Kanshiram Death Anniversary: बचपन में ही कांशीराम ने देखा कि कैसे ऊंची जातियों का दबाव दलितों को कुचलता है, लेकिन घर में सिख धर्म की समानता की सीख ने उनके मन में विद्रोह की चिंगारी जलाई. दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को राजनीतिक ताकत देने के लिए साल 1984 में कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) की नींव रखी.
Kanshiram Birth Anniversary: बसपा के संस्थापक कांशीराम की आज जयंती है. बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांशीराम को श्रद्धांजलि दी. इस दौरान अन्य राजनीतिक दल भी पीछे नहीं रहे.
DNA: कर्पूरी ठाकुर बिहार के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री थे. मुख्यमंत्री के रूप में दोनों कार्यकाल को मिलाकर कुल ढाई साल बिहार का शासन उनके हाथ में रहा. वो लोगों के बीच इतने लोकप्रिय थे कि 1952 की पहली विधानसभा में चुनाव जीतने के बाद वो बिहार विधानसभा का चुनाव कभी नहीं हारे. लेकिन कर्पूरी ठाकुर की पहचान एक राजनेता के साथ-साथ बड़े समाजवादी और समाज सुधारक की थी । कर्पूरी ठाकुर ने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया । वो भले ही पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखते थे । लेकिन उनकी सोच उनका Vision समाज के गरीब और वंचित वर्ग के कल्याण का रहा ।
Kasam Samvidhan Ki: Karpoori Thakur Bharat Ratna- कर्पूरी ठाकुर, भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर। नई जेनरेशन में बहुतों ने तो शायद नाम भी नहीं सुना होगा। तो बता दें, ये एक ऐसे मुख्यमंत्री थे जिनके पास विदेश दौरे में पहनने के लिये एक कोट तक नहीं था। लोगों ने चंदा करके कुर्ते के लिये पैसा दिया तो वो भी मुख्यमंत्री कोष में दे दिया। जब इस दुनिया से गये तो वसीयत में सिर्फ़ एक झोपड़ी छोड़ गये। बिहार की माटी से जन्म ऐसे जननायक को सरकार ने देश का सर्वोच्च सम्मान यानी 49वां भारत रत्न देने का फ़ैसला किया है.
Mayawati Breaking News: बड़ी खबर सामने आ रही है, BSP अध्यक्ष मायावती ने बड़ी मांग की है. बता दें मायावती ने कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग की है. मायावती ने कहा है कि कांशीराम को भारत रत्न दिया जाए. कांशीराम का योगदान ऐतिहासिक है. इसके साथ ही मायावती ने कर्पूरी ठाकुर के सम्मान का स्वागत किया है.
अखिलेश यादव के बयान पर बवाल मच गया है. अखिलेश यादव टोटी चोर वाले सवाल पर भड़के हैं. पत्रकार को बीजेपी का एजेंट बताया. कहा- इस पत्रकार की फोटो खींच लो. सीएम आवास खाली करने पर उसे गंगाजल से धुलवाया गया. पत्रकार के नाम बताने पर बोले-मुस्लिम की ऐसी भाषा नहीं हो सकती.
स्वामी प्रसाद मौर्य के विवादित बोल से सपा को नुकसान पहुंच सकता है. उन्होंने मिले मुलायम कांशीराम हवा में उड़ गए कांशीराम का नारा रायबरेली में अखिलेश यादव की रैली में लगवाया. इसको लेकर उनपर केस दर्ज हो गया है. रामचरित मानस के बाद ये नया विवाद सपा नेता ने पैदा किया है.
बसपा सुप्रीमो मायावती के उत्तर प्रदेश में घटते जनाधार के बाद उनके दलित वोट बैंक पर बीजेपी और सपा की निगाहें टिक गई हैं. समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने रायबरेली में कांशीराम की प्रतिमा का अनावरण करते हुए साफ संकेत दिए हैं कि वो एमवाईडी यानी मुस्लिम यादव दलित वोटबैंक को मजबूत करेंगे, जिस वोटबैंक ने मुलायम को सत्ता दिलाई थी. वहीं कौशांबी में 7 अप्रैल को अमित शाह का दलितों के बीच कार्यक्रम है.
UP Politics : समाजवादी पार्टी के लिए स्वामी प्रसाद मौर्य के विवादित बयान उनके ही दल के लिए मुसीबत बनते जा रहे हैं. रायबरेली में मिले मुलायम कांशीराम, हवा में उड़ गए जयश्री राम नारे पर खुद स्वामी प्रसाद को सफाई देते नहीं बन रहा है.
