक्षण को लेकर अपना वादा निभाते हुए गुर्जरों को 5 प्रतिशत का आरक्षण दे दिया है. इसके साथ ही गहलोत सरकार ने सवर्णों को भी सभी भर्तियों में 10 प्रतिशत आरक्षण का तोहफा दे दिया है. खबर के मुताबिक यह घोषणा कार्मिक विभाग की प्रमुख सचिव रोली सिंह ने आदेश जारी करने के साथ कर दिया है.

बता दें कि गहलोत सरकार की इस घोषणा के बाद गुर्जरों को सभी 17 प्रक्रियाधीन भर्तियों में आरक्षण मिलेगा. इसके साथ ही सरकार प्रक्रियाधीन भर्तियों में छाया पद क्रिएट करेगी. वहीं इस आरक्षण के बाद 8 हजार से ज्यादा पदों पर नियुक्तियां होगी. 

आपको बता दें कि 13 साल पहले उठे इस मामले में 72 गुर्जरों ने अपनी जान गवाई. इस आंदोलन की शुरूआत 2006 में गुर्जर समुदाय को एसटी में शामिल करने की मांग पर हुई थी. जब से लेकर अब तक राजस्थान में आरक्षण की आग नहीं बुझी थी. अब तक सरकार ने गुर्जरों को आरक्षण देने की कोशिश तो की, लेकिन मामला कोर्ट में अटकता चला गया. इन 13 सालों में 4 बार बीजेपी और दूसरी बार कांग्रेस राज में आंदोलन हो रहा था.

2006 में गुर्जरों को एसटी में शामिल करने की मांग पर पहली बार आंदोलन हुआ था. आंदोलन के बीच पटरियां उखाड़ी गईं. जिसके बाद भाजपा सरकार ने इस मामले में कमेटी बनाई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. इसके बाद 21 मई 2007 को पीपलखेड़ा पाटोल में आरक्षण के लिए फिर से आंदोलन हुआ, जिसमें पुलिस फायरिंग में 28 लोगों की जाने गईं. मामला बढ़ने के बाद भाजपा सरकार से समझौता हुआ और चौपडा कमेटी बनाई गई लेकिन कमेटी ने गुर्जरों को एसटी आरक्षण के दर्जें के लायक नहीं माना.

23 मई 2008 को तीसरी बार आरक्षण के लिए आंदोलन हुआ. पीलुकापुरा ट्रेक पर बयाना मे रेले रोकों आंदोलन की फिर से शुरूआत हुई. जिसमें एक बार फिर से पुलिस फायरिंग में 7 लोग मारे गए. इसके बाद गुर्जरों द्वारा सिंकदरा में हाईवे जाम किया गया, जिसमें 23 लोगों की जाने गई. जिसके बाद बीजेपी सरकार गुर्जरों के लिए एसबीसी आरक्षण लेकर आई, जिसमें गुर्जर समाज को 5 फीसदी आरक्षण दिया गया, लेकिन फिर मामला हाईकोर्ट में अटक गया. 2 साल बाद गुर्जर फिर गरजे और 24 दिसंबर 2010 को पीलुकापुरा में रेल रोकी गई. जिसके बाद कांग्रेस सरकार से 5 फीसदी आरक्षण को लेकर समझौता हुआ.