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बिहारः 8.50 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ द्वारकाधीश मंदिर, होंगे संपूर्ण देवलोक के दर्शन

द्वारिकाधाम गुजरात के तर्ज पर बने इस मंदिर में राधाकृष्ण के साथ शिव पार्वती, दुर्गा, गणेश, हनुमान की मूर्तियां स्थापित की जा रही है. छह जून से ही धार्मिक समागम के साथ मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा यज्ञ शुरू है.

बिहारः 8.50 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ द्वारकाधीश मंदिर, होंगे संपूर्ण देवलोक के दर्शन
प्राण प्रतिष्ठा को अंतिम रूप दिया जा रहा है.

नई दिल्लीः गुजरात के द्वारिकाधाम मंदिर की तर्ज पर बने सारण के द्वारकाधीश मंदिर में अब दर्शनार्थियों को सम्पूर्ण देवलोक के दर्शन होंगे. 8.50 करोड़ की लागत से सारण के नैनी में बने द्वारिकाधीश मंदिर में कल से प्राण प्रतिस्ठा यज्ञ का शुभारंभ होगा. जिसमें प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ेगा. छपरा शहर से महज 6 किलोमीटर की दूरी पर एनएच 331 स्थित नैनी में बना द्वारिकाधीश मंदिर श्रद्धालुओं के लिये आस्था का केंद्र बिंदु बन गया है. साढ़े आठ करोड़ की लागत से तैयार इस भव्य मंदिर में सम्पूर्ण देवलोक के दर्शन होंगे. द्वारिकाधाम गुजरात के तर्ज पर बने इस मंदिर में राधाकृष्ण के साथ शिव पार्वती, दुर्गा, गणेश, हनुमान की मूर्तियां स्थापित की जा रही है. छह जून से ही धार्मिक समागम के साथ मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा यज्ञ शुरू है.

इस मंदिर का निर्माण 2005 से ही जारी था, जो अब जाकर पूरा हुआ है. गुजरात के सिम्प्लेक्स में जेनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत नैनी निवासी राजीव सिंह व उनकी पत्नी रितुरानी सिंह के व्यक्तिगत प्रयास से सारणवासियों के लिये भव्य और आकर्षक मंदिर बनाया गया है. यह मंदिर निर्माण के समय से ही चर्चा में रहा. इसकी भव्यता स्वतः ही इस मार्ग से गुजरने वे ले लोगों को आकर्षित करती है.ग्रामीणों ने बताया कि फिनिशिंग का कार्य पूरा कर लिया गया है. प्राण प्रतिष्ठा को अंतिम रूप दिया जा रहा है. 

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मंदिर में राजस्थान व गुजरात के संगमरमर लगाए गए हैं. गुम्बद पर लगे ध्वज को मिलाकर इसकी ऊंचाई लगभग चालीस फीट है. सारण ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर बिहार में इसकी भव्यता को लेकर चर्चा हो रही है. मंदिर निर्माण में गुजरात से आये कारीगर नवल गुज्जर और उनकी टीम ने इसे आकर्षक बनाने के लिये काफी मेहनत की है. नवल इससे पहले तिरुपति बालाजी मंदिर में भी निर्माण और मेंटेनेंस कार्य से जुड़े रहे हैं. उन्होंने बताया कि बिहार में द्वारिका के तर्ज पर बना यह पहला मंदिर है जो इतना विशाल और भव्य है.