जब इंदिरा गांधी के इस फैसले के खिलाफ खड़े हो गए थे देव आनंद, जानिए पूरा किस्सा

सदाबाहर एक्टर देव आनंद (Dev Anand) के चाहने वालों की आज भी कोई कमी नहीं है. एक वक्त ऐसा था जब एक्टर की एक झलक के लोग दीवाने रहते थे. हालांकि, देव आनंद की जिंदगी का एक ऐसा किस्सा भी है जिसे भुलाया नहीं जा सकता.

Written by - Bhawna Sahni | Last Updated : Dec 3, 2021, 08:21 AM IST
  • देव आनंद इमेरजेंसी के वक्त इंदिरा गांधी के खिलाफ खड़े थे
  • देव की जिंदगी की कई ऐसी बातें हैं जिनसे फैंस रूबरू नहीं हैं

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जब इंदिरा गांधी के इस फैसले के खिलाफ खड़े हो गए थे देव आनंद, जानिए पूरा किस्सा

नई दिल्ली: 50-70 के दशक में अगर किसी एक्टर को स्टाइल आइकन कहा जाए, तो वो नाम होगा एवरग्रीन एक्टर देव आनंद (Dev Anand) का. लहराते हुए चलना, अलग अंदाज में डायलॉग्स बोलना, तंग पतलून, सिर पर बैगी कैप और हमेशा आपको निहारती वो चमकती आंखे, कुछ ऐसे थे देव आनंद साहब. एक्टिंग के लिए उनका प्यार और जुनून उनकी फिल्मों और किरदारों में साफ देखा जा सकता था.

राजनीति में भी दिलचस्पी रखते थे देव आनंद

देव आनंद को फिल्मों में काम करना जितना पसंद था, उतनी ही दिलचस्पी वह राजनीति में भी रखते थे. उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी गठन भी किया था. यह बात उस समय की है जब भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) ने 25 जून, 1975 को अचानक पूरे देश में इमरजेंसी (1975 Emergency) का ऐलान कर दिया था. उनके इस फैसले का कई राजनीतिक पार्टियों के साथ कुछ फिल्मी हस्तियों ने भी विरोध किया था. इस लिस्ट में मुख्य नाम देव आनंद का था.

देव आनंद ने बनाई थी अपनी पार्टी

1977 में हुए लोकसभा चुनाव तक वह इंदिरा गांधी के खिलाफ ही रहे. इसके बाद 1979 में उन्होंने अपनी पार्टी 'नेशनल पार्टी ऑफ इंडिया' का गठन का ऐलान किया था.

इस दौरान देव आनंद ने अपने समर्थकों और आम लोगों के साथ एक रैली भी निकाली थी, इसमें संजीव कुमार (Sanjeev Kumar) और जीपी सिप्पी जैसी मशहूर हस्तियां भी शामिल हुई थीं. अपनी इस पार्टी का जिक्र देव आनंद ने अपनी आत्मकथा 'रोमांसिंग विद लाइफ (Romancing with Life)'  में भी किया है.

लंबा नहीं चल पाया राजनीतिक करियर

हालांकि, देव आनंद का राजनीतिक करियर लंबा नहीं चल पाया. आगे जाकर उनकी ये पार्टी खत्म हो गई. वहीं, अभिनेता ने फिर पूरी तरह अपनी फिल्मों पर ही ध्यान देना शुरू कर दिया. वैसे, कम ही लोग जानते हैं कि देव आनंद ने अशोक कुमार (Ashok Kumar) के अभिनय से प्रभावित होकर फिल्मी दुनिया में कदम रखा था. बहुत हाथ-पैर मारने के बाद आखिरकार देव साहब को 1946 में उनकी पहली फिल्म 'हम एक हैं' मिली. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

देव आनंद का स्टाइल बन जाता था ट्रेंड

देव आनंद के लिए फैंस की दीवानगी से हर शख्स वाकिफ है. उनका हर अंदाज उनके चाहने वालों पर जादू चला देता था. कहते हैं कि देव आनंद किसी ट्रेंड को फॉलो नहीं करते थे, बल्कि वह जो भी पहनते हैं वो ही फैशन बन जाता था. फिर चाहे बात उनके बोलने के तरीके की हो, या बालों में हाथ फेरने के स्टाइल की, लोग उनके हर अंदाज पर फिदा थे.

देव साहब का मशहूर किस्सा

देव साहब से जुड़ा एक किस्सा काफी मशहूर है, एक्टर जब भी काले कपड़े पहनकर निकलते थे तो लड़कियां उन्हें देखने के लिए बेताब हो जाती थीं. कई बार लड़कियां उनके झलक पाने के लिए छत पर से भी कूद जाती थीं. इस दौरान लोगों की जान पर भी बन आई थी. ऐसे में अदालत को उनके ब्लैक कपड़े पहनने पर बैन लगाना पड़ा था.

अधूरी रह गई प्रेम कहानी

जहां एक ओर देशभर की महिलाएं देव आनंद के लिए दीवानी थी, वहीं एक्टर का दिल उस जमाने की टॉप एक्ट्रेस सुरैया के दिल धड़कता था.

इन दोनों की मुलाकात 1948 में फिल्म 'विद्या' के सेट पर हुई थी. इस दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं. लेकिन सुरैया की नानी सख्त मिजाज की थीं, उन्हें ये रिश्ता कभी मंजूर नहीं था.

देव साहब ने दिया था शादी का प्रस्ताव

इसके बावजूद देव साहब ने उन्हें शादी का प्रस्ताव देते हुए एक हीरे की अंगूठी गिफ्ट की. इस बात की खबर जैसे ही सुरैया की नानी को लगी उन्होंने वो अंगूठी तुरंत फेंकने के लिए कहा और इसी के साथ ये प्रेम कहानी भी यहीं खत्म हो गई. वहीं, देव आनंद अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गए. इस लव स्टोरी का जिक्र करते हुए एक इंटरव्यू में देव साहब ने कहा था सुरैया इकलौती ऐसी लड़की थीं, जिनके लिए वह रोए थे.

तीन पीढ़ी की महिलाओं के दिलों पर किया राज

देव आनंद उन सितारों में से हैं, जिन्होंने तीन पीढ़ियों की महिलाओं के दिलों पर राज किया है. उनमें अपने काम के लिए जो दीवानगी थी, वो कम ही कलाकारों में देखने के लिए मिलती है. एक बार देव आनंद ने भी कहा था कि वह अपने काम से इतना प्यार करते हैं कि वह हमेशा इसके लिए जवान ही रहेंगे.

3 दिसंबर को हो गया निधन

शायद ये उनके काम के प्रति श्रद्धा का ही कमाल है कि देव साहब के मरने के बाद भी उनके चाहने वालों की संख्या करोड़ों में है. लोग आज भी उनसे अलग-अलग तरह से प्रभावित होते हैं. बता दें कि 26 सितंबर, 1923 में जन्में देव आनंद 3 दिसंबर, 2011 में 88 साल की उम्र में हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह दिया. लेकिन आज भी उनके फैंस उन्हें अपने दिलों के किसी कोने में जिंदा रखा हुआ है.

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