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इटली: G7 के इस देश ने चीन से क्या मिलाया हाथ, उड़ गई अमेरिका और यूरोप की नींद

पिछले साल इटली की आर्थिक व्यवस्था पर भारी संकट छा गया, जिससे ऊबरने के लिए उसने चीन के बीआरआई से जुड़ते हुए कई आर्थिक समझौते किए हैं. 

इटली: G7 के इस देश ने चीन से क्या मिलाया हाथ, उड़ गई अमेरिका और यूरोप की नींद
इटली के प्रधानमंत्री कोंटे को फाइव स्टार मूवमेंट और दक्षिणपंथी लीग के गठबंधन ने अपना नेता चुना था. (फोटो: Reuters)

नई दिल्ली: इतिहास में रोमन साम्राज्य के लिए मशहूर इटली दक्षिण यूरोप में स्थित है. पिछले कई समय से राजनैतिक अस्थिर से जूझ रहा इटली आज जी7 जैसे विकसित आर्थिक देशों के समूह का सदस्य है. यहां के ईसाई धर्माचार्यों का दुनिया भर में प्रभाव रहता है. विकसित राष्ट्र की श्रेणी में आने के बावजूद आज इटली की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं हैं. इन हालातों में इटली ने चीन के साथ समझौते किया है. इससे अमेरिका और उसके साथी यूरोपीय देशों को भी चिंता में डाल दिया है. 

क्यों चर्चा में है आज इटली
मार्च के अंतिम सप्ताह में चीन के राष्ट्रपति शी जिंगपिन ने इटली की यात्रा की. इस यात्रा के दौरान इटली ने चीन की महत्वाकांक्षी योजना ‘वन बेल्ट वन रोड’ (ओबीओआर) जिसे बेल्ट रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) भी कहा जाता है, का हिस्सा बनने पर सहमति जताई. इस समझौते पर अमेरिका और यूरोपीय संघ के अन्य देशों की तमाम आशंकाओं के बीच इटली ने चीन से कई आर्थिक समझौते कर लिए.

क्या है चीन की योजना
चीन की इस योजना में चीन से अफ्रीका और यूरोप को जोड़ने के लिए बंदरगाह, पुलों, सड़कों, ऊर्जा संयंत्र की जाल बनाने की महत्वाकांक्षी परियोजनाएं शामिल हैं. अमेरिका और यूरोप के कई देश चीन की इस योजना को उसकी विस्तारवादी नीति का हिस्सा बताकर उसके आलोचक रहे हैं. चीन ने जी7 जैसे शक्तिशाली और प्रभावशाली समूह के सदस्य को अपनी योजना से जोड़कर बड़ी सफलता हासिल की है. 

Italy china signs several MoUs

आर्थिक शक्ति होने पर भी क्यों संकट में है इटली अर्थव्यवस्था
यूरोपीय संघ, जी7 और जी20 समूह के संस्थापक सदस्य रहने वाला इटली यूरोपीय संघ की तीसरी, जीडीपी के लिहाज से दुनिया की 8वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. 2016 में यह दुनिया का 8वां सबसे बड़ा निर्यात करने वाला देश था. इसमें उसका सबसे ज्यादा निर्यात यूरोपीय संघ के देशों में ही होता था. यह स्थिति 2008-09 के मंदी के दौर से उबरती हुई  अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी थी, लेकिन इटली की कुछ समस्याएं बढ़ती ही गई जिनमें बढ़ता सरकारी खर्च सबसे ज्यादा चिंताजनक था. 2014 के बाद उठ रही अर्थव्यवस्था में 2018 को गिरावट देखने को मिली जिसने यूरोपीय संघ सहित दुनिया भर को चिंतित कर दिया. बढ़ते खर्च और कर्ज का असर  यूरो पर भी विपरीत असर पड़ा. 

क्या है दुनिया के बाकी देशों की चिंताएं
इटली के आर्थिक विकास मंत्री, ल्यूगी दि माइयो का कहना है कि इस समझौते से इटली के व्यापार और आर्थिक स्थिति में जबर्दस्त उछाल आएगा और दोनों देशों ने 2.5 बीलियन यूरो के समझौते किए हैं जो 20 बिलियन यूरो तक बढ़ने की क्षमता रखते हैं. वहीं इन समझौतों को लेकर अमेरिका, जो चीन से व्यापार युद्ध में उलझा है, और यूरोपीय संघ के कई देश जो कि चीनी कंपनियों की अस्वस्थ स्पर्धा से परेशान हैं, चिंचित हैं. यहां तक कि इटली में कई लोगों को इन समझौतों से देश की संप्रभुता को ताक पर रखने की आशंका दिख रही है.

