पुलिसकर्मियों को विपरीत परिस्थितियों में ड्यूटी करने के लिए पढ़ाया गया गीता का पाठ

पुलिस की कार्यशैली और तनाव में ड्यूटी करने के चलते पुलिस को गाहे-बगाहे फजीहत भी झेलनी पड़ती है.

पुलिसकर्मियों को विपरीत परिस्थितियों में ड्यूटी करने के लिए पढ़ाया गया गीता का पाठ
(फाइल फोटो)

(दीपचंद्र जोशी)/नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश पुलिस अब अपने अधिकारियों और पुलिस कर्मियों को आत्मविश्वास और विपरीत परिस्थितियों में ड्यूटी को अंजाम देने के लिए भागवत गीता का सहारा लेने जा रही है. उत्तर प्रदेश पुलिस के सबसे बड़े प्रशिक्षण संस्थान में से एक मुरादाबाद स्थित डॉ भीमराव अंबेडकर एकेडमी में अधिकारियों और ट्रेनिंग कर रहे कैडेट को भागवत गीता के जरिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है. अधिकारियों के मुताबिक व्यहवारिक जीवन की दिक्कतों से निपटने के लिए भागवत गीता के श्लोक संजीवनी की तरह है. उत्तर प्रदेश पुलिस अपनी कार्यशैली को लेकर कई बार सवालों के घेरे में रहती है. पुलिस की कार्यशैली और तनाव में ड्यूटी करने के चलते पुलिस को गाहे-बगाहे फजीहत भी झेलनी पड़ती है.

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पुलिस कर्मियों को एक संतुष्टि और संयमित जीवन जीने की प्रेरणा दिलाने के लिए अब पुलिस अकैडमी में भागवत गीता के श्लोकों और दृष्टांतो की मदद ली जा रही है, पुलिस अकैडमी में ट्रेनी डिप्टी एसपी और सब इंस्पेक्टर के बैंच को आज-कल भागवत गीता के जरिए अनुशासन और लोगों से संयमित व्यवहार करने का पाठ पढ़ाया जा रहा है. भागवत गीता में कर्म और फल की इच्छा मत करो जैसे इस लोगों के जरिए पुलिसकर्मियों को निस्वार्थ भाव से पीड़ित को न्याय दिलाने और बिना प्रलोभन के काम कर एक अच्छे अधिकारी बनने की नसीहत दी जा रही है.

पुलिस कर्मियों को अध्यात्म का ज्ञान देकर बताया जा रहा है. कि भौतिक सुख सुविधाओं से संतुष्टि होने की जगह इंसान को अपने कार्य से ज्यादा संतुष्टि और प्रसिद्धि मिलती है. सही और गलत की पहचान कर बिना किसी शंका के अपने विवेक से सही फैसला लेना और धैर्य से समस्या का समाधान कैसे किया जाए इसका भी भागवत गीता के इस लोगों से समझाया जा रहा है, पुलिस अधिकारियों के मुताबिक भागवत गीता, रामायण, महाभारत, पुराण , कुरान, बाइबिल जैसी धार्मिक ग्रंथों से भी कैडेट को जीवन जीने के बेहतरीन तरीको से अवगत कराना प्राथमिकता में है.

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उधर धर्म की जानकारी रखने वाले पंडित और मनोविज्ञान के जानकार भी पुलिस ट्रेनिंग सेंटर के अधिकारियों की इस पहल की तारीफ कर रहे है. धर्म और मनोविज्ञान दोनो का मानना है की जवानों को गीता का ज्ञान देने से उनमें कई बदलाव आएंगे. जवानों को न सिर्फ दिमागी रूप से शांति मिलेगी बल्कि उनके ऊपर लगने वाले मारपीट और उत्पीड़न के आरोपो में भी कमी आएगी. इतना ही नही आये दिन पुलिस वालों द्वारा की जा रही आत्महत्या का ग्राफ भी तेजी से कम होगा.

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पिछले कुछ सालों में पुलिसकर्मियों में बढ़ते तनाव के चलते खुदकुशी के मामले भी बड़े हैं ,साथ ही लगातार ड्यूटी करने से डिप्रेशन की समस्या भी उभरी है, ऐसे में अधिकारियों की कोशिश है कि भागवत गीता जैसी धार्मिक पुस्तकों के जरिए पुलिसकर्मियों को अच्छे और बुरे का ज्ञान कराया जाय ताकि पुलिसकर्मी अच्छे इंसान बनकर अपनी जिम्मेदारियों का बखूबी निर्माण करें और अपने कर्तव्यों को बिना किसी प्रलोभन के सही तरीके से अंजाम दें.