गुर्जर नेताओं से सचिन पायलट की बातचीत जारी, राज्य सरकार जा सकती है सुप्रीम कोर्ट

गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने राज्य सरकार को शुक्रवार से राज्यस्तरीय आंदोलन की चेतावनी दी थी.

गुर्जर नेताओं से सचिन पायलट की बातचीत जारी, राज्य सरकार जा सकती है सुप्रीम कोर्ट
राजस्थान में नई सरकार के आते ही गुर्जरों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. (फाइल फोटो)

आशीष चौहान, जयपुर: राजस्थान में गुर्जर आरक्षण के मुद्दे पर राज्य सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की गुर्जर समुदाय के नेता हिम्मत सिंह से गुरुवार को वार्ता जारी है. इस दौरान पायलट बैंसला के द्वारा आंदोलन की दी गई चेतावनी के बाद इस मुद्दे को सुलझाने के लिए उनसे बातचीत कर रहे है. डेढ़ घंटे से जारी इस वार्ता के दौरान इस मुद्दे को सुलझाने का प्रयास राज्य सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर पायलट कर रहे हैं.

बता दें, गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने राज्य सरकार को शुक्रवार से राज्यस्तरीय आंदोलन की चेतावनी दी थी. जिसके बाद मुख्य सचिव ने आदेश जारी कर राज्य के गुर्जर बाहुल्य क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. इसके अलावा इन इलाकों से गुजरने वाले रेलवे लाइन की सुरक्षा भी सरकार ने बढ़ा दी है. 

सूत्रों के हवाले से खबर मिल रही है कि, इस मामले को लेकर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जा सकती है. इससे पहले पिछली वसुंधरा सरकार के कार्यकाल के दौरान एसबीसी आरक्षण विधेयक -2012-17 को 9 दिसंबर 2016 में हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था. उस पर पिछली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में SLP लगा रखा है. गहलोत सरकार SLP पर जल्द सुनवाई करने के लिए प्रार्थना पत्र सुप्रीम कोर्ट में दे सकती है. जिसके माध्यम से 50% से बाहर आरक्षण की तय समय सीमा को ले जाने की अनुमति ली जा सकती है.

आपको बता दें कि, राजस्थान में एक बार फिर से गुर्जर आरक्षण आंदोलन की आग सुलगने लगी है. जहां गुर्जरों ने आरक्षण के लिए आंदोलन करने की चेतावनी दी है वहीं प्रदेश के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि पिछली सरकार ने जो भी गलतियां की है उन्हें नहीं दोहराएंगे, मौजूदा सरकार वार्ता के जरिए उचित समाधान निकालेगी. 

जनवरी में हुए गुर्जर आंदोलन संघर्ष समिति की बैठक के बाद कर्नल किरोडी सिंह बैंसला के तेवर इस बार भी काफी तीखे नजर आए थे. बैंसला ने कहा था कि, 'मैं इस बार कफन बांधकर आया हूं, सरकार को चैन से राज नहीं करने दूंगा. केंद्र सरकार ने चंद दिनों ने सवर्णों को आरक्षण दिया है तो हमे आरक्षण क्यों नहीं मिल सकता. 20 दिन में सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट करे, नहीं तो एक बार फिर से सड़को पर गुर्जर समाज का आंदोलन होगा.

बता दें कि पहली बार राज्य सरकार 2008 में गुर्जरों को आरक्षण देने के लिए विधेयक लाई थी. जिसमें कुल आरक्षण 68 प्रतिशत हो गया था. इस विधेयक के अनुसार ईबीसी को 14, 5 प्रतिशत एसबीसी, 21 प्रतिशत ओबीसी, 16प्रतिशत एससी, 12 प्रतिशत एसटी को आरक्षण देने का प्रावधान रखा गया था. लेकिन कोर्ट ने यह कहते हुए रोक लगाया कि उसमें आरक्षण प्रतिशत तय सीमा को पार कर रहा है. 

वहीं, 2008 में कोर्ट के स्टे के बाद राज्य सरकार 2012 में भी इसका नोटिफिकेशन लाई थी. जिसमें गुर्जर समेत एसबीसी की पांचों जातियों को 5 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था. लेकिन इसे भी कोर्ट में चैलेंज किया गया और कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी. जबकि 2015 में भी राज्य सरकार ने गुर्जरों को आरक्षण देने के लिए विधेयक लाई थी. लेकिन कोर्ट ने ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट को सही नहीं माना और आरक्षण को खारिज कर दिया. 

इसके बाद 2018 में राजस्थान सरकार गुर्जर आरक्षण के लिए विधेयक लेकर आई थी. विधेयक सदन में पास भी हो गया. लेकिन कुछ दिनों बाद ही हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी. जिसके बाद राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में गई, लेकिन वहां भी कोर्ट ने आरक्षण 50 प्रतिशत ज्यादा होने पर इसके लागू होने पर रोक लगा दी. कोर्ट की रोक के बाद गुर्जरो को आरक्षण देने के लिए राज्य सरकार ने मोर बैकवर्ड क्लास(More Backward Class) बनाया, जिसमें उनके लिए 1% आरक्षण का प्रावधान किया गया. 

अब राजस्थान में नई सरकार के आते ही गुर्जरों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. इससे पहले भी वसुंधरा सरकार के आखिरी में गुर्जरों ने आंदोलन की धमकी दी थी, लेकिन जब तक गुर्जर आंदोलन करते तब तक राज्य में आचार संहिता लग चुकी थी.