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इटली का भूगोल इसे यूरोप से अलग बनाता है
इटली दक्षिण यूरोप में जूते के आकार जैसा देश है. इटली उत्तर पूर्व में फ्रांस, उत्तर में स्विट्जरलैंड एवं ऑस्ट्रिया से आल्प्स पर्वत श्रृंखला पर जमीनी सीमा बांटता है. उत्तर पूर्व के मैदानी भाग से स्लोवेनिया की सीमा भी लगती है. इसके अलावा दक्षिण पश्चिमी तट पर स्थित राजधानी रोम के पास दुनिया का सबसे छोटा देश वेटिकन सिटी भी इटली की जमीन को छूता है. दक्षिण में भूमध्यसागर से लगे इस देश के पश्चिम में लिगूरियन सागर, दक्षिण पश्चिम में तिरहेनियन सागर, दक्षिण में आयोनियन सागर, पूर्व में एड्रियाटिक सागर हैं. इसके साथ ही दो बड़े द्वीप एर्डीनिया और सिसली भी इटली के भाग हैं. अल्बेनिया, अल्जीरिया, क्रोएशिया, यूनान (ग्रीस), लीबिया, माल्टा, मोंटेनेग्रो, स्पेन और ट्यूनीशिया इटली से समुद्री सीमा साझा करते हैं. 

इटली में एपेनाइन पर्वत श्रृंखला उत्तर पश्चिम के समुद्री तट के पास से दक्षिण की ओर होते हुए इटली के प्रायद्वीपीय हिस्से को दो भागों में बांटते हुए सिसली की ओर जाती दिखाई पड़ती है. एपेनाइन और उत्तरी सीमा में आल्प्स पर्वतों के बीच में नदियों से भरा पो मैदान है जिसकी प्रमुख नदी भी पो नाम से ही जानी जाती है. 301,318 वर्ग किलोमीटर (116,340 वर्ग मील) में फैला इटली ऐसे क्षेत्र में स्थित है जहां भूकंप आने की संभावनाएं काफी है. भूकंप की कई आपदाओं ने इस देश के शहरों को बर्बाद किया है. भूगर्भीय दृष्टि से यूरोप और अफ्रीकी टेक्टोनिक प्लेटों की सीमा पर होने से यहां कई ज्वालामुखी आज भी सक्रिय हैं इनमें एटना पर्वत, ,स्ट्रोम्बोली और नेपल्स के पास स्थित माउंट वेसुवियस के ज्वालामुखी आज भी सक्रिय हैं. 

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और भी कई बातों के लिए है इटली मशहूर
कला के क्षेत्र में चाहे चित्रकला, मुर्तिकला, वास्तुकला हो याकि सिनेमा हो, इटली ने दुनिया को बेहतरीन सौगातें दी हैं. 6 करोड़ से ज्यादा आबादी वाला देश एक समय जनसंख्या वृद्धि की कमी से जूझ रहा था. 21वीं सदी में जनसंख्या वृद्धि और जन्मदर में बढ़ोत्तरी हुई. देश में आज करीब 90% लोग ईसाई धर्म के मानने वाले हैं उसके बाद यहूदी और फिर मुस्लिमों की संख्या है. इटैलियन भाषा के अलावा यहां फ्रैंच और जर्मन भाषा बोलने वाले लोग भी पाए जाते हैं. 

संक्षिप्त इतिहास 
इटली में इंडो-यूरोपियन मूल के मानव बसाहट के स्रोत मिलते हैं फिनीसियन लोग यहां आने वाले पहले विदेशी माने जाते हैं. इसके बाद 8वीं और 9वीं ईसापूर्व से ग्रीकों का यहां प्रभाव रहा. 8वीं सदी के मध्य में रोमन राजवंश की स्थापना हुई जिसे 6वीं सदी के अंत तक स्थानीय गणतंत्र व्यवस्था में बदल दिया गया. अब तक इटली इतालिया नाम से पहचाना जाने लगा. पहली ईसापूर्व सदी में जूलियस सीजर के शासन काल में चरमोत्कर्ष पर था. अब तक रोमन साम्राज्य पश्चिम यूरोप, उत्तरी अफ्रीका से लेकर पश्चिम एशिया तक फैल चुका था. चौथी सदी तक इस साम्राज्य में दो फाड़ हो गए थे. पश्चिमी रोमन और पूर्वी रोमन. पश्चिमी रोमन तो जल्द ही बिखर गया, लेकिन पूर्वी रोमन काफी लंबे समय तक कायम रहा. लेकिन पश्चिमी रोमन साम्राज्य का अंत ओडोएसर वंश ने किया और फिर गौथ वंश ने इटली पर 6वीं सदी के मध्य  तक शासन किया.

