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बापू से जुड़ी वो पांच चीजें, जिसकी मदद से पूरा हुआ गांधी से महात्मा बनने का सफर

अगर आप बापू की तस्वीर को देखेंगे तो उनसे जुड़ी 5 वस्तुओं पर आपका ध्यान जाएगा. ये हैं चश्मा... लाठी... चरखा... धोती और घड़ी.

बापू से जुड़ी वो पांच चीजें, जिसकी मदद से पूरा हुआ गांधी से महात्मा बनने का सफर
(फाइल फोटो)

क्या आपने महात्मा गांधी के बारे में कभी चिंतन किया है. वो आज हमारे बीच नहीं होकर भी अपने विचारों से जिंदा हैं. उनके पास ना तो पद था ना धन दौलत और संपदा थी. वो ना तो किसी सेना के कमांडर थे और ना ही किसी देश के शासक बने. गांधी जी ने विज्ञान से जुड़ा कोई अविष्कार नहीं किया था और ना ही वो सिनेमा के मशहूर अभिनेता थे. लेकिन इसके बावजूद आज भी आम आदमी, सरकार और दुनिया भर के बड़े बड़े नेता उनके विचारों के आगे नतमस्तक हैं. वो ऐसे शख्स थे जिन्होंने विनम्रता को अंग्रेजों के विश्वव्यापी साम्राज्य से भी ज्यादा ताकतवर बना दिया था. अगर आप बापू की तस्वीर को देखेंगे तो उनसे जुड़ी 5 वस्तुओं पर आपका ध्यान जाएगा. ये हैं चश्मा... लाठी... चरखा... धोती और घड़ी.

चश्मा: गोल लेंस वाला चश्मा गांधी जी का सबसे प्रसिद्ध प्रतीक है. चश्मे के बारे में एक बार गांधी जी ने कहा था कि 'इस चश्मे ने उन्हें आज़ाद भारत का नज़रिया दिया'. बापू के विचारों की लोकप्रियता के बाद ये चश्मा उनके चिंतन, बौद्धिकता और सहिष्णुता का चिन्ह समझा जाने लगा.

लाठी: आपने महात्मा गांधी के हाथों में आपने हमेशा एक लाठी देखी होगी. स्वतंत्रता आंदोलन में इस लाठी को चलाए बिना ही गांधी जी ने अंग्रेजों का घमंड तोड़ दिया था. वर्ष 1934 में बापू बिहार के मुंगेर में भूकंप पीड़ितों से मिलने गए थे. वहां उन्हें लोगों ने एक लाठी भेंट की थी. राष्ट्रपिता ने उसी लाठी को अपनी वैचारिक ताकत के प्रतीक के रूप में जीवनभर इस्तेमाल किया.

चरखा: महात्मा गांधी ने विदेशी कपड़ों की होलिका जलाई और खादी को अपनाया. आप ये भी कह सकते हैं कि उन्होंने चरखे से बने धागों से पूरे देश को एक सूत्र में बांधने की कोशिश की. अंग्रेजों के भारत आने से पहले ही चरखे का उपयोग सूत उत्पादन में किया जाता था. चरखे की मदद से बापू ने स्वदेशी वस्त्रों को अपनाने और देश को स्वाबलंबी बनाए रखने का विचार रखा था.

धोती: महात्मा गांधी घुटनों के ऊपर एक धोती पहनते थे, अगर सर्दी का मौसम हो तो वो अपने शरीर के ऊपरी हिस्से में एक चादर ओढ़ लेते थे. लेकिन दुनिया के सूट-बूट वाले बड़े-बड़े लोग उनके स्वागत और सम्मान में खड़े हुए नज़र आते थे. ये भारत की धोती और यहां के पारंपरिक परिधान का विश्वरूप था. इससे सीख लेकर आप भी अपने जीवन में फिजूलखर्ची बंद कर सकते हैं.

घड़ी: बापू के लिए एक-एक सेंकेड कीमती था और उनका 24 घंटों का कार्यक्रम पहले से ही तय होता था. वो प्रत्येक काम को निश्चित समय पर शुरू करते और जितना जिस काम के लिए वक्त तय करते, उतना ही समय उसमें देते थे. इसमें उनका साथ उनकी घड़ी देती थी.

ये बापू से जुड़ी वो पांच चीजें है जिसकी मदद से उन्होंने गांधी से महात्मा बनने का सफर पूरा किया.