उत्तराखंड के इस गांव का है रामायण-महाभारत से खास कनेक्शन, यहां बसते हैं कौरव-पांडव के वंशज

पहाड़ों से घिरा राज्य उत्तराखंड देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है. यहां हर मौसम में पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहता है. मौसम कैसा भी हो, उत्तराखंड की खूबसूरती की बात ही अलग है.

उत्तराखंड के इस गांव का है रामायण-महाभारत से खास कनेक्शन, यहां बसते हैं कौरव-पांडव के वंशज

नई दिल्ली: पहाड़ों से घिरा राज्य उत्तराखंड देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है. यहां हर मौसम में पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहता है. मौसम कैसा भी हो, उत्तराखंड की खूबसूरती की बात ही अलग है. हालांकि, हर देश, राज्य और शहर की तरह यहां भी कुछ ऐसी जगहें हैं, जिनके बारे में ज्यादा लोगों को जानकारी नहीं है. जानिए, उत्तराखंड के एक ऐसे ही खास गांव के बारे में, जहां आपको जिंदगी में एक बार तो जरूर जाना चाहिए (places to visit in Uttarakhand).

कौरव-पांडव के वंशजों का गांव
उत्तराखंड के ऊपरी गढ़वाल क्षेत्र में स्थित कलाप गांव (Kalap) कई इलाकों से कटा हुआ है और अधिकतर लोगों को इसके बारे में ज्यादा जानकारी भी नहीं है. यहां की आबादी भी सामान्य से काफी कम है. ज्यादा मशहूर न होने और आबादी कम होने के बावजूद कलाप गांव बेहद खास है और अपने अंदर पौराणिक दौर का एक गहरा राज भी समेटे हुए है. कलाप गांव उत्तराखंड की टन्स घाटी में स्थित है और सर्वविदित है कि इस पूरी घाटी को महाभारत की जन्मभूमि माना जाता है. मान्यता है कि इस गांव से रामायण और महाभारत का इतिहास जुड़ा हुआ है. इसी वजह से यहां के लोग अभी तक खुद को कौरव और पांडवों का वंशज बताते हैं.

खूबसूरती की पराकाष्ठा है कलाप गांव
यह गांव उस क्षेत्र के अन्य इलाकों से कटा हुआ है और यहां के लोगों की जिदंगी भी काफी मुश्किलों भरी है. आबादी कम होने और बाकी इलाकों से दूर होने की वजह से यहां के निवासियों की आमदनी का मुख्य सहारा खेती है. इसके अलावा वे भेड़-बकरी भी पालते हैं. इस गांव की अद्भुत खूबसूरती और रामायण व महाभारत से खास कनेक्शन के चलते इसे ट्रैवल डेस्टिनेशन के तौर पर विकसित किया जा रहा है।

कलाप से जुड़ी खास बातें
कलाप गांव में कर्ण का मंदिर है और इसीलिए यहां कर्ण महाराज उत्सव भी मनाया जाता है. यह विशेष उत्सव 10 साल के अंतराल पर मनाया जाता है. सिर्फ इतना ही नहीं, जनवरी में यहां पांडव नृत्य किया जाता है, जिसमें महाभारत की विभिन्न कथाओं का प्रदर्शन किया जाता है. यह जगह काफी दुर्गम है, इसलिए यहां जो कुछ भी खाया-पिया या ओढ़ा-पहना जाता है, वह सब कलाप में ही बनता है. कलाप गांव में खसखस, गुड़ और गेहूं के आटे को मिलाकर एक खास डिश बनाई जाती है. 

कब करें यात्रा
कलाप दिल्ली से 540 किलोमीटर दूर है, जबकि देहरादून से मात्र 210 किलोमीटर की दूरी पर है. यहां साल के किसी भी वक्त जाया जा सकता है. यहां से स्नोफॉल का भी काफी शानदार व्यू नजर आता है.

घूमने के लिए ऐसी ही जगहों के बारे में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें