Oxygen: सांसों के लिए जरूरी ऑक्सीजन पृथ्वी पर कब, कहां और कैसे आई, वैज्ञानिकों ने आज बता दिया
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Oxygen: सांसों के लिए जरूरी ऑक्सीजन पृथ्वी पर कब, कहां और कैसे आई, वैज्ञानिकों ने आज बता दिया

Earth and Oxygen: एक कहावत है जब तक सांस, तब तक आस. यानी जब तक इंसान की सांस चलती हैं, उम्मीदें खत्म नहीं होती है. वहीं सासों के चलने के लिए जरूरी है ऑक्सीजन जिसे लेकर हालिया रिसर्च में एक बड़ा खुलासा हुआ है.

Oxygen: सांसों के लिए जरूरी ऑक्सीजन पृथ्वी पर कब, कहां और कैसे आई, वैज्ञानिकों ने आज बता दिया

Oxygen Research: पृथ्वी (Earth) के वायुमंडल में मौजूद ऑक्सीजन की मात्रा इसे एक रहने लायक ग्रह बनाती है. हमारे पूरे वायुमंडल का 21% हिस्सा इसी अनमोल जीवनदायी तत्व से बना है. गहरे अतीत यानी इसकी उपत्ति कब और कैसे हुई इन सवालों का जवाब देने से पहले आपको बताते चलें कि करोड़ों साल पहले नियोआर्कियन युग में ऑक्सीजन लगभग नहीं के बराबर थी. ऐसे में पृथ्वी का वातावरण ऑक्सीजनयुक्त कैसे हो गया, इस सवाल का जवाब वैज्ञानिकों ने दिया है.

धरती पर ऐसे आई ऑक्सीजन

नेचर जियोसाइंस में प्रकाशित एक स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक हालिया रिसर्च, एक नई संभावना को जोड़ता है कि धरती के शुरुआती ऑक्सीजन का कम से कम कुछ भाग पृथ्वी की ऊपरी सतह के संचलन और विनाश के माध्यम से एक टेक्टोनिक स्रोत से आया होगा.

आर्कियन पृथ्वी

आर्कियन युग हमारे ग्रह के इतिहास के एक तिहाई हिस्से का सटीक प्रतिनिधित्व करता है. 2.5 अरब साल पहले से लेकर चार अरब साल पहले तक. यह एलियन पृथ्वी तब एक पानी की दुनिया थी, जो हरे महासागरों से ढकी हुई थी. उस दौर में हमारी पृथ्वी मीथेन की धुंध में डूबी हुई थी और जिसमें बहु-कोशिकीय जीवन का पूरी तरह से अभाव था. इस दुनिया का एक अन्य अनजान पहलू इसकी टेक्टोनिक गतिविधि की प्रकृति थी.

क्या टेक्टोनिक्स प्लेट आर्कियन युग में भी सक्रिय थी?

आधुनिक पृथ्वी पर, प्रमुख टेक्टोनिक गतिविधि को प्लेट टेक्टोनिक्स कहा जाता है, जहां महासागरीय आवरण - महासागरों के नीचे पृथ्वी की सबसे बाहरी परत - अभिसरण के बिंदु पर पृथ्वी के मेंटल (पृथ्वी के आवरण और इसके कोर के बीच का क्षेत्र) में डूब जाती है जिसे सबडक्शन जोन कहा जाता है. हालाँकि, इस बात पर काफी बहस है कि क्या प्लेट टेक्टोनिक्स आर्कियन युग में भी सक्रिय थी.

वैज्ञानिकों ने बताया कि उनके शोध का उद्देश्य यह परीक्षण करना था कि क्या आर्कियन तल के पानी और तलछट में ऑक्सीकृत सामग्री की अनुपस्थिति ऑक्सीकृत मैग्मा के निर्माण को रोक सकती है. नियोआर्कियन मैग्मैटिक चट्टानों में ऐसे मैग्मा की पहचान इस बात का प्रमाण दे सकती है कि सबडक्शन और प्लेट टेक्टोनिक्स 2.7 अरब साल पहले हुए थे.

