अपनी पसंद से शादी करने वालों को इस राज्य की सरकार देगी 'इनाम', मिलेंगे इतने हजार रुपए

उत्तराखंड (Uttarakhand) सरकार का ये फैसला अपनी पसंद से विवाह करने की चाहत रखने वालों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Nov 21, 2020, 21:02 PM IST

देहरादून : उत्तराखंड सरकार (Uttarakhand Government) प्रदेश में अन्तर्जातीय और अंतरधार्मिक विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए किसी अन्य जाति या धर्म के व्यक्ति से विवाह करने वालों को 50,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि दे रही है. प्रदेश के सामाजिक कल्याण विभाग के अधिकारियों ने यहां बताया कि यह प्रोत्साहन राशि कानूनी रूप से पंजीकृत अंतरधार्मिक विवाह करने वाले सभी दंपत्तियों को दी जाती है. अंतरधार्मिक विवाह किसी मान्यता प्राप्त मंदिर, मस्जिद, गिरिजाघर या देवस्थान में संपन्न होना चाहिए .

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अंतरजातीय विवाह

Inter-caste marriage

अंतरजातीय विवाह करने पर प्रोत्साहन राशि पाने के लिए दंपत्ति में से पति या पत्नी किसी एक का भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 के अनुसार, अनुसूचित जाति का होना आवश्यक है .

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सरकारी आदेश

Government Order

टिहरी के जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल ने बताया कि राष्ट्रीय एकता की भावना को जागृत रखने तथा समाज में एकता बनाए रखने के लिए अंतरजातीय एवं अंतरधार्मिक विवाह काफी सहायक सिद्ध हो सकते हैं.

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अंतरधार्मिक विवाह

Inter-Relegion marriage

ऐसे विवाह करने वाले दंपत्ति शादी के एक साल बाद तक प्रोत्साहन राशि पाने के लिए आवेदन कर सकते हैं .

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बीजेपी सरकार का फैसला

Amendment in BJP Govt

वर्ष 2000 में उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद इससे संबंधित नियमावली को जैसे का तैसा स्वीकार कर लिया गया था और ऐसे विवाह करने वाले दंपत्तियों को 10,000 रुपए दिए जाते थे. वर्ष 2014 में इसमें संशोधन कर इस प्रोत्साहन राशि को बढ़ाकर 50,000 रुपए कर दिया गया.

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दूसरे राज्यों से अलग है उत्तराखंड

Tale of Interfaith Marriages Amidst 'Love Jihad' Controversies

शादी के नाम पर महिलाओं के कथित धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए भाजपा शासित कई राज्य कानून बनाने पर विचार कर रहे हैं वहीं उत्तराखंड सरकार ऐसे विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए किसी अन्य जाति या धर्म के व्यक्ति से विवाह करने वालों को 50,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि दे रही है.

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भारत में विवाद का विषय

Disputed subject in India

अंतरजातीय शादियों को लेकर जो विवाद भारत में होता है वो शायद ही और किसी देश में होता हो. जहां तक घर वालों की मर्जी के खिलाफ शादी करने की बात है तो. खुद भगवान कृष्ण और रुक्मणी का विवाह बिना परिवार की मर्जी के हुआ था.

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फैसला

Approach

सबसे अच्छा विवाह वो होता है जहां शादी में दहेज नहीं लिया जाता. दोनों परिवारों की रजामंदी से शादी होती है. ऐसे में उत्तराखंड सरकार का ये फैसला अपनी पसंद से विवाह करने की चाहत रखने वालों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.

प्रतीकात्मक तस्वीर साभार : (AFP)