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किस्सा-ए-कंज्यूमर : मोबाइल बिल दा मामला है!

सुनिए वो किस्सा जब कंज्यूमर की जेब काटते हुए एक टेलीकॉम कंपनी रंगे हाथों पकड़ी गई और उसे लेने के देने पड़ गए.

किस्सा-ए-कंज्यूमर : मोबाइल बिल दा मामला है!

जेबकतरों के बारे में जरूर सुना होगा आपने. चलते फिरते आपकी जेब काट लेते हैं और आपको हवा तक नहीं लगती. कई बार टेलीकॉम कंपनियां भी यही करती हैं. बिल में कुछ खेल करके ऐसे आहिस्ता से चूना लगाती हैं कि आपको भनक भी नहीं लगती. ये सब कैसे होता है वो बताएंगे आपको लेकिन पहले वो किस्सा सुनिए जब कंज्यूमर की जेब काटते हुए एक टेलीकॉम कंपनी रंगे हाथों पकड़ी गई और उसे लेने के देने पड़ गए.

विदेश में लगा बिल वाला झटका
किस्सा चंडीगढ़ का है. सेक्टर 34 के रहने वाले 74 साल के कर्नल शिव कुमार आनंद अमेरिका गए, साथ में पत्नी भी थीं. तारीख थी 15 नवंबर 2017. कर्नल साहब के पास एयरटेल कंपनी के 2 पोस्ट-पेड नंबर थे. एक का मंथली बिल करीब 500 रुपए आता था और दूसरे का 600 रुपए. लेकिन अमेरिका में गुजारे 3 महीनों के दौरान उनका बिल ऐसा बढ़ा कि समझ से परे हो गया. कर्नल आनंद अमेरिका में 3 फरवरी 2018 तक रहे थे और इस बीच पहले महीने उनका बिल 9,216 रुपए,  दूसरे महीने 10, 892 रुपए और तीसरे महीने 7,206 रुपए आया. कर्नल साहब को झटका लगना तय था. 

देते हैं सेवा, लेकिन बिना पूछे
पता ये चला कि कर्नल आनंद के अमेरिका पहुंचते ही एयरटेल ने खुद से ही उनके बिल प्लान में कुछ बदलाव कर दिए. पहला ये कि उनके नंबरों पर इंटरनेशनल रोमिंग पैक एक्टिवेट कर दिया, दूसरा- नंबरों पर क्रेडिट लिमिट को 7,200 से बढ़ाकर 15,000 रुपए कर दिया. गौर करने की बात ये है कि ये सब करने से पहले कंपनी ने कंज्यूमर से पूछना तो दूर उन्हें जानकारी तक नहीं दी. 

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कंपनी की चोरी और सीनाजोरी 
कर्नल आनंद जब भारत लौटे तो 7 फरवरी 2018 को उन्होने एयरटेल को ई-मेल किया. कहा- इतना ज्यादा बिल कैसे आया? इसमें करेक्शन करो. लेकिन कंपनी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी. इतना ही नहीं, जब उन्होने दोबारा एयरटेल को ई-मेल भेजकर बिल सही करने को कहा तो कंपनी ने उनकी बात पर सुनवाई करने की बजाय मनमानी करते हुए 11 अप्रैल 2018 को दोनों नंबर बंद कर दिए. तंग आकर कर्नल आनंद ने जिला कंज्यूमर फोरम में शिकायत दर्ज कराई.

कंपनी की अजीबोगरीब दलील
अपने बचाव में कंपनी ने तर्क दिया कि अगर ग्राहक विदेश गया है और बिना इंटरनेशनल रोमिंग एक्टिवेट कराए कॉल या फिर एसएमएस जैसी सेवा इस्तेमाल करता है तो 649 रुपए रोजाना का डिफॉल्ट पैक खुद-ब-खुद एक्टिवेट हो जाता है. विदेश में रहते हुए ग्राहक अगर कॉल रिसीव भी करता है तो इंटरनेशनल रोमिंग चालू हो जाती है. अपने जवाब में एयरटेल ने दावा किया ग्राहक का क्रेडिट लिमिट उनका पिछला रिकॉर्ड और स्टेटस देखते हुए बढ़ाया गया वर्ना सेवाएं बंद कर दी जातीं, लिहाजा शिकायतकर्ता का बिल उनके इस्तेमाल के मुताबिक है और सेवा में कोई कमी नहीं की गई है.

