नेपाली PM ने Yogi के बयान पर जताई नाराजगी, कोरोना के लिए फिर भारत पर साधा निशाना

भारत और नेपाल के संबंधों में तल्खी बरकरार है.

नेपाली PM ने Yogi के बयान पर जताई नाराजगी, कोरोना के लिए फिर भारत पर साधा निशाना
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली

काठमांडू: भारत और नेपाल के संबंधों में तल्खी बरकरार है. नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) ने बुधवार को एक बार फिर भारत पर बात की और इस दौरान उन्होंने कालापानी (Kalapani) में भारतीय सेना की मौजूदगी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के बयान पर नाराजगी जताई. 

नेपाल कालापानी को लिपुलेख और लिंपियाधुरा सहित अपना हिस्सा मानता है और पिछले महीने एक विवादित नक्शा जारी कर उसने भारतीय क्षेत्रों को अपना बताया था. तभी से दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है. नेपाली संसद में बोलते हुए पीएम ओली ने कहा, "भारतीय सुरक्षाबलों की तैनाती की वजह से हमारे क्षेत्र हमसे अलग हो गए हैं और हमें वहां तक पहुंचने नहीं दिया जा रहा है. भारत के समक्ष यह मुद्दा उठाया गया है. तथ्यों और ऐतिहासिक सबूतों के आधार पर हमारे क्षेत्रों को हमें वापस सौंपा जाना चाहिए."

सीमा विवाद के बाद प्रधानमंत्री शर्मा ने योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी का जिक्र किया. उन्होंने योगी के बयान की निंदा करते हुए उसे धमकी करार दिया. पीएम ने कहा, "उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने नेपाल को लेकर जो कुछ कहा है वह गलत है और हमें अस्वीकार्य है". गौरतलब है कि योगी ने सीमा विवाद पर नेपाल को नसीहत देते हुए कहा था कि उसे राजनीतिक सीमाएं तय करने से पहले उसके प्रभावों को ध्यान में रखना चाहिए. योगी ने नेपाल को लद्दाख के हाल से सीख लेने की नसीहत भी दी थी. 

नेपाली प्रधानमंत्री ने COVID-19 संकट को लेकर भी भारत पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि देश में कोरोना के 85% मामले भारत से आये हैं. नेपाल शुरुआत से ही भारत की वजह से संक्रमितों की संख्या में वृद्धि की बात कहता आ रहा है.   

वहीं, मंगलवार को नेपाल के निचले सदन ने सर्वसम्मति से विवादित नक्शे को लेकर पेश किये गए संवैधानिक संशोधन बिल का समर्थन किया. निचले सदन में दो तिहाई बहुमत से पारित होने के 72 घंटे के बाद यह ऊपरी सदन-राष्ट्रीय सभा में जाएगा, जहां उसी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा. ऊपरी सदन में पारित होने और नेपाली राष्ट्रपति द्वारा उस पर मुहर लगाने के बाद नेपाल के विवादित नक्शे को संवैधानिक समर्थन मिल जाएगा.

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