पहलवानी के अखाड़े से हिंसक रूप लेते हुए राजनीतिक सफर तय करने वाले मुलायम सिंह यादव आज जीवन के 81 बसंत देख चुके हैं. उत्तरप्रदेश की राजनीति के बड़े नामों में शामिल मुलायम सिंह यादव के नाम कई किस्से या यूं कहें कि कई कांड दर्ज हैं. आइए आपको मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक करियर और राजनीति के कुछ बड़े कांड और विवादों से परिचित कराते हैं
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की गिनती अपनी पीढ़ी के सबसे तेजतर्रार, मेहनती, ईमानदार और समझदार नेताओं में होती है। सरकारी बंगला खाली करने के बाद जो अखिलेश ने किया उसने सब मटिया मेट कर दिया। देश के सबसे बड़े सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से उम्मीद थी कि वो सियासत में कोई बड़ी लकीर खीचेंगे। वो समाजवादी पार्टी जिसकी पहचान ही एक उद्दंड पार्टी थी..अखिलेश ने उस छवि को बदला था। अखिलेश ने कार्यकर्ताओं पर लगाम भी लगाई थी,
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की गिनती अपनी पीढ़ी के सबसे तेजतर्रार, मेहनती, ईमानदार और समझदार नेताओं में होती है। सरकारी बंगला खाली करने के बाद जो अखिलेश ने किया उसने सब मटिया मेट कर दिया। देश के सबसे बड़े सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से उम्मीद थी कि वो सियासत में कोई बड़ी लकीर खीचेंगे। वो समाजवादी पार्टी जिसकी पहचान ही एक उद्दंड पार्टी थी..अखिलेश ने उस छवि को बदला था। अखिलेश ने कार्यकर्ताओं पर लगाम भी लगाई थी,
सत्ता में रहे तब भी मौज, सत्ता छिन जाए तब भी मौज जनता के बीच खुद के गरीब होने की मुनादी करने वाले नेताओं को रिटायमेंट के बाद भी राजाओं की तरह आलीशान बंगला चाहिए.जनता के पैसे पर मौज चाहिए.सुप्रीम कोर्ट ने जब नेताओं के इसी मोह पर हथौड़ा जड़ा तो यूपी सरकार ने भी पूर्व मुख्यमंत्रियों को 15 दिन के भीतर सरकारी आवास खाली करने का फरमान सुना दियसत्ता में रहे तब भी मौज, सत्ता छिन जाए तब भी मौज..जनता के बीच खुद के गरीब होने की मुनादी करने वाले नेताओं को रिटायमेंट के बाद भी राजाओं की तरह आलीशान बंगला चाहिए.जनता के पैसे पर मौज चाहिए.सुप्रीम कोर्ट ने जब नेताओं के इसी मोह पर हथौड़ा जड़ा तो यूपी सरकार ने भी पूर्व मुख्यमंत्रियों को 15 दिन के भीतर सरकारी आवास खाली करने का फरमान सुना दिया
सत्ता में रहे तब भी मौज, सत्ता छिन जाए तब भी मौज जनता के बीच खुद के गरीब होने की मुनादी करने वाले नेताओं को रिटायमेंट के बाद भी राजाओं की तरह आलीशान बंगला चाहिए.जनता के पैसे पर मौज चाहिए.सुप्रीम कोर्ट ने जब नेताओं के इसी मोह पर हथौड़ा जड़ा तो यूपी सरकार ने भी पूर्व मुख्यमंत्रियों को 15 दिन के भीतर सरकारी आवास खाली करने का फरमान सुना दियसत्ता में रहे तब भी मौज, सत्ता छिन जाए तब भी मौज..जनता के बीच खुद के गरीब होने की मुनादी करने वाले नेताओं को रिटायमेंट के बाद भी राजाओं की तरह आलीशान बंगला चाहिए.जनता के पैसे पर मौज चाहिए.सुप्रीम कोर्ट ने जब नेताओं के इसी मोह पर हथौड़ा जड़ा तो यूपी सरकार ने भी पूर्व मुख्यमंत्रियों को 15 दिन के भीतर सरकारी आवास खाली करने का फरमान सुना दिय
शहरों में छोटे-छोटे मकानों के लिए आम लोग जीवनभर संघर्ष करते हैं, लेकिन हमारे नेताओं को जनता के पैसों पर बड़े-बड़े आलीशान बंगलों का शौक़ होता है.सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री 15 दिनों के भीतर सरकारी बंगला खाली करें .इस आदेश के तहत अखिलेश यादव-मुलायम-मायावती को बंगला खाली करना था लेकिन इन नेताओं ने क्या किया उसकी एक बानगी देखिए..