उत्तर प्रदेश जल्द ही अलग-अलग जल मार्ग के जरिए अपने कारोबार को नई ऊंचाई देगा. इससे बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा.
UDAAN: Zee Uttar Pradesh Uttarakhand युवाओं के हौसले को उड़ान देने के लिए पीएम मोदी के सांसदीय क्षेत्र काशी में पहुंचा. कार्यक्रम के दौरान जब मंच पर शेखर सुमन आए तो उन्होनें पूरे मंच को अपना बना लिया. देखिए क्या हुआ...
UDAAN: Zee Uttar Pradesh Uttarakhand युवाओं के हौसले को उड़ान देने के लिए पीएम मोदी के सांसदीय क्षेत्र काशी में पहुंचा. चर्चा के दौरान योगी सरकार में खाद्य सुरक्षा एवं आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु ने बताया कि कैसे उन्हें ये मंत्रालय मिला और उन्होंने अब तक क्या-क्या किया...
मुलायम सिंह यादव के समधी हरिओम यादव ने उपचुनाव में हार के बाद अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के भविष्य पर सवाल खड़े किए हैं. वहीं इसको लेकर योगी सरकार में आयुष, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन राज्यमंत्री दयाशंकर मिश्रा 'दयालु' ने भी प्रतिक्रिया देते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधा है.
UP MLC Election: यूपी में 13 सीटों के लिए होने वाले विधान परिषद चुनाव (UP MLC Election 2022) के लिए भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janata Party) ने आज अपने 9 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है..
किसी से मिलते ही हम उसे ‘जैसा है’, उसकी जगह ‘जैसा चाहिए’ बनाने में लग जाते हैं. बदलने की जिद में हम खुद को भुलाने लगते हैं. जो जैसा है, उसे उसी भाव से ग्रहण करना, रिश्तों को तनाव से बचाने में ‘टॉनिक’ का काम करता है.
हम छोटे होते हैं तो सुख को स्थगित नहीं करते. उसे जीते हैं. हम उसे नहीं कहते, ‘ओ ! सुख कल आना.’
अतीत की गलियों में बहुत अधिक भटकने के कारण हम वर्तमान से दूर होते जा रहे हैं. वर्तमान से दूरी होने का अर्थ अतीत की घुटन और भविष्य से भटकाव है.
फैसला लेते समय डरिए मत, याद रखिए गलत निर्णय भी अनिर्णय से लाख गुना बेहतर है. इसमें कुछ न करने के अपराधबोध से हम पूरी जिंदगी आजाद रहते हैं.
अपनों से मिलिए, संवाद कीजिए. ख्याल रखना और करना एक संक्रामक आदत है. जितना अधिक इसका उपयोग किया जाएगा, यह उतना ही असर दिखाएगी.
कुछ लोग जिनमें क्षमता है, अपनी बात कहने की. वह क्या कहते हैं! क्या वह कोई नई बात कहते दिखते हैं. कुछ ऐसा जो हमारी सड़ी-गली सोच-विचार की शैली को बदलने में मदद कर सके. सबकुछ वैसा, जैसा चला आ रहा है, उसे कौन बदलेगा. नए सवाल, सोच की बात करना अंतरिक्ष में जाने जैसी चीज नहीं है. लेकिन इसे ऐसा ही बना दिया गया है!
हम मनुष्य के सामाजिक प्राणी होने के मूल गुण से पहली बार इतनी दूर निकलते दिखाई दे रहे हैं. हर चीज को बस वर्चुअल दुनिया के पैमाने से देखा जा रहा है.
बच्चों के हृदय को जितना संभव हो स्नेह, प्रेम, आत्मीयता से भरा जाए. यही प्रेम मूल को ‘सूद’ के साथ लौटाकर लाएगा.
दर्द से उबरना भी एक उपचार है. अगर सही तरह से दुख से बाहर नहीं निकला जाए तो यह ताउम्र अमरबेल की तरह हमारी आत्मा पर सवार रहता है.
अनुभव, जिंदगी का ऐसा तत्व है, जिस पर हमारा न्यूनतम नियंत्रण है. लेकिन इसके बाद भी हमने फैसलों की फ्रेंचाइजी उसे दी हुई है.
हम अपने जीवन को सुखद, सरल, सरस बनाना चाहते हैं, तो प्रेम को अपना स्वभाव बनाना होगा. उसको दूसरों के नजरिए, स्वभाव के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता!
बच्चों के पढ़ाई के लिए बाहर जाते ही माता-पिता में खालीपन देखा जा रहा है. जैसे किसी ने उनकी मुस्कान गिरवी रख दी हो कि खुश रहना मना है.
जिंदगी के प्रति थोड़ी कंजूसी भी जरूरी है, जिससे इसे दूसरों से नफरत, असहमति के नाम पर खर्च होने से बचाया जा सके!
हम अपनी बहुत ‘छोटी’ दुनिया के अनुभव को जब बहुत बड़ी धरती पर लागू करने की कोशिश करते हैं, तो इससे हमारा दृष्टिकोण बहुत बाधित होता जाता है.
बच्चे बहुत तेज़ी से सीखते, समझते और नई चीज़ के लिए तैयार होते हैं. विडंबना यह है कि बड़े होते ही हम अपना ही सबसे अनमोल गुण बिसरा देते हैं.
संदेह, प्रेम की कमी से हम रिक्त, रूखे और कठोर होते जाते हैं. धीरे-धीरे यह हमारा स्थाई बनता जाता है. चित्त में जो भाव ठहर जाए, वह आसानी से नहीं बदलता.
हमने बेटियों की शिक्षा की ओर तो कदम बढ़ा दिया, लेकिन लड़के हमारे वैसे ही रह गए. उनका रवैया, नजरिया, सोच अभी भी सामंती है. पुरातन है. उसमें नई हवा के झोंके बहुत कम हैं!