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83 साल की उम्र में मौत के मुंह से वापस लौटा यह बुजुर्ग, मांसपेशियां फटने के बाद भी है जिंदा

आमतौर पर ऐसी स्तिथी में इंसान के बचने की कोई गुंजाइश नहीं होती, लेकिन समय रहते सर्जरी से उनकी जान बचा ली गई. 6 घण्टे तक चली इस सर्जरी के दौरान सिंथेटिक पैच लगाकर मरीज के दिल में बने छेद को भरा गया. 

83 साल की उम्र में मौत के मुंह से वापस लौटा यह बुजुर्ग, मांसपेशियां फटने के बाद भी है जिंदा
समय रहते सर्जरी से बुजुर्ग एन एस मेहरा की जान बचा ली गई.

नई दिल्लीः आपने अक्सर दिल का दौरा पड़ने और उसके इलाज से जुड़ी खबरें सुनी होंगी, आपने ये भी सुना होगा कि कई बार लोग सोने के बाद कभी नहीं उठते या यूं कहिये नींद में ही उन्हें साइलेंट अटैक होता है और वो सोते सोते मर जाते हैं. ऐसा ज्यादातर हार्ट रप्चर की स्थिति में होता है, जब तेज हार्ट अटैक होने से दिल की मांसपेशियां फट जाती हैं. इस स्थिति में इंसान के पास इतना समय भी नहीं होता कि वो किसी की मदद ले सके. या अस्पताल तक पहुंच सके, लेकिन आज वैशाली के मैक्स अस्पताल ने हार्ट रप्चर से एक आदमी को बचा कर मिसाल कायम की है. 

83 साल के एन एस मेहरा दिल्ली में बिजनेस मैन हैं. अचानक छाती में तेज दर्द के चलते उन्हें अस्पताल ले जाया गया. ईसीजी में सामने आया कि उनके दिल की मांसपेशियां फट गईं थीं जिसकी वजह से उनके दिल मे छेद हो गया और उन्हें भयानक दिल का दौरा पड़ा. अस्पताल लाने पर सबसे बड़ी चुनौती ये थी कि उनका ब्लड प्रेशर लो था और दिल के धड़कने की गति बहुत तेज थी. आमतौर पर ऐसी स्तिथी में इंसान के बचने की कोई गुंजाइश नहीं होती, लेकिन समय रहते सर्जरी से उनकी जान बचा ली गई. 6 घण्टे तक चली इस सर्जरी के दौरान सिंथेटिक पैच लगाकर मरीज के दिल में बने छेद को भरा गया. 

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इस सर्जरी के बारे में जानकारी देते हुए मैक्स अस्पताल वैशाली के प्रिंसिपल कंसल्टेंट और CTVS के प्रमुख डॉ गौरव महाजन ने बताया कि इस तरह के केस सिर्फ 10 प्रतिशत लोगों के साथ होते हैं, जिनमें से 4 से 5 प्रतिशत लोग अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं. इसलिए इसके अलावा 3 से 4 प्रतिशत लोग ही इस जटिल सर्जरी में बच पाते हैं. दिल मे हुए छेद को पहले सिथेंटिक पैच लगाकर ढका गया और फिर उसके ऊपर एक परिकार्डियम (दिल को बचाने वाली झिल्ली) का पैच लगाया गया, ताकि धड़कने से या बाद में नाडियों के फूलने से ये दोबारा न फटे. ऑपरेशन करने में रिस्क था, लेकिन हम खुश हैं कि हम इनकी जान बचा सके. 

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एन एस मेहरा, जिन पर ये सर्जरी की गई बताते हैं कि वो हर दिन की तरह बाथरूम से बाहर आ रहे थे. अचानक उन्हें जोर से छींक आई. छाती में ऐसा दर्द हुआ जैसे किसी ने गोली चलाई हो. उसके बाद उन्हें सीधा अस्पताल में होश आया. उन्होंने ये भी बताया कि दौरा पड़ने के ठीक 20 दिन बाद उनकी पोती की शादी थी. वो मन ही मन लगातार प्रार्थना कर रहे थे कि कम से कम इतना बच जाएं कि पोती की शादी देख पाएं. ये मेरे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है कि इस उम्र में भी मैं बच गया. डॉ महाजन मेरे लिए भगवान से कम नहीं हैं और अब मैं पूरी तरह से स्वस्थ हूं.