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69 हजार शिक्षक भर्ती परीक्षा परिणाम पर हाईकोर्ट की रोक, 29 जनवरी को होगी सुनवाई

हाईकोर्ट की तरफ से यह आदेश मोहम्मद रिजवान व अन्य हजारो लोगों की तरफ से दाखिल याचिकाओं की सनवाई करते हुए दिया गया है

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 17 जनवरी को दिए अपने आदेश को अगली सुनवाई तक बरकरार रखा है. (फाइल फोटो)
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 17 जनवरी को दिए अपने आदेश को अगली सुनवाई तक बरकरार रखा है. (फाइल फोटो)

नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती का 22 जनवरी को आने वाले परीक्षा परिणाम पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. फिलहाल 28 जनवरी तक इसका रिजल्ट घोषित नहीं किया जाएगा. हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच इस पर 29 जनवरी को सुनवाई करेगी. आपको बता दें 6 जनवरी को शिक्षक भर्ती परीक्षा का आयोजन कराई गई थी. हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 17 जनवरी को दिए अपने आदेश को अगली सुनवाई तक बरकरार रखा है. आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में सहायक शिक्षकों के 69 हजार पदों पर भर्ती की परीक्षा के क्वालिफाइंग मार्क्स को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के समक्ष चुनौती दी गई थी.

  1. 22 जनवरी को घोषित होने वाला था परीक्षा परिणाम
  2. 29 जनवरी को कोर्ट करेगा इस मामले में अगली सुनवाई
  3. क्वालिफाइंग मार्क्स को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी गई

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शिक्षक भर्ती परीक्षा के रिजल्ट पर रोक न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान की एकल सदस्यीय पीठ ने लगाई है. हाईकोर्ट की तरफ से यह आदेश मोहम्मद रिजवान व अन्य हजारों परीक्षार्थियों की तरफ से दाखिल 33 याचिकाओं की सुनवाई करने के बाद दिया गया है. सोमवार को करीब 2 घंटे से ज्यादा चली बहस के बाद कोर्ट ने अपने पिछले आदेश को अगली सुनवाई तक सुरक्षित रखा है. बहस के दौरान सरकार की तरफ से कहा गया कि एक अध्यापक शिक्षा की नींव है और हम उसकी गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं कर सकते हैं. अधिवक्ता प्रशांत चंद्रा ने सर्वोच्च न्यायालय के एक निर्णय के हवाले से सरकार के 7 जनवरी के उस आदेश को सही बताया जिसके तहत अनारक्षित व आरक्षित वर्ग के लिए क्वालिफाइंग मार्क्स 65 व 60 प्रतिशत तय किया गया है. सरकार की ओर से कहा गया कि अध्यापक पर शिक्षा देने जैसी अति महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है लिहाजा इस पद पर नियुक्ति के लिए मेरिट से समझौता नहीं किया जा सकता. 

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अधिवक्ता बोले यह सरकार की सोची समझी नीति है 

दूसरी तरफ याची पक्ष के अधिवक्ताओं की तरफ से कहा गया कि यह सरकार की तरफ से कड़ा रुख है और सरकार इसे एक सोची समझी नीति के तहत लागू करना चाहती है. उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से क्वालिफाइंग मार्क्स का जो पैमाना तैयार किया गया है वो सिर्फ शिक्षामित्रों को बाहर करने के उद्देश्य से किया गया है. अपनी दलील रखते हुए याची पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि याचीगण शिक्षामित्र थे जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से दो मौके मिले हैं और इस बार उनका आखिरी मौका है. ऐसे में लिखित परीक्षा होने के बाद क्वालिफाइंग मार्क्स तय करना पूरी तरह से असंवैधनिक है. उन्होंने कहा कि टीईटी की परीक्षा शिक्षक की गुणवत्ता को परखने के लिए ही होती है फिर टीईटी पास करने के बाद मेरिट के आधार पर क्यूं सेलेक्शन किया जा रहा है. याची अधिवक्ता ने कोर्ट से कहा कि पूर्व में हुई सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा में उत्तीर्ण प्रतिशत 45 व 40 प्रतिशत तय किया गया था तो इस बार लिखित परीक्षा के बाद सात जनवरी को अचानक 65 व 60 प्रतिशत क्यों तय कर दिया गया.

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पास होने का क्राइटेरिया
69 हजार शिक्षकों की भर्ती के लिए आयोजित की गई परीक्षा में पास होने के लिए सामान्य वर्ग के परीक्षार्थियों के लिए 65 प्रतिशत अंक यानि कुल मार्क्स 150 में से 97 अंक पाना अनिवार्य है. वहीं आरक्षित कोटे के अभ्यर्थियों के लिए 150 में से सिर्फ 90 अंक पाना अनिवार्य है. आप को बताते चले कि इससे पूर्व 2018 में आयोजित हुई शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा में 45 व 40 अंक पासिंग मार्क्स तय किये गये थे, लेकिन इस बार अभ्यर्थियों की संख्या ज्यादा होने की वजह से यह 65 व 60 फीसदी कर दिया गया है. राज्य सरकार ने शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए इस बार परीक्षा के पासिंग मार्क्स या कट ऑफ अंक को बढ़ा दिया है. 

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