वैज्ञानिकों के प्रयोग

वैज्ञानिकों ने बताया कि रिसर्च से पहले सुपीरियर प्रांत के एबिटिबी-वावा उप-प्रांत से 275- से 267 करोड़-वर्ष पुरानी ग्रेनाइट चट्टानों के नमूने जुटाए गए थे. यह विन्निपेग, मैनिटोबा से सुदूर-पूर्वी क्यूबेक तक 2000 किमी तक फैला सबसे बड़ा संरक्षित आर्कियन महाद्वीप है. इसने वैज्ञानिकों को नियोआर्कियन युग में उत्पन्न मैग्मा के ऑक्सीकरण के स्तर की जांच करने में बड़ी मदद की.

रिसर्च के दौरान इलिनोइस में आरगोने राष्ट्रीय प्रयोगशाला में उन्नत फोटॉन स्रोत सिंक्रोट्रॉन में एक्स-रे अवशोषण नियर एज स्ट्रक्चर स्पेक्ट्रोस्कोपी (एस-एक्सएएनईएस) नामक एक विशेष तकनीक का उपयोग करके मूल आर्कियन मैग्मा की ऑक्सीजन की उग्रता को सफलतापूर्वक मापने में सक्षम थे.

पानी से ऑक्सीजन बनाना?

रिसर्च में ये भी पाया गया कि मैग्मा सल्फर सामग्री, जो शुरू में शून्य के आसपास थी, लगभग 270करोड़ 50 लाख वर्षों में प्रति दस लाख में 2000 भाग तक बढ़ गई. इससे संकेत मिलता है कि मैग्मा अधिक सल्फर युक्त हो गया था. वहीं एपेटाइट में एस6+ - एक प्रकार का सल्फर आयन - की प्रबलता ने सुझाव दिया कि सल्फर एक ऑक्सीडाइज़्ड स्रोत से था, जो मेजबान जिरकॉन क्रिस्टल के डेटा से मेल खाता था.

2.7 अरब साल पहले का वो दौर

इन नए निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि 2.7 अरब साल पहले ऑक्सीडाइज्ड मैग्मास नियोआर्कियन युग में बना था. आंकड़े बताते हैं कि आर्कियन महासागर के जलाशयों में घुलित ऑक्सीजन की कमी ने सबडक्शन क्षेत्रों में सल्फर युक्त, ऑक्सीकृत मैग्मा के जमाव को नहीं रोका. इन मैग्मा में ऑक्सीजन किसी अन्य स्रोत से आया होगा, और अंततः ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान वातावरण में फैल गया होगा.

रिसर्च में ये भी पाया गया कि इन ऑक्सीकृत मैग्मास की घटना सुपीरियर प्रांत और यिलगारन क्रेटन (पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया) में प्रमुख सोने के खनिजकरण की घटनाओं से संबंधित है, जो इन ऑक्सीजन युक्त स्रोतों और वैश्विक विश्व स्तरीय अयस्क भंडार के बीच संबंध प्रदर्शित करता है.

समझ से परे नतीजे

इन ऑक्सीकृत मैग्माओं के निहितार्थ प्रारंभिक पृथ्वी भूगतिकी की समझ से परे हैं. पहले, यह सोचा जाता था कि आर्कियन मैग्मास का ऑक्सीकरण नहीं किया जा सकता है, जब समुद्र के पानी और समुद्र के तल की चट्टानें या तलछट नहीं थे. इन मैग्माओं की घटना से पता चलता है कि सबडक्शन की प्रक्रिया, जहां समुद्र के पानी को हमारे ग्रह में सैकड़ों किलोमीटर ले जाया जाता है, मुक्त ऑक्सीजन उत्पन्न करती है. इसके बाद यह ऊपरी मेंटल को ऑक्सीडाइज करता है.

इस स्टडी से पता चलता है कि आर्कियन सबडक्शन पृथ्वी के ऑक्सीकरण में एक महत्वपूर्ण, अप्रत्याशित कारक हो सकता है. जहां तक हम जानते हैं, पृथ्वी सौर मंडल में अतीत और वर्तमान का एकमात्र स्थान है जहां प्लेट टेक्टोनिक्स और सक्रिय सबडक्शन होता है. इससे पता चलता है कि यह अध्ययन आंशिक रूप से ऑक्सीजन की कमी के साथ साथ अंततः भविष्य में अन्य चट्टानी ग्रहों पर जीवन की व्याख्या कर सकता है.

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