खिलाड़ियों को फंडिंग में कटौती नहीं, पर सही व्यक्ति तक पैसा पहुंचना जरूरी : राठौड़

टारगेट ओलंपिक पोडियम ( टाप्स ) के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता के दुरूपयोग के प्रति आगाह करते हुए एथेंस ओलंपिक के रजत पदक विजेता राठौड़ ने कहा, ‘यह करदाताओं की कड़ी मेहनत का पैसा है और इसका सही उपयोग जरूरी है.

खिलाड़ियों को फंडिंग में कटौती नहीं, पर सही व्यक्ति तक पैसा पहुंचना जरूरी : राठौड़
राठौड़ ने कहा, टिप्स में करीब 108 खिलाड़ी शामिल हैं (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: खेलमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने 29 दिसंबर को कहा कि अगले साल होने वाले राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों तथा 2020 ओलंपिक के लिए पदक के प्रबल उम्मीदवारों को सरकार से आर्थिक सहायता मिलने में कोई दिक्कत नहीं आयेगी लेकिन करदाताओं के पैसे के सही इस्तेमाल पर भी जोर दिया. टारगेट ओलंपिक पोडियम ( टाप्स ) के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता के दुरूपयोग के प्रति आगाह करते हुए एथेंस ओलंपिक के रजत पदक विजेता राठौड़ ने कहा, ‘यह करदाताओं की कड़ी मेहनत का पैसा है और इसका सही उपयोग जरूरी है. यह देखना जरूरी है कि यह पैसा उन खिलाड़ियों तक पहुंचे जो सही मायने में पदक की उम्मीद हैं.’

यहां एक कार्यक्रम से इतर उन्होंने कहा, ‘गले साल राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल और फिर 2020 में ओलंपिक होने हैं. हर खेल में पदक उम्मीदों के चयन के लिये चयन समितियां है और योजना में उन्हीं खिलाड़ियों को चुना गया है जो पदक के बहुत करीब हैं. उन्हें कोई आर्थिक अड़चन नहीं आयेगी.’  खेलमंत्री ने यह बयान उन खबरों के बीच दिया है कि मंत्रालय ने टाप्स कार्यक्रम में शामिल खिलाड़ियों को सीधे पैसा देने की बजाय उनके खेल महासंघों के मार्फत देने का फैसला किया है. फिलहाल टाप्स में 184 खिलाड़ी शामिल है लेकिन राठौड़ ने कहा कि इसमें बदलाव हो सकता है.

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उन्होंने कहा, ‘टाप्स में करीब 180 खिलाड़ी शामिल हैं और सभी को वित्तीय सहायता मिल रही है. खिलाड़ियों को फंडिंग में कोई कमी मंत्रालय की ओर से नहीं रहेगी . टाप्स की सूची बदलती रहेगी और मैं चाहता हूं कि इनकी संख्या में इजाफा हो.' हितों के टकराव के कारण ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता निशानेबाज अभिनव बिंद्रा, दो बार के ओलंपिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार और पांच बार की विश्व चैम्पियन मुक्केबाज एम सी मेरीकाम संबद्ध खेलों के सरकारी पर्यवेक्षक के पद से इस्तीफा दे चुके हैं लेकिन राठौड़ ने कहा कि सलाहकार के तौर पर उनकी वापसी हो सकती है.

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उन्होंने कहा, ‘खिलाड़ियों ने खुद हितों के टकराव का हवाला देकर पद छोड़ा है लेकिन इसके मायने यह नहीं है कि हम उनके अनुभव का लाभ नहीं ले सकते . किसी भी हितों के टकराव के बावजूद किसी भी समय सलाहकार के तौर पर उनकी वापसी हो सकती है.’ इससे पहले ‘स्पोर्ट स्टार ’ पाक्षिक खेल पत्रिका के रिलांच के दौरान उन्होंने खेलों को बढावा देने में मीडिया की भूमिका पर जोर दिया. उन्होंने कहा ,‘‘ यह कहना सही नहीं है कि हमारे देश में खेल महानायकों की कमी है लेकिन उनकी कहानियां लोगों तक पहुंचाना जरूरी है . प्रेरक कहानी के लिये ओलंपिक पदक जीतना ही जरूरी नहीं है . इन सकारात्मक गाथाओं को युवा खिलाड़ियों तक पहुंचाकर मीडिया बड़ी भूमिका निभा सकता है .’

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कार्यक्रम में रियो ओलंपिक रजत पदक विजेता बैडमिंटन खिलाड़ी पी वी सिंधू, उनके कोच पुलेला गोपीचंद , महान क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी , पूर्व हाकी कप्तान जफर इकबाल, पूर्व क्रिकेटर मदन लाल, राष्ट्रीय महिला हाकी टीम के कोच हरेंद्र सिंह भी मौजूद थे. हिंदू प्रकाशन समूह की सह अध्यक्ष मालिनी पार्थसारथी ने भारत को खेल महाशक्ति बनाने के लिये खेल पत्रकारों, खेल प्रशासकों और खेल महासंघों के मिले जुले प्रयासों पर जोर दिया.