हैदराबाद के स्कूल ने झील को बचाने के लिए किया ऐसा काम, हर कोई कर रहा तारीफ

पहले झील के आसपास गंदगी रहती थी स्कूल के गोद लेने के बाद यहां की तस्वीर बदल गई है. अब इसके आस-पास आप प्राकृतिक सुंदरता नजर आती है. 

हैदराबाद के स्कूल ने झील को बचाने के लिए किया ऐसा काम, हर कोई कर रहा तारीफ
प्राइवेट स्कूल के स्टाफ और बच्चों की बदौलत लौटी Meedikunta झील की रौनक

हैदराबादः एक दौर में हैदराबाद (Hyderabad) भी राजस्थान के खूबसूरत शहर उदयपुर की तरह झीलों के शहर के नाम से जाना जाता था. वैसे तो हैदराबाद के भूगोल और इतिहास में हुसैन सागर झील का विशेष महत्व है. हालांकि यहां और भी दूसरी झीलें हैं. लेकिन अब यहां की अधिकतर झीलें या तो अतिक्रमण का शिकार हो चुकीं या फिर लुप्त हो चुकी हैं. फिर भी इस बीच दिलचस्प बात ये है कि शहर के एक स्कूल ने एक सराहनीय काम किया है जिसके चलते उसकी काफी तारीफ हो रही है. दरअसल, हैदराबाद के Fountainhead Global स्कूल ने यहां की एक झील को पिछले साल गोद लिया था. जो लंबे समय से अपने खर्च पर झील की देख-रेख करता आ रहा है. 

यहां बात हो रही है हैदराबाद ही मदीकुंटा (Meedikunta) झील के बारे में. यह झील शहर के मियापुर क्षेत्र के पश्चिम में स्थित है. पहले झील के आसपास गंदगी रहती थी स्कूल के गोद लेने के बाद यहां की तस्वीर बदल गई है. अब इसके आस-पास आप प्राकृतिक सुंदरता नजर आती है. अब झील का पानी भी साफ है यहां का नजारा भी बेहद खूबसूरत दिख रहा है.

ये भी पढ़ें- यहां के चिड़ियाघर में मनाया गया चिंपैंजी का Birthday, ऐसे दिया गया स्पेशल सरप्राइज

Fountainhead Global प्राइवेट स्कूल की तरह अगर दूसरे शहरों के स्कूल्स भी अपने आस-पास के वातावरण बेहतर बनाने में ऐसे कदम उठाएंगे तो यकीनन हम एक नई सोच और नए समाज  का निर्माण कर सकते हैं. इसी तरह शहर के हर अच्छे स्कूल को हमेशा ही अपने आस-पड़ोस को बेहतरीन बनाने में योगदान देना चाहिए.

झील के कायापलट करने में मेघना मुनुसुरी का अहम योगदान है. मेघना मुनुसुरी Fountainhead स्कूल की फाउंडर हैं. वह कहती हैं, ''मेरा मानना ​​है कि इस तरह के हमारे कार्य भावी पीढ़ियों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करेंगे ताकि वे भी अपने दौर में ऐसे सराहनीय कदम उठाएं."

बता दें कि स्कूल ने बजाए विभिन्न सरकारी विभागों से संपर्क के टीचर्स, स्टूडेंट्स और उनके पेरेंट्स के साथ मिलकर फंड कलेक्ट किया और झील को बेहतर बनाया है. स्कूल ने साल 2019 के अंत से इस झील की कायापलट करने की ठानी थी और कोविड-19 के कहर से पहले मार्च में इस काम को अंजाम दे दिया था.

ये भी देखें-