ये अदालत है सब जानती है
दोनों पक्षों की बात गौर से सुनने के बाद फोरम ने सबसे बड़ा सवाल यही उठाया कि- बिना पूछे क्यों किया? फोरम ने कहा- कंपनी ने बिना पूछे ग्राहक की क्रेडिट लिमिट बढ़ाई ताकि गैर कानूनी तरीके से बढ़े बिल को जस्टिफाई किया जा सके. फोरम ने आगे कहा- ग्राहक ने इंटरनेशनल कॉल्स का इस्तेमाल किया इससे जुड़ा कोई भी दस्तावेज या सबूत कंपनी पेश नहीं सकी जिसके आधार पर इंटरनेशनल पैक एक्टिवेट हुआ और यूसेज लिमिट बढ़ाई गई. ये पूरी तरह सेवा में गड़बड़ी और अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस का मामला है, लिहाजा कंपनी को आदेश दिया जाता है कि वो दोनों नंबरों पर सेवाएं फौरन बहाल करे. 

चलो-चलो, सारे पैसे वापस करो
फोरम ने अपने आदेश में कहा कि 15 नवंबर 2017 से 3 फरवरी 2018 के बीच तीनों महीनों बिल को खारिज किया जाए और सिर्फ 498 रुपए का रेंटल लिया जाए. ग्राहक ने पैसे चुका दिए हैं उन्हें आने वाले बिल्स में एडजस्ट किया जाए, ग्राहक को जो मानसिक और शारीरिक यातना झेलनी पड़ी उसके लिए कंपनी 25,000 का मुआवजा भरे और साथ ही केस लड़ने के खर्च के तौर पर 5,000 रुपए और चुकाए. यानी सितंबर 2018 में आए इस आदेश में एयरटेल को कुल मिलाकर 30,000 रुपए का फटका पड़ गया. 

VAS वाली दीमक यानी करोड़ों के वारे-न्यारे
कर्नल आनंद की कहानी तो मेन बिल प्लान को लेकर थी लेकिन एक चीज होती है VAS यानी वैल्यू ऐडेड सर्विस. कभी मैसेज बॉक्स में मिस्ड कॉल अलर्ट तो कभी क्रिकेट स्कोर का अपडेट, कभी वॉयस मैसेज का ऑप्शन तो कभी मैट्रिमोनियल साइट से मैसेज. ऐसी ढेरों सेवाएं है जिन्हें वैल्यू ऐडेड सर्विसेज के नाम पर बेचा जाता है. खास बात ये है कि इनके लिए मेन बिल प्लान के अलावा एक्सट्रा पैसे चुकाने हैं. लेकिन VAS की दरें इतनी कम होती हैं कि आमतौर पर हमारा ध्यान ही नहीं जाता. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि ये वैल्यू ऐडेड सर्विसेज टेलीकॉम कंपनियों की कमाई का बड़ा जरिया होती हैं. एक बड़ी टेलीकॉम कंपनी के बड़े ओहदे पर रहे एक अधिकारी मित्र ने खुद ही ये अंदर की बात बताई थी- कई बार कमाई का टार्गेट पूरा करने के लिए कंपनियां लाखों ग्राहकों के बिल में छोटी-मोटी वैल्यू ऐडेड सर्विसेज बिना बताए जोड़ देती हैं. जिस ग्राहक ने बिल पर गौर किया, ऐतराज जताया उससे माफी मांग ली जाती है, बाकी लोग बिना बेखबर होकर कंपनी की कमाई बढ़ाते रहते हैं.

एक मिसाल से समझिए- सेल्यूलर ऑपरेटर एसोसिएशन के मुताबिक सितंबर 2018 में एयरटेल के पास 34.35 करोड़ ग्राहक थे और वोडाफोन के पास 22.18 करोड़ ग्राहक थे. अब मान लीजिए कि इनमें से किसी कंपनी ने बिना बताए अपने सभी ग्राहकों के बिल में 1 रुपए महीने वाली वैल्यू ऐडेड सर्विस चिपका दी. तो ग्राहक के बिल में तो सिर्फ 1 रुपए की बढ़ोतरी होगी लेकिन कंपनी के तो एक ही झटके में करोड़ों रुपए बन गए. लिहाजा आपके लिए सबक यही है कि कभी-कभी अपने मोबाइल बिल की डीटेल्स भी देख लेनी चाहिए, क्या पता आपके बिल में भी VAS वाली दीमक लगी हो.

(लेखक गिरिजेश कुमार ज़ी बिज़नेस से जुड़े हैं.)
(डिस्क्लेमर : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं)

 

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