जयपुर में सर्दी का सितम जारी, मैदानों में दिखी बर्फ की चादर

प्रदेश में तेज सर्दी का सितम लगातार जारी है. राजधानी जयपुर के आमेर में कई दिनों से कड़ाके की ठंड के चलते दो दिन से बर्फ जम रही है. यहां तक कि घरों के बाहर खड़े गाडियों और घास पर ओस की बूंदों की बर्फ की चादर जमी हुई नजर आई. तेज सर्दी से बचाव के लिए लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं. 

जयपुर में सर्दी का सितम जारी, मैदानों में दिखी बर्फ की चादर
कड़ाके की सर्दी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है.

दामोदर प्रसाद/जयपुर: प्रदेश में तेज सर्दी का सितम लगातार जारी है. राजधानी जयपुर के आमेर में कई दिनों से कड़ाके की ठंड के चलते दो दिन से बर्फ जम रही है. यहां तक कि घरों के बाहर खड़े गाडियों और घास पर ओस की बूंदों की बर्फ की चादर जमी हुई नजर आई. तेज सर्दी से बचाव के लिए लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं. 

वहीं, सुबह-सुबह ज्यादा ठंड और कोहरा होने की वजह से स्थानीय लोगों को भी खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. तेज ठंड के चलते लोगों का घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है. इसके साथ ही फसलों पर भी ओस की बूंदें बर्फ के रूप में जम रही है. वहीं, बर्फ जमने से किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें बढ़ गई है. फसलों में बर्फ जमने से किसानों को फसल खराबे की चिंता सताने लगी है. 15 दिन पहले हुई ओलावृष्टि से जहां किसानों की फसल खराब हो गई थी. अब मौसम में फिर से आए बदलाव के चलते बर्फ जमने से किसानों को सरसों गेहूं जो चना की फसल खराब होन की चिंता सताने लगी है. किसानों का कहना है किसी तरह घर पर जमीन पर फसल पूरी तरह नष्ट हो जाएगी.  

रेतीले धोरों में इन दिनों कड़ाके की सर्दी ने कश्मीर का सा नजारा बना दिया है. कड़ाके की सर्दी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. पिछले 1 सप्ताह में मौसम के लगातार बदलाव के चलते जनजीवन खासा प्रभावित है. कभी कोहरा-शीतलहर तो कभी ओलावृष्टि ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया था. वहीं, अब माइनस में तापमान पहुंचने से खेतों में फसलों पर बर्फ जम गई है, जिससे किसानों के चेहरे पर चिंता सताने लगी है.

वहीं, शेखावाटी में लगातार बदलते मौसम ने जनजीवन को खासा प्रभावित कर दिया है. दो दिनों से तापमान में भारी गिरावट और माइनस में पहुचने से बर्फ जम गई है. पिछले 15 दिनों  में लगातार मौसम के बदलाव के चलते अल सुबह कोहरा तो सहित लहर ने लोगों की दिनचर्या प्रभावित कर दी है. कड़ाके की हाड़ कंपाने वाली सर्दी ने सभी का हाल बेहाल कर दिया है.

मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो 'आम तौर पर ज्यादा ठंड की अवधि 5 या 6 दिनों होती है. लेकिन इस साल 13 दिसंबर से तापमान में गिरावट जारी है. यह अप्रत्याशित है. हालांकि, अब ऐसा लगता है कि 31 दिसंबर के बाद ही राहत मिल सकती है'. वैज्ञानिकों का मानना है कि 16 से 17 दिनों से अधिक समय तक इस तरह के ठंडे मौसम का होना असामान्य है. भीषण शीतलहर से उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में सामान्य जीवन प्रभावित हुआ है.