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अयोध्‍या केस: सुप्रीम कोर्ट में 33वें दिन की सुनवाई आज; मीनाक्षी अरोड़ा की दलीलें हो सकती है पूरी

Supreme Court : CJI ने कहा था कि हमारे पास सुनवाई के लिए सिर्फ साढ़े 10 दिन बचे हैं. उसके बाद अगर हम 4 हफ्ते में फैसला दे पाए तो चमत्‍कार होगा. 

अयोध्‍या केस: सुप्रीम कोर्ट में 33वें दिन की सुनवाई आज; मीनाक्षी अरोड़ा की दलीलें हो सकती है पूरी
फाइल फोटो

नई दिल्‍ली : अयोध्‍या मामले (Ayodhya Case) को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में 33वें दिन की सुनवाई आज होगी. आज मुस्लिम पक्ष की वकील मीनाक्षी अरोड़ा की बहस पूरी हो सकती है. दरअसल, गुरुवार को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सभी पक्षकारों से कहा था कि इस बात का ध्यान रखना होगा कि 18 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी हो जानी चाहिए. उसके बाद सुनवाई की तारीख आगे नहीं बढ़ाई जाएगी. CJI ने कहा था कि हमारे पास सुनवाई के लिए सिर्फ साढ़े 10 दिन बचे हैं. उसके बाद अगर हम 4 हफ्ते में फैसला दे पाए तो चमत्‍कार होगा. राजीव धवन ने कहा था कि मैं ASI रिपोर्ट पर कुछ बातें कोर्ट के सामने रखना चाहता हूं. इसकी कोर्ट ने अनुमति दे दी. बुधवार को मुस्लिम पक्ष की वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने ASI की रिपोर्ट की प्रामाणिकता पर सवाल उठाया था, गुरुवार को राजीव धवन ने कहा था कि बुधवार की वह दलील व्यर्थ थी. रिपोर्ट की प्रमाणिकता को लेकर कोई संदेह नहीं है.

धवन ने कहा था कि ट्रायल के दौरान ASI रिपोर्ट के खिलाफ आपत्ति की गईं थी लेकिन कोर्ट ने उसे स्वीकार नहीं किया था. बुधवार को ASI की रिपोर्ट पर आपत्ति जताने के बाद सुप्रीम कोर्ट के सवाल का जवाब देते हुए राजीव धवन ने कहा था कि हाईकोर्ट के जजों ने कहा था कि साक्ष्य के बंद होने के बाद वह आपत्तियों की जांच करेगा. मुस्लिम पक्ष की वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा था कि विवादित ढांचे के नीचे एक ईदगाह हो सकता है. वहां ASI की खुदाई मे मिले दीवारों के अवशेष ईदगाह के हो सकते है. जस्टिस अशोक भूषण ने इस पर टोकते हुए कहा था कि मुस्लिम पक्ष का तो ये मानना रहा है कि मस्जिद खाली जगह पर बनाई गई, लेकिन अब आप कह रही है कि उसके नीचे ईदगाह था? अगर ऐसा था तो ये आपकी याचिका में ये शामिल क्यों नही था.

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मीनाक्षी अरोड़ा ने जवाब दिया था कि 1961 में जब हमने केस दायर किया तब ये मुद्दा ही नहीं था. ये बात तो 1989 में सामने आई.जब हिन्दू पक्ष ने मुकदमा दायर कर दावा किया था कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी वह मेरी अब की जिरह रिपोर्ट पर आधारित है. मेरे कहने का मतलब था कि जब ये कहा जा रहा है कि दीवारें मंदिर की हो सकती है तो ये भी अनुमान लगाया जा सकता है कि ये दीवारें ईदगाह की है. मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा था कि ASI ने खुद स्वीकार किया था कि उसको लेयर को स्ट्रैटेग्राफ़िक पहचान करने में दिक्कत हुई थी, कुल 184 हड्डियां मिली थी लेकिन HC ने सिर्फ 21.2% का ही अध्‍ययन किया गया, और उन्होंने 9 कल्चर के आधार पर 9 समयकाल के बारे में बताया.

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ASI ने जिन सभ्‍यताओं के बारे में बताया है उनका मन्दिर से कोई लेना देना नहीं है. ASI ने अपनी रिपोर्ट में शुंग, कुशन और गुप्ता समयकाल के बारे में बताया है. कार्बन डेटिंग का इस्तेमाल यह पता करने के लिए किया जाता था कि कोई चीज़ कितनी पुरानी है लेकिन ASI हड्डियों का इस्तेमाल नहीं करता इस लिए इनकी कार्बन डेटिंग नही की गई. मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा था कि गुप्त वंश का समयकाल 4-6AD रहा है, और इसका गुप्त वंश से कोई लेना देना नहीं है. मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा था कि ASI ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि वहां पर हर जगह अवशेष थे और बाबरी मस्जिद के बारे में कुछ नहीं बताया लेकिन उन्होंने राम चबूतरे के स्थान को राम चबूतरा बताया है. उन्‍होंने कहा था कि जिस बड़े स्‍ट्रक्‍चर की बात हो रही है. वह 12वीं सदी में बनाया गया था. उसका गुप्त समयकाल से कोई मतलब नहीं है.