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लोकसभा चुनाव 2019: हरिद्वार में भाजपा को क्या नई दिशा दे पाएंगे रमेश पोखरियाल निशंक

पोखरियाल ने 1997 में उत्तर प्रदेश सरकार रहते हुए विकास मंत्री के पद पर भी कार्य किया.  

उत्तराखंड के गठन के बाद 2002 में हुए चुनावों में पोखरियाल को हार का सामना करना पड़ा.(फाइल फोटो)
उत्तराखंड के गठन के बाद 2002 में हुए चुनावों में पोखरियाल को हार का सामना करना पड़ा.(फाइल फोटो)

नई दिल्लीः संसद में सवाल करने, जन संपर्क, सांसद निधि खर्च, पार्टी कार्यकर्ताओं से तालमेल बनाने के साथ ही सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले रमेश पोखरियाल निशंक अक्सर विपक्ष के निशाने पर रहते हैं. कई बार तो खुद अपनी ही पार्टी के निशाने में आ चुके पोखरियाल ने हमेशा ही अपने सौम्य और संतुलित व्यवहार से आलोचकों को इसका जवाब भी दिया है, लेकिन वाबजूद इसके अक्सर ही वह किसी न किसी वजह से इनके निशाने पर बने ही रहते हैं. 

जीवन परिचय
पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा सांसद रमेश पोखरियाल निशंक का जन्म 15 जुलाई 1958 को पिनानी ग्राम में हुआ था और वह उत्तराखंड की राजनीति में भाजपा के एक बड़े नेता है. उनके पिता का नाम परमानन्द पोखरियाल और माता विश्वम्भरी देवी हैं. वहीं पोखरियाल की पत्नी का नाम कुसुमकान्‍ता पोखरियाल है. राजनेता के साथ ही उनकी पहचान एक कवि के रूप में भी है. 

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राजनितिक जीवन
रमेश पोखरियाल ने 90 के दशक में राजनिति में कदम रखा था. उत्तर प्रदेश के कर्ण प्रयाग विधानसभा क्षेत्र से सर्व प्रथम उन्होंने अपनी राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी. इसके बाद 1993 और 1996 में लगातार दो बार इसी विधान सभा क्षेत्र से विधायक रहे. पोखरियाल ने 1997 में उत्तर प्रदेश सरकार रहते हुए विकास मंत्री के पद पर भी कार्य किया.  

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उत्तराखंड के गठन के बाद 2002 में हुए चुनावों में पोखरियाल को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके अगले चुनाव 2007 में वे एक बार फिर से थालसिन सीट से चुनाव लड़े और जीत हासिल की. इस बार राज्य सरकारन ने पोखरियाल को चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बनाया. 2009 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने हरिद्वार से इन्हें अपना उम्मीदवार बनाया लेकिन उन्हें कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत के हांथो हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इसका बदला उन्होंने 2014 लोकसभा चुनाव में रावत को हरा कर ले लिया.

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निशंक अभी हरिद्वार क्षेत्र से लोक सभा सांसद और लोकसभा आश्वासन समिति के अध्यक्ष हैं. रमेश पोखरियाल का मुकाबला कांग्रेस के अंबरीश कुमार से है ऐसे में यह देखना बहुत ही दिलचस्प होगा कि 23 मई के बाद रमेश पोखरियाल निशंक का राजीनित कदम कितने आगे जाते हैं. 

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