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उत्तराखंड की वादियों में हैं 'न्याय के देवता', भक्त मनोकामना के लिए उन्हें लिखते हैं चिट्ठी

चितई गोल्ज्यू  देवता को भगवान शिव का अवतार माना जाता है. गोल्ज्यू के दर्शन और पूजन के लिए यहां भक्त दूर-दूर से आते हैं. मान्यता है कि यहां जो भी सच्चे दिल से भगवान से अपनी बात कहता है वह जरूर पूरा करते हैं.

उत्तराखंड की वादियों में हैं 'न्याय के देवता', भक्त मनोकामना के लिए उन्हें लिखते हैं चिट्ठी
जनपद अल्मोड़ा से करीब पंद्रह किलोमीटर दूर इस मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं.

अल्मोड़ा, (मयंक राय): उत्तराखण्ड अपने प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक स्थलों के लिए देश व दुनिया में अलग पहचान रखता है. एक तरफ जहां चार धाम सदियों से श्रद्धालुओं के आस्था का प्रतीक है, तो दूसरी और कुछ ऐसे भी मंदिर हैं, जो अपनी अलग पहचान रखते हैं. एक ऐसा ही मंदिर हैं गोल्ज्यू देवता का.

अल्मोड़ा से 15 किलोमीटर आगे हैं मंदिर
जनपद अल्मोड़ा से करीब पंद्रह किलोमीटर दूर इस मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं. इस मंदिर को चिट्ठियों और घंटियों का मंदिर भी कहा जाता है. चितई गोल्ज्यू  देवता को भगवान शिव का अवतार माना जाता है. गोल्ज्यू के दर्शन और पूजन के लिए यहां भक्त दूर-दूर से आते हैं. मान्यता है कि यहां जो भी सच्चे दिल से भगवान से अपनी बात कहता है वह जरूर पूरा करते हैं.

चिट्ठी लिखकर लोग मांगते हैं मुरादे
यहां गोल्ज्यू देवता से अपनी बात कहने का तरीका भी कुछ खास और अलग है. श्रद्धालु भगवान के नाम पत्र लिखते हैं. कुछ तो बकायदा स्टांप के साथ पत्र को संलग्न करते हैं कि वें मन्नत पूरा होने के बाद यहां भगवान को घंटी अर्पित करेंगे. मंदिर के सीढ़ियों से लेकर पूरे मंदिर प्रांगण में आपको हजारों घंटियां और पत्र देखने को मिल जाएंगी. 

देश के कोने-कोने से आते हैं श्रद्धालु 
यहां आने वाले श्रद्धालु केवल उत्तराखण्ड के नहीं होते, यहां देश के कोने-कोने से हर रोज हजारों श्रद्धालु भगवान के दरबार में चिट्ठियों की अर्जियां लगाने आते हैं. बीते कई दशकों से मंदिर के बाहर घंटियां बेचने वाले दुकानदार बताते हैं कि दिन प्रति दिन लोगों की श्रद्धा बढ़ती जा रही है. इसके पीछे वजह ये है कि उनकी मुरादें पूरी होती हैं.

न्याय के देवता कहें जाते हैं गोल्ज्यू
गोल्ज्यू देवता लोगों की मन्नत तो पूरी करते ही हैं. इस मंदिर में विराजमान भगवान गोल्ज्यू देवता को न्याय का देवता भी कहा जाता है. कहते हैं कि जिन लोगों कोर्ट कचहरी और पंचयतों से न्याय नहीं मिल पाता, वे यहां विशेष तौर पर आते हैं. 

आम और खास हर कोई लेता है आशीष
उत्तराखण्ड के साथ ही नेताओं का इस मंदिर से खास लगाव है. प्रदेश के तमाम बड़े नेता यहां आते रहते हैं. कोई टिकट के लिए अर्जी लगाता है तो कोई जीत की मन्नत मांगता है, जो श्रद्धालु इस मंदिर के महत्व को जानते हैं उनके लिए तो ये आस्था का प्रतीक है ही लेकिन कई एसे भी लोग हैं जो पहली बार मंदिर आए और उन्हें यहां घंटियों और चिट्ठियों का संसार बेहद अनोखा लगा. 

सदियों से आस्था का प्रतीक
मान्यता है कि इस मंदिर निर्माण 12वीं शताब्दी में चंद वंश के एक सेनापति द्वारा कराया गया था. उत्तराखण्ड के कुमाऊं मंडल के इस विश्व प्रसिद्ध मंदिर को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं. लेकिन श्रद्धालुओं के लिए गोल्ज्यू देवता का मंदिर सदियों से आस्था का प्रतीक रहा है और आज भी है.