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बिहार में जेडीयू ने अभीतक जारी नहीं किया है घोषणा पत्र, सियासत हुई तेज

बिहार में एनडीए के प्रमुख घटक दल जदयू की ओर से घोषणा पत्र जारी नहीं किया गया है. 

बिहार में जेडीयू ने अभीतक जारी नहीं किया है घोषणा पत्र, सियासत हुई तेज
जेडीयू ने अभी तक घोषणा पत्र जारी नहीं किया है. (फाइल फोटो)ौ

पटनाः लोकसभा चुनाव के पहले चरण का चुनाव बीत गया है और अब दूसरे चरण की बारी है, लेकिन बिहार में एनडीए के प्रमुख घटक दल जदयू की ओर से घोषणा पत्र जारी नहीं किया गया है. पहले 9 और फिर 14 अप्रैल की तारीख तय हुई, लेकिन घोषणा पत्र जारी नहीं हो पाया और विरोधी दल इस पर तंज कस रहे हैं. वहीं, जदयू के नेता इसे अपनी रणनीति का हिस्सा करार दे रहे हैं. 

चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के साथ राजनीतिक दलों में घोषणा पत्र बनाने की तैयारी भी शुरू हो जाती है. 2019 के चुनाव में भी ऐसा ही देखने को मिला. भाजपा और कांग्रेस जैसे बड़े दलों ने आम लोगों की प्रतिक्रिया के आधार पर संकल्प पत्र और घोषणा पत्र बनाने का दावा किया, जिसमें लोकलुभावन वादे किये गये हैं. भाजपा बुजुर्गों को पेंशन देने की बात कर रही है, तो कांग्रेस देश के 20 फीसदी गरीब परिवारों को साल में 72 हजार देने का वादा कर चुकी है. ऐसे ही राजद, लोजपा और हम जैसे राजनीतिक दलों ने भी अपने घोषणा पत्र में चुनावी वादे किये हैं, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई वाले जदयू की ओर से अब तक घोषणा पत्र जारी नहीं किया जा सका है. इसको लेकर मंथन का दौर चल रहा है. तारीख तय हुई, लेकिन घोषणा पत्र नहीं जारी हो सका. 

जदयू और उसकी सहयोगी भाजपा भले ही घोषणा पत्र नहीं जारी होने को लेकर दलील दे रही हैं, लेकिन विपक्षी राजद के नेता और पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी का कहना है कि अब घोषणा पत्र को लेकर राजनीतिक दल सक्रिय नहीं रहते हैं, जबकि कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि जदयू की ओर से घोषणा पत्र जारी कर दिया जाता, तो अच्छा रहता. 

घोषणा पत्र को राजनीतिक दलों की नीतियों की कुंजी माना जाता है, चुनाव के दौरान जो वादे किये जाते हैं. सरकार बनने पर उन पर अमल करने की परंपरा रही है. अगर कोई राजनीतिक दल ऐसा नहीं करता है, तो विरोधी दलों के साथ वोटर भी उसे अगाह करते हैं और जवाब मांगते हैं कि पिछले चुनाव में किया वादा क्यों पूरा नहीं किया. ऐसे में जदयू जैसे दल की ओर से घोषणा पत्र जारी करने में की जा रही देरी को अच्छा नहीं माना जा सकता.