सलमान को सजा- कठघरे से कब होगी टाइगर की रिहाई

लमान खान के खिलाफ सन् 1998 में दो चिंकारा और काले हिरणों के शिकार के आरोप में चार मामलों में केस दर्ज किया गया था. 

सलमान को सजा- कठघरे से कब होगी टाइगर की रिहाई

19वीं शताब्दी के आदम कानून और बड़े वकीलों की वजह से सलमान खान को सजा मिलने में 20 साल लग गए, लेकिन फैसले के अगले दिन ही 51 पेज की जमानत अर्जी के 54 बिन्दुओं पर सुनवाई शुरू हो गई. इस मामले में सलमान खान चौथी बार जेल गए हैं और 20 साल में वे 19 दिन जेल में रह चुके हैं. सजा के बाद सलमान की बेल पर फैसला आना बाकी है और इसके बाद मुख्य मामले में अपील पर ऊंची अदालतों में सुनवाई होगी. सवाल यह है कि बिश्नोई समाज और निचली अदालतों की भरसक कोशिश से कानून के कटघरे में आया टाइगर, अब कब रिहा होगा?  

सह-आरोपियों के बरी होने के बाद सलमान भी रिहा होंगे- काले हिरणों के शिकार मामले में ट्रायल कोर्ट के जज ने सैफ अली खान, तब्बू, सोनाली बेंद्रें, नीलम और स्थानीय निवासी दुष्यंत सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया. सलमान खान के वकील के अनुसार, जब सह-आरोपी बरी हो गए तो फिर सलमान को भी क्यों नहीं रिहा होना चाहिए? अभियोजन पक्ष के अनुसार, सलमान खान को शिकार करते हुए किसी ने नहीं देखा. शिकारी सलमान की गाड़ी में बैठे सह-आरोपियों को अदालत ने मुक्त ही कर दिया है. शिकार के लिए इस्तेमाल हथियार मामले में सलमान खान को आर्म्‍स एक्ट के तहत रिहाई मिल चुकी है. वर्तमान मामले में पहली मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, एक हिरण की मौत दम घुटने से और दूसरे की मौत गढ्ढे में गिरने से हुई, यद्यपि इस रिपोर्ट को बाद में गठित मेडिकल बोर्ड ने नकार दिया. फौजदारी मामलों में अदालतें संदेह का लाभ हमेशा मुजरिम को देती हैं तो फिर इस मामले में इतने बड़े छेदों से सलमान खान निकल ही जाएंगे.

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क्या सलमान खान हाईकोर्ट से फिर छूट जाएंगे- सलमान खान के खिलाफ सन् 1998 में दो चिंकारा और काले हिरणों के शिकार के आरोप में चार मामलों में केस दर्ज किया गया था. भवाद गांव मामले में 2006 में निचली अदालत ने सलमान खान को एक साल की सजा सुनाई पर हाईकोर्ट ने बरी कर दिया और सुप्रीम कोर्ट में मामला अभी लंबित है. घोड़ा फार्म हाउस मामले में निचली अदालत ने सन् 2006 में सलमान खान को 5 साल की सजा सुनाई पर हाईकोर्ट ने उन्हें 2016 में बरी कर दिया और सुप्रीम कोर्ट में अपील अभी लंबित है. आर्म्‍स एक्ट के खिलाफ सलमान खान को निचली अदालत से ही रिहाई मिल गई और अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. अब कांकाणी गांव के काले हिरण शिकार मामले में क्या सलमान खान को हाईकोर्ट से फिर रिहाई मिल जाएगी? 

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फैसले में विलंबत के लिए सलमान जिम्मेदार- समर्थकों और फिल्म इंडस्ट्री द्वारा सलमान को 20 साल बाद सजा मिलने पर सुस्त अदालतों पर सवाल उठाए जा रहे हैं. सलमान की कार से मुंबई की फुटपाथ में मौत के मामले में सजा पर फैसले की शाम को ही हाई कोर्ट से सलमान को जमानत मिल गई. मुंबई के ट्रायल कोर्ट के फैसले की कॉपी के बगैर अदालती समय के बाद बेल मिलने से यह स्पष्ट है कि वीआईपी मामलों में अदालतें हमेशा सुस्त नहीं रहतीं. सलमान खान जैसे बड़े मुजरिम, फौजदारी मामलों को तकनीकी आधार पर आगे बढ़ाते रहते हैं और तोहमत अदालतों पर आती है.

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क्या राजस्थान सरकार चुनावी साल में इस मामले में अपील करेगी- राजस्थान के मारवाड़ में बिश्नोई समुदाय हिरणों को अपने परिवार जैसा मानता है. बिश्नोई महिलाओं द्वारा हिरण के बच्चों को अपना मानकर दूध पिलाना 21वीं शताब्दी में पर्यावरणीय संवेदना के लिए एक मिसाल है. दबंग सलमान खान के खिलाफ स्थानीय बिश्नोई समाज का संघर्ष चिपको आंदोलन की तरह इतिहास में याद रखा जाएगा. स्थानीय लोगों के सतत् संघर्ष और 20 सालों की पैरवी के बावजूद पांच सह-आरोपियों की रिहाई से बिश्नोई समुदाय में खासा गुस्सा है. वन्य जीव (संरक्षण) कानून की धारा 9/51 के तहत अधिकतम 6 साल की सजा का प्रावधान है, जबकि सलमान को 5 साल की सजा हुई है. सलमान की बेल तथा रिहाई के लिए अदालतों में पुरजोर पैरवी हो रही है. क्या राजस्थान सरकार भी चुनावी साल में सलमान की सजा बढ़ाने और सह-आरोपियों को सजा देने के लिए ऊंची अदालत में अपील करेगी?

(लेखक सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता और संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ हैं)

(डिस्क्लेमर : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं)