दुमका लोकसभा सीट: किसी भी पार्टी के लिए आसान नहीं होगा शिबू सोरेन के किले को भेदना

देशभर में 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर केंद्र और विपक्ष दोनों ही अपनी तैयारियों में जुट गए हैं.

दुमका लोकसभा सीट: किसी भी पार्टी के लिए आसान नहीं होगा शिबू सोरेन के किले को भेदना
शिबू सोरेन के अलावा बाबूलाल मरांडी भी यहां से 1998 और 1999 में चुनाव जीत चुके हैं.

दुमका: 2000 में बिहार से अलग होने के बाद झारखंड नया राज्य बना. देशभर में 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर केंद्र और विपक्ष दोनों ही अपनी तैयारियों में जुट गए हैं. एक ओर जहां सत्ता पर काबिज बीजेपी 2014 की शानदार जीत को दोहराना चाहती है तो वहीं, दूसरी ओर विपक्ष भी बीजेपी को केंद्र से हटाने में किसी तरह की कसर नहीं छोड़ना चाहता है. जिसके चलते केंद्र से लेकर राज्यों तक की राजनीति गरमाई हुई है. 

अगर बात झारखंड के दुमका लोकसभा सीट की करें तो यहां झारखंड मुक्ति मोर्चा का दबदबा रहा है. यहां से झारखंड मुक्ति मोर्चा के शिबू सोरेन 1980 से लगातार जीत रहे हैं. 1989, 1998, 1999 को छोड़ दिया जाए तो यह जेएमएम का गढ़ रहा है जिसे भेदना आसान नहीं होगा.

2009 के लोकसभा चुनाव में यहां से शिबू सोरेन ने 208367 वोट पाकर जीत दर्ज की थी. शिबू सोरेन के बाद सबसे अधिक बीजेपी के सुनील सोरेन को 189279 वोट मिले. वहीं, 2014 लोकसभा चुनाव में शिबू सोरेन को 335686 वोट मिले. शिबू सोरेन के बाद बीजेपी के सुनील सोरेन को 296493 वोट मिले थे. 

शिबू सोरेन झारखंड के कद्दावर नेता हैं और दुमका में किसी भी पार्टी के लिए उन्हें हराना आसान नहीं होगा. दुमका झारखंड का बेहद महत्वपूर्ण लोकसभा सीट है जहां से झारखंड के दो मुख्यमंत्री चुनाव जीतते रहे हैं. शिबू सोरेन के अलावा बाबूलाल मरांडी भी यहां से 1998 और 1999 में चुनाव जीत चुके हैं. 

देखने वाली बात ये है कि कौन सी पार्टी यहां से किसे उम्मीदवार के रूप में खड़ा करती है और साथ ही दुमका लोकसभा क्षेत्र में इस लोकसभा चुनाव में कैसा मूड रहता है.