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प्रियंका की तोप चली तो वह इंदिरा गांधी की तरह हुकुम की रानी साबित होंगी: शिवसेना

शिवसेना ने मुखपत्र में प्रियंका की तुलना उनकी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से की है.

प्रियंका की तोप चली तो वह इंदिरा गांधी की तरह हुकुम की रानी साबित होंगी: शिवसेना
शिवसेना ने इंदिरा गांधी से की प्रियंका की तुलना. फाइल फोटो

अमित त्रिपाठी, मुंबई: शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' में प्रियंका गांधी वाड्रा को कांग्रेस का महासचिव बनाए जाने को लेकर टिप्‍पणी की है. शिवसेना ने मुखपत्र में प्रियंका की तुलना उनकी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से की है. शिवसेना ने कहा है कि प्रियंका गांधी की तोप चली और उनकी सभाओं में भीड़ उमड़ने लगी तो यह महिला इंदिरा गांधी की तरह हुकुम की रानी साबित हो सकती है.

शिवसेना ने कहा है कि प्रियंका गांधी आखिरकार सक्रिय राजनीति में उतर ही गईं. कांग्रेस ने महासचिव पद पर उनकी नियुक्ति की है. आगामी लोकसभा चुनाव में सफलता प्राप्त करने के लिए सबकुछ करने की तैयारी है, ऐसा कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने इस बहाने दिखा दिया है. राहुल गांधी असफल हुए इसलिए प्रियंका को लाना पड़ा, ऐसी अफवाहें उड़ाई जा रही हैं, जिसमें दम नहीं.

इसमें आगे लिखा गया है कि राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष हैं. ‘राफेल’ जैसे मामले में उन्होंने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. इसे एक बार नजरअंदाज भी कर दें तो तीन महत्वपूर्ण राज्यों में कांग्रेस ने बीजेपी से सत्ता छीन ली और उसके चलते मरणासन्न कांग्रेस को संजीवनी मिली. उसका श्रेय उन्हें न देना, कुंठित प्रवृत्ति की निशानी है. 

उत्‍तर प्रदेश में लोकसभा चुनावों के लिए सपा और बसपा के बीच हुए गठबंधन पर भी शिवसेना ने टिप्‍पणी की है. पार्टी ने सामना में लिखा है कि उत्तर प्रदेश में मायावती और अखिलेश यादव की युति हुई. कांग्रेस को उसमें महत्वपूर्ण स्थान नहीं दिया गया. लेकिन राहुल गांधी ने अत्यंत संयम से, किसी भी तरह का हंगामा न करते हुए कहा है ‘कोई बात नहीं. हम उत्तर प्रदेश की सभी सीटें लड़ेंगे और जहां संभव होगा वहां सपा-बसपा की सहायता करेंगे.’ इस तरह की नीति अपनाना और इसके बाद प्रियंका को सक्रिय राजनीति में लाकर उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी देने के पीछे एक प्रकार की योजना है और उसका फायदा होगा, ऐसा दिखाई दे रहा है. 


फाइल फोटो

मुखपत्र में कहा गया है 'प्रियंका गांधी राजनीति में कभी नहीं उतरेंगी. उनके पति रॉबर्ट वाड्रा उपद्रवी हैं. गांधी परिवार का इस्तेमाल कर उन्होंने कई आर्थिक और भूखंड घोटाले किए हैं. इसलिए प्रियंका पर दबाव लाया जा सकता है’, ऐसी चर्चा थी. लेकिन वाड्रा के होने या न होने वाले मामलों को अधर में लटकाए रख प्रियंका मैदान में उतर चुकी हैं और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन पर बोलना पड़ा. पीएम मोदी ने कहा है कि कुछ लोगों के लिए परिवार ही पार्टी है. कुछ स्थानों पर गुट या खुद के गिरोह की राजनीति की जाती है और उनका परिवार होता है तो कुछ स्थानों पर ‘घराने’ राजनीति करते हैं.

शिवसेना ने लिखा है कि राजनीति और सत्ता में कई ऐसे लोग हैं, जो सालों से गुड़ पर चिपकी हुई चींटी की तरह चिपककर बैठे हैं और ये भी घरानाशाही से अलग नहीं. तीन राज्यों में बीजेपी की हार हुई. उसके पीछे यही वजह है. नेहरू-इंदिरा गांधी के बारे में भाजपा नेतृत्व ने मन में कटुता रखी क्योंकि यही परिवार भाजपा को चुनौती दे सकता है और 2019 में बहुमत का आंकड़ा प्राप्त करने में मुश्किलें खड़ी कर सकता है, इस बात का भय है. यह सत्य है.

कांग्रेस पार्टी के बारे में, गांधी परिवार के प्रति हमारे मन में ममता होने की कोई वजह नहीं. कांग्रेस पार्टी को किस तरह चलाना है, मायावती, अखिलेश यादव या शिवसेना किस तरह की भूमिका कब ले, यह तय करने का अधिकार अन्य लोगों को नहीं है. 


फाइल फोटो

प्रियंका गांधी को सक्रिय किया जाए, ऐसा कांग्रेस को लगता होगा तो यह उनका अधिकार है. हम उनके निर्णय में हस्तक्षेप क्यों करें? प्रियंका गांधी, इंदिरा गांधी का हूबहू रूप हैं और उनकी बोल-चाल में इस तरह की झलक दिखाई देती है. इसलिए हिंदी भाषी क्षेत्रों में कांग्रेस को निश्चित ही लाभ होगा.

प्रियंका गांधी के राजनीति में आने से रॉबर्ट वाड्रा के दबे हुए मामले तेजी से बाहर आएंगे, इसका भय होने के बावजूद प्रियंका ने मैदान में छलांग लगाई है. हम रक्षात्मक नहीं बल्कि आक्रामक राजनीति पर जोर देने वाले हैं. उसी के लिए प्रियंका को जिम्मेदारी देने का निर्णय लिया गया है, ऐसा राहुल गांधी ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा है. राहुल गांधी ने बहुत ही अच्छा दांव चला है. प्रियंका की तोप चली और उनकी सभाओं में भीड़ उमड़ने लगी तो यह महिला इंदिरा गांधी की तरह हुकुम की रानी साबित हो सकती है.