कांग्रेस का मिशन यूपी: मुस्लिम वोट साधते हुए शुरू की तैयारी

कांग्रेस पार्टी ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मुस्लिम वोट बैंक को साधने की तैयारी शुरू कर दी है.  

Written by - Prateek Srivastava | Last Updated : Jun 15, 2021, 08:12 PM IST
  • यूपी में अगले साल होने वाले हैं विधानसभा के चुनाव
