Sri Ganganagar: पुण्य पाने की आड़ में 'बड़ा पाप', नहर के पानी को कर रहे दूषित

कहते हैं कि ईश्वर के प्रति आस्था इंसान को गलत राहों पर जाने से रोकती है लेकिन आस्था के नाम पर अगर हम प्रकृति (Nature) से खिलवाड़ करने लगे तो सवाल उठना लाजिमी है.

Sri Ganganagar: पुण्य पाने की आड़ में 'बड़ा पाप', नहर के पानी को कर रहे दूषित
नहर में अब पानी की जगह गंदगी का अंबार दिखाई देता है.

Sri ganganagar: हर समुदाय से जुड़े लोगों में अपने-अपने धर्म (Religion) में आस्था होती है. आस्था हमारे धर्म के प्रति, हमारे देवों के प्रति समर्पण का भाव दिखाता है. ईश्वर के प्रति समर्पण और आस्था अच्छी बात है.

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कहते हैं कि ईश्वर के प्रति आस्था इंसान को गलत राहों पर जाने से रोकती है लेकिन आस्था के नाम पर अगर हम प्रकृति (Nature) से खिलवाड़ करने लगे तो सवाल उठना लाजिमी है. सवाल इसलिए ये कि ये हमारे जीवन से जुड़ी है, ये हमारे विरासत से जुड़ी है. ये हमारे आने वाली पीढ़ी के भविष्य से जुड़ी है. 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) भले ही नदीं नहरों को स्वच्छ निर्मल करने के लिए योजनाएं बना रहे हों लेकिन प्रतिदिन खंडित मूर्तियों, पूजन सामग्री, वस्त्र आदि को नहरों में बहाने से पानी दूषित हो रहा है. लोग अब भी जागरूक नहीं हुए हैं और न ही उन्हें आनेवाले संकट का अंदेशा है. ये सब कुछ हो रहा है केवल और केवल धार्मिक आस्था की आड़ में. प्रतिदिन खंडित मूर्तियां, पूजन सामग्री की वजह से नहरों का पानी दूषित हो रहा है. नहरों (Canals) में प्रतिदिन पूजन सामग्री खंडित मूर्तियां और अन्य कचरा डाला जा रहा है, जिससे नहरों में प्रदूषण बढ़ रहा है और लोग बिमारियों के शिकार हो रहे हैं. 

नहर बन गईं गंदे नाले
सादुलशहर (Sadul Shahar) से गुजरने वाले नहरों का हाल देखेंगे तो आपको यकीं करना मुश्किल हो जाएगा कि कभी इस नहर में कल-कल निर्मल और स्वच्छ पानी बहता था और लोगों की प्यास बुझाता था. इस नहर में अब पानी की जगह गंदगी का अंबार दिखाई देता है. इस नहर में देवी देवताओं की खंडित मूर्तियां, पूजन सामग्री के अवशेष और प्लास्टिक के गारबेज नजर आएंगे. नहर में ये सब देखकर किसी की भी धार्मिक भावना आहत हो सकती है लेकिन सवाल यह है कि धार्मिक आस्था की आड़े में प्रकृति से खिलवाड़ का हक इंसान को आखिर किसने दिया है.

क्या कहना है पुजारियों का
श्री सत्यनारायण मंदिर के पुजारी सुंदरपाल शर्मा कहते हैं, कि लोगों को केवल चावल, पुष्प, मिटटी जैसी सामग्री ही प्रवाहित करने को कहा जाता है, लेकिन लोग मूर्तियां, वस्त्र, नारियल, चूड़ियां और भी अन्य सामग्री डाल देते हैं, जिससे हालत खराब हो रहे हैं. लोगों को चाहिए कि इन सब चीजों को जमीन में गाड़ दें. 

पुण्य पाने की आड़ में इंसान का सबसे बड़ा पाप 
इसी नहर से सादुलशहर और आसपास के इलाकों को पीने के पानी की सप्लाई जलदाय विभाग के माध्यम से की जाती है. डॉक्टर्स की मानें तो इससे पानी प्रदूषित हो रहा है और फ़िल्टर करने के बाद भी पानी पूरी तरह शुद्ध नहीं हो पाता है. इस तरह के प्रदूषित पानी से पेट की सभी बीमारियां हैजा, पीलिया, उलटी दस्त हो सकते हैं. 

क्या कहना है समाजसेवी का
समाजसेवी और शिक्षाविद प्रदीप झोरड़ कहते हैं कि प्रशासन के साथ-साथ हम सभी को भी जागरूक होना होगा. नहर में ये सामग्री डालने से पुण्य तो नहीं मिल रहा बल्कि लोगों का स्वास्थ्य ही खराब हो रहा है. जागरण और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में लोगों को आगाह करना होगा कि कचरा और पूजन सामग्री नहर में डालने के बजाय कहीं और निस्तारित किया जाए, जिससे नहरें भी प्रदूषित न हो. साथ ही इंसानों की धार्मिक भवनाएं भी आहत नहीं हों. लोग ये तर्क भी देते हैं, कि पूजन सामाग्री के अवशेष कहीं और निस्तारण करने से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं, लेकिन हकीकत ये है कि धार्मिक आस्था और पुण्य की आड़ में आज इंसान सबसे बड़ा पाप कर रहा है. 

COPY-SUJIT KUMAR NIRANJAN