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6वीं सदी लोंबार्दियों का वर्चस्व बढ़ गया. आठवीं सदी के अंत तक यहां फ्रैंक साम्राज्य का शासन आ गया. इसके बाद कमजोर हो रहे इटली पर 10वीं सदी में हूणों और अरबों के आक्रमण होते रहे. इस दौरान शासकों के बदलने के बावजूद ईसाई धर्माचार्य का प्रभाव इटली सहित यूरोप में कायम रहा. उन्हीं के प्रभाव से 10वीं सदी में जर्मनों ने यहां अधिपत्य जमाया जो कि 15वीं सदी तक कायम रहा. 16वीं सदी में फ्रांस, स्पेन, आस्ट्रिया में इटली में अधिपत्य को लेकर संघर्ष चलता रहा जिसकी परिणति नेपोलियन के कब्जे ले हुई जो कि 19वीं सदी के आरंभ में हुई. इसके बाद छोटे विद्रोह होते रहे लेकिन जनरल गारीबाल्दी इटली पर कब्जा किया और फिर 1860 में विक्टर एनामुएल विधिवत तौर पर इटली के राजा घोषित कर दिए गए. 

प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी के साथ युद्ध में भाग लेने के फलस्वरूप 6 लाख से 
ज्यादा इतावली सैनिक मारे गए और करीब 10 लाख सैनिक जख्मी हो गए. इस नुकसान का नतीजा यह हुआ कि इटली में फासीवाद का उदय हुआ और बेनितो मुसोलिनी के नेतृत्व में इटली में नया शासन आ गया. दूसरे विश्वयुद्ध में इटली ने धुरीराष्ट्रों का साथ दिया जिसके बाद मित्रराष्ट्रों की जीत से इटली में मुसोलिनी और फासिस्ट शासन खत्म हो सका. 

किस तरह का शासन व्यवस्था है इटली में
1946 में जनमत संग्रह ने देश की जनता ने गणतंत्र का चुनाव किया. इसके बाद लागू संविधान के अनुसार राजतंत्र के सारे अंश देश की शासन व्यवस्था से हटा दिए गए और संसदीय लोकतांत्रिक शासन प्रणाली लागू कर दी गई. इटली में द्विसदनीय संसद चेंबर ऑप डेप्यूटीज और सीनेट से बनी है जिसके दो तिहाई बहुतम से राष्ट्रपति सात साल के लिए चुना जाता है. सांसदों को विशेष अधिकार मिले हैं जिसकी वजह से उन पर आपराधिक मुकदमे नहीं चलाए जा सकते. प्रधानमंत्री मंत्रीमंडल का प्रमुख होता है जिसे संसद में बहुमत प्राप्त करना होता है. प्रधानमंत्री और उसके मंत्रीमंडल की शक्तियां भारत के प्रधानमंत्री और उसके मंत्रीमंडल की तरह होती हैं. बस वे केवल संसद भंग नहीं कर सकते. इसके अलावा इटली की न्याय व्यवस्था अमेरिका की तरह ही है. 

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आधुनिक इटली
नए के लागू होने के बाद संविधान के बाद इटली 1957 में यूरोपीय आर्थिक समुदाय का संस्थापक सदस्य बना जो बाद में युरोपीय संघ बना. आजादी के बाद चार दशकों तक इटली ने बहुत तेजी से उन्नति की और देश को एक विकसित देश में बदल दिया, लेकिन इसके साथ ही दक्षिण पंथीयों और वामपंथियों में राजनैतिक संघर्ष भी जारी रहा जिसमें हिंसा शामिल रही. 1990 के दशक में इटली के लिए भ्रष्टाचार के खुलासों के कारण राजनैतिक उथल पुथल का दौर रहा. इसके बाद से इटली राजनैतिक स्थिरता नहीं रही. 

आज का इटली
वर्तमान में ग्यूसेप कॉन्टे देश के प्रधानमंत्री हैं और देश के राष्ट्रपति  सर्गियो मातरेला हैं. जून 2018 में हुए इटली के संसदीय चुनावों में दो प्रमुख पार्टीयों, फाइव स्टार मूवमेंट और दक्षिणपंथी लीग के गठबंधन ने ग्यूसेप कॉन्टे को प्रधानमंत्री चुना जो कि दोनों में से किसी पार्टी से संबद्ध नहीं थे, जबकि वे फाइव स्टार मूवमेंट पार्टी से सहानुभूति जरूर रखते थे. दक्षिणपंथी लीग को सबसे ज्यादा सीटें तो मिली लेकिन बहुमत नहीं मिला था.