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नेशनल हीरो की छवि बनाकर आम चुनाव लड़ना चाहते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

बादामी रंग की जैकेट और उसकी जेब पर लगा सफेद कमल का फूल बता रहा था कि नरेंद्र मोदी अब चुनावी रंग में हैं.

नेशनल हीरो की छवि बनाकर आम चुनाव लड़ना चाहते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

मेरठ: लोकसभा चुनाव 2019 के प्रचार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरठ में पहली रैली की. बादामी रंग की जैकेट और उसकी जेब पर लगा सफेद कमल का फूल बता रहा था कि नरेंद्र मोदी अब चुनावी रंग में हैं. मेरठ की इस रैली में वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को संबोधित कर रहे थे, इस इलाके में पहले चरण में 11 अप्रैल को मतदान होना है.

मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत विकास योजनाओं को गिनाने से की लेकिन जल्द ही उन्होंने अपनी शाब्दिक मिसाइल का रुख आतंकवाद और पाकिस्तान के मुद्दों की तरफ मोड़ दिया. प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में सारा जोर इस बात पर लगाया कि विपक्ष को देश विरोधी और पाकिस्तान परस्त साबित किया जाए.

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विपक्ष बताए सबूत चाहिए या सपूत
अपनी लच्छेदार भाषा और अलंकारिक शैली में मोदी ने जन समूह से कहा कि यूपीए सरकार में लगातार आतंकवादी हमले होते थे. बिना कोई मिसाल दिए उन्होंने कहा कि पिछली सरकारें आतंकवादियों को करोड़ों रुपये इनाम में देती थीं. हाल ही में पाकिस्तान के बालकोट पर हुई एयर स्ट्राइक के बाद भले ही विपक्षी दलों के शीर्ष नेतृत्व ने सेना की बहादुरी की तारीफ की हो और सरकार से कोई सबूत न मांगा हो, लेकिन प्रधानमंत्री ने सर्जिकल स्ट्राइक वाले अंदाज में ही जनता से पूछा कि आपको सबूत चाहिए या सपूत. मोदी यहीं नहीं रुके उन्होंने यहां तक कह दिया कि पाकिस्तान की मीडिया में विपक्ष के नेताओं को हीरो बनाया जा रहा है.

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narendra modi
लोकसभा चुनाव 2019 के प्रचार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरठ में पहली रैली की.

मुस्लिम आबादी का निर्णायक वोट
पहली ही चुनावी रैली में पाकिस्तान और आतंकवाद पर निशाना लगाकर प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस चुनाव में विकास का मुद्दा दूसरी प्राथमिकता पर रहेगा. आतंकवाद और पाकिस्तान पर इतना जोर उन्होंने उस पश्चिमी उत्तर प्रदेश की रैली में लगाया जहां मुस्लिम आबादी का वोट भी निर्णायक है.

विपक्ष को खोजनी होगी काट
प्रधानमंत्री को बखूबी पता है कि समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल के बीच गठबंधन हो जाने के बाद बीजेपी के लिए पश्चिमी यूपी की लड़ाई खासकर बहुत कठिन हो गई है. यही नहीं जिस तरह कांग्रेस गठबंधन से बाहर रहकर भी इस इलाके में इस तरह से टिकट बांट रही है कि उसके प्रत्याशी बीजेपी का वोट काटें, उससे बीजेपी की मुश्किलें बढ़ना तय है. इस सब के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हमेशा की तरह इस बार भी गन्ना की कीमतों का भुगतान करने का मुद्दा गरमाया है.

दमदार चौकीदार की ओजस्‍वी आवाज
प्रधानमंत्री इन सब चुनौतियों से वाकिफ हैं इसीलिए मार्च के अंत में बढ़ते तापमान से उनकी पेशानी पर जो पसीने की बूंदें आईं, उन्हें सफेद रुमाल से पोंछते हुए, प्रधानमंत्री ने टोन को इतना ऊंचा रखा कि वहां मौजूद भीड़ और टीवी पर उनको सुन रहे दर्शकों के मन पर उनके ओजस्वी भाषण का संक्रामक असर पड़ें. लोग अपने आसपास या तत्काल के मुद्दे भूल जाएं, उनके दिमाग में सिर्फ देश उभरे. एक ऐसा भारत जिस पर सब तरफ से खतरे मंडरा रहे हैं और उन खतरों से देश को बचाने के लिए मोदी के रूप में एक दमदार चौकीदार उनके पास है.

'हीरो' और विलेन की जंग
प्रधानमंत्री का यह भाषण बता रहा है कि वह चाहते हैं कि देश उन्होंने नेशनल हीरो माने और उनके पीछे चले. जाहिर है इस हीरो के सामने विलेन पाकिस्तान और आतंकवाद है. और यह हीरो विपक्ष को विलेन के एजेंट के तौर पर लोगों के सामने रखना चाहता है. बीजेपी का चुनाव इसी दिशा में आगे बढ़ना है. अब विपक्ष को तय करना है कि वह अपने जातिगत समीकरण कितने मजबूत रखता है. राहुल गांधी 72000 रुपये सालाना देने की स्कीम को कितने जोर से उठा पाते हैं. क्योंकि जहां तक वोटों के संतुलन का सवाल है तो बीजेपी का गठबंधन और विपक्षी गठबंधन का पलड़ा बराबरी का है. मोदी की यह हुंकार पलड़े को अपनी तरफ जितना झुका लेगी, बीजेपी उतनी सुरक्षित होती जाएगी.

(लेखक पीयूष बबेले जी न्यूज डिजिटल में ओपिनियन एडिटर हैं)
(डिस्क्लेमर: इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं)