close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

राजस्थान: भोलेनाथ की आराधना के लिए सजे सभी शिवालय, किए गए विशेष इंतजाम

शहर के बड़े शिवालयों में सहस्त्रघट, दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय के जाप आदि अनुष्ठानों की सेवा बुकिंग हो चुकी है.

राजस्थान: भोलेनाथ की आराधना के लिए सजे सभी शिवालय, किए गए विशेष इंतजाम
मंदिरों में फूलों, बिल्व पत्रों की विशेष झांकी भी सजाई जा रही है.

जयपुर: देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु के चार मास तक क्षीरसागर में शयन के दौरान भगवान शिव इस जगत के पालनहार होते हैं. भगवान शिव का प्रिय मास सावन भी इन्हीं चार मासों में आता है. सावन के महीने की शुरूआत कल से हो रही है. वन का महीना भोले नाथ की प्रिय है इस माह में उनकी पूजा करने वाले भक्तों के मनोरथ पूर्ण होते है. चारों ओर हर-हर महादेव की गूंज सुनाई देगी. 

वहीं क्वींस रोड स्थित झाडखंड महादेव मंदिर में भी श्रद्धालुओं के लिए दर्शनों के लिए विशेष इंतजाम किए हैं. ताड़केश्वर महादेव, चमत्कारेश्वर महादेव, झोटवाड़ा रोड काला महादेव मंदिर, कनक वृंदावन, जंगलेश्वर महादेव, बनीपार्क, अंबिकेश्वर महादेव, आमेर स्थित धूलेश्वर महादेव व धूलेश्वर गार्डन सहित सभी शिवालयों में रौनक रहेगी. देवों के देव महादेव की आराधना के पर्व 'सावन माह' की शुरुआत कल से होगी. शहर के बड़े शिवालयों में सहस्त्रघट, दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय के जाप आदि अनुष्ठानों की सेवा बुकिंग हो चुकी है.

अधिकांश मंदिरों के अलावा भी अनुष्ठान के लिए बुकिंग हो रही है. अलग-अलग रुद्रपाठी पंडितों की मौजूदगी में विभिन्न समयावधि में उक्त अलग-अलग अनुष्ठानों के हिसाब से दक्षिणा ली जाएगी. मंदिरों में फूलों, बिल्व पत्रों की विशेष झांकी भी सजाई जाएगी. विदेश में रह रहे एनआरआई परिवारों और देश के विभिन्न जगहों से भक्त छोटीकाशी पहुंचेगे. ज्योतिषाचार्य ने बताया की इस दिन विष कुंभ और व्रज योग रहेगा. 

वहीं 30 दिन के सावन मास के दौरान चार सोमवार आएंगे. जिनमें कि अलग-अलग योग देखने को मिलेंगे. 15 अगस्त को श्रावण नक्षत्र और सौभाग्य योग में सावन की समाप्ति होगी. समूचे मास ताड़केश्वर मंदिर, झाडखंड महादेव व सदाशिव ज्योतिर्लिंगेश्वर महादेव सहित अन्य शिव मंदिरों मेंरुद्राभिषेक व सहस्त्रघट सहित अन्य अनुष्ठान होंगे. अमृतसिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग के बीच पहला सोम प्रदोष व्रत 29 जुलाई को और दूसरा 12 अगस्त को आएगा.

सावन के तीसरे सोमवार को त्रियोग का संयोग भी बनेगा. साथ ही पूरे महीने में प्रदेश भर में ग्रहों की अनुकूलता के साथ-साथ खंड वर्षा भी होगी. एक अगस्त को सूर्य, चन्द्रमा, मंगल और शुक्र ग्रह के कर्क राशि में होने से चतुग्र्रही योग के साथ हरियाली अमावस्या आने से पंच महायोग बनेगा. पंच महायोग के संयोग में भगवान शिव की उपासना से मनवांछित फल की प्राप्ति होगी. तीन अगस्त हरियाली तीज, पांच अगस्त को नाग पंचमी और 15 अगस्त को चंद्रप्रधान श्रवण नक्षत्र में रक्षाबंधन का पर्व आएगा.

देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु के क्षीरसागर में शयन करने के लिए चले जाने के बाद सृष्टि के संचालन की सारी जिम्मेदारी भगवान शिव का परिवार करता है. इसकी शुरुआत सावन माह से ही हो जाती है. इस दौरान देवों के देव महादेव, मां पार्वती और गणेश जी भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं. मान्यता है सावन में शिव की पूजा करने पर असीम पुण्य की प्राप्ति होती है. भोलेनाथ भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं. सावन महीने की शुरुआत होने के साथ ही कांवड़ यात्रा भी शुरू हो जाएगी. सावन की शुरुआत होते ही कांवड़िए बम-बम भोले, हर-हर महादेव के जयकारे लगाते हुए नजर आने लगेंगे. 

दरअसल हिंदू धर्म में सावन महीना शिव भक्तों के लिए काफी अहम माना जाता है. इसी महीने में भक्त कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं. सावन का महीना भगवान शिव का महीना होता है, इसलिए भक्तजन इस महीने में विशेष व्रत रखते हैं, और शिव की पूजा-अर्चना करते हैं. सावन माह में लाखों शिवभक्त अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए कांवड़ यात्रा करते हैं और हरिद्वार से जल भर कर शिवलिंग पर चढ़ाते हैं. 

सावन के माह में भगवान शंकर की पूजा का विधान तो है साथ ही माता पार्वती की पूजा का भी विधान है. भगवान शंकर की पूजा का व्रत कुंवारी कन्या मनचाहा वर प्राप्त करने के लिए करती है. वहीं सुहागिन महिला परिवार में सुख-समृद्धि औरखुशहाली की कामना से करती है. मंदिरों में सुबह से भगवान के दर्शन और पूजन के लिए श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचेंगे. सावन में अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भगवान शिव की दूध, जल, गन्ने के रस आदि से अभिषेक करेंगे.