राजस्थान: 13 सालों में 6 बार हुआ आंदोलन पर अब तक नहीं बुझी गुर्जर आरक्षण की आग

23 मई 2008 को तीसरी बार आरक्षण के लिए आंदोलन हुआ. पीलुकापुरा ट्रेक पर बयाना मे रेले रोकों आंदोलन की फिर से शुरूआत हुई. 

राजस्थान: 13 सालों में 6 बार हुआ आंदोलन पर अब तक नहीं बुझी गुर्जर आरक्षण की आग
गुर्जर समाज 5 प्रतिशत आरक्षण की मांग में लगातार आंदोलन पर है.

जयपुर/ आशीष चौहान: राजस्थान में गुर्जर आंदोलन की आग बुझने का नाम नहीं ले रही. गुर्जर आंदोलन के इतिहास में जाएं तो आपको बता दें कि 13 साल पहले उठे इस मामले में 72 गुर्जरों ने अपनी जान गवाई है. इस आंदोलन की शुरूआत 2006 में गुर्जर समुदाय को एसटी में शामिल करने की मांग पर हुई थी. जब से लेकर अब तक राजस्थान में आरक्षण की आग नहीं बुझी है. अब तक सरकार ने गुर्जरों को आरक्षण देने की कोशिश तो की, लेकिन मामला कोर्ट में अटकता चला गया. इन 13 सालों में 4 बार बीजेपी और दूसरी बार कांग्रेस राज में आंदोलन हो रहा है. अब तक गुर्जरों ने 5 बार ट्रैक रोका, लेकिन आज भी आरक्षण की मांग जारी है.

2006 में गुर्जरों को एसटी में शामिल करने की मांग पर पहली बार आंदोलन हुआ था. आंदोलन के बीच पटरियां उखाड़ी गईं. जिसके बाद भाजपा सरकार ने इस मामले में कमेटी बनाई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. इसके बाद 21 मई 2007 को पीपलखेड़ा पाटोल में आरक्षण के लिए फिर से आंदोलन हुआ, जिसमें पुलिस फायरिंग में 28 लोगों की जाने गईं. मामला बढ़ने के बाद भाजपा सरकार से समझौता हुआ और चौपडा कमेटी बनाई गई लेकिन कमेटी ने गुर्जरों को एसटी आरक्षण के दर्जें के लायक नहीं माना.

23 मई 2008 को तीसरी बार आरक्षण के लिए आंदोलन हुआ. पीलुकापुरा ट्रेक पर बयाना मे रेले रोकों आंदोलन की फिर से शुरूआत हुई. जिसमें एक बार फिर से पुलिस फायरिंग में 7 लोग मारे गए. इसके बाद गुर्जरों द्वारा सिंकदरा में हाईवे जाम किया गया, जिसमें 23 लोगों की जाने गई. जिसके बाद बीजेपी सरकार गुर्जरों के लिए एसबीसी आरक्षण लेकर आई, जिसमें गुर्जर समाज को 5 फीसदी आरक्षण दिया गया,लेकिन इस बार मामला हाईकोर्ट में अटक गया. 2 साल बाद गुर्जर फिर गरजे और 24 दिसंबर 2010 को पीलुकापुरा में रेल रोकी गई. जिसके बाद कांग्रेस सरकार से 5 फीसदी आरक्षण को लेकर समझौता हुआ. लेकिन मामला अभी भी कोर्ट में ही अटका हुआ था, इस बार भी यही पेंच फंसा हुआ था कि आरक्षण का दायरा 50 फीसदी से उपर जा रहा है.

इस बार भी आरक्षण नहीं मिलने के बाद गुर्जरों ने फिर से हुंकार भरी. पांच साल बाद 21 मई 2015 को पीलुकापुरा में आंदोलन हुआ. जिसके बाद बीजेपी सरकार ने गुर्जर समेत 5 जातियों को 5 प्रतिशत एसबीसी आरक्षण दिया, जिसके बाद एक बार फिर से हाईकोर्ट ने ये कहते हुए रोक लगा दी कि आरक्षण का दायरा 50 फीसदी से बाहर चला गया. अब गुर्जरों को 1 फीसदी आरक्षण का लाभ मिल रहा है. अब एक बार फिर से आरक्षण के लिए आंदोलन जारी है. 

13 साल में गुर्जर आरक्षण आंदोलन में 754 केस दर्ज हुए. इनमें से 105 कोर्ट में हैं. 35 मामलों की पुलिस जांच कर रही है. 614 केसों में या तो एफआईआर लग गई या केस वापस लिए गए. अभी चल रहे आंदोलन में अब तक तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया गया है.