राजस्थान: पानी की समस्या पर लापरवाह विभाग, अब तक नहीं खुदे ट्यूबवेल

बीसलपुर बांध का जल स्तर 308.50 आरएल मीटर ही रह गया है. बांध में 7.10 टीएमसी यानि केवल 18 फीसदी पानी ही बचा है

राजस्थान: पानी की समस्या पर लापरवाह विभाग, अब तक नहीं खुदे ट्यूबवेल
बांध में 7.10 टीएमसी यानि केवल 18 फीसदी पानी ही बचा है

आशीष चौहान/जयपुर: सात साल बाद फिर से बीसलपुर बांध सूखने के कगार पर है. पानी की कमी के कारण जयपुर में पानी का संकट बढता जा रहा है. अब बीसलपुर बांध में केवल 18 फीसदी पानी ही बचा है, लेकिन इसके बावजूद भी जयपुर शहर में बडे ट्यूबवेल खोदेने में देरी की जा रही है. बीसलपुर बांध का जल स्तर 308.50 आरएल मीटर ही रह गया है. बांध में 7.10 टीएमसी यानि केवल 18 फीसदी पानी ही बचा है. 

बांध का जल स्तर रोजाना डेढ़ से दो सेमी गिर रहा है. इसके बावजूद जलदाय विभाग ने नए ट्यूबवेल खोदने की स्पीड नहीं बढ़ाई है. विभाग के इंजीनियरों की लापरवाही के कारण टेंडर, वर्कऑर्डर देने में ही चार महीने गुजार दिए है. ट्यूबवेल नहीं खोदने के कारण बीसलपुर बांध से ज्यादा पानी लेना पड़ रहा है. ऐसे में जून के अंतिम सप्ताह तक बांध में पानी समाप्त होने की आशंका जताई जा रही है.

मुख्य अभियंता आईडी खान का कहना है कि शहर में रोजाना 4100 लाख लीटर पानी सप्लाई हो रहा है. बीसलपुर सिस्टम से केवल 3000 लाख लीटर और ट्यूबवेल से 1100 लाख लीटर पानी सप्लाई हो रहा है. पाइपलाइन की लंबाई ज्यादा होने के कारण टेल एंड वाले उपभोक्ताओं तक पानी ही नहीं पहुंच रहा है. विभाग के पूर्व प्रमुख सचिव रजत कुमार मिश्र ने इंजीनियरों पर सख्ती कर पुराने ट्यूबवेल चालू करवाने और नए ट्यूबवेल खोदने के प्रस्ताव बनवाए. 

लेकिन नई सरकार बनने के बाद 34.92 करोड़ खर्च कर 279 ट्यूबवेल खोदने के रेट कॉन्ट्रेक्ट के टेंडर को फाइनेंशियल, प्रशासनिक मंजूरी मिली, लेकिन बजट नहीं होने से काम धीमा है. अब तक केवल 20 ट्यूबवेल खोदने का काम पूरा किया गया है. ट्यूबवेल खुदने के बाद शहर में पेयजल सप्लाई में सुधार होने की संभावना जताई जा रही है. 

मुख्य अभियंता आईडी खान का कहना है कि पानी की कमी का देखते हुए जलदाय विभाग ट्यूबवेल खोदने का काम शुरू कर कर रहा है,उनका दावा है कि 15 अगस्त तक बीसलपुर बांध में पानी बचा है, जबकि मार्च तक ट्यूबवेल खादेने का काम पूरा हो जाएगा. वहीं अप्रैल तक ट्यूबवेल को टंकियों से जोडने का काम किया जाएगा.यानि अप्रैल से शहर के लोगों को पीने का पानी मिल सकेगा. इंजीनियरों की लापरवाही केे बाद जलदाय विभाग कब तक रफ्तार बढेगी,क्योंकि जयपुर में समय रहते हुए स्थिति सुधार नहीं की गई तो शहर भर मे जलसंकट बढ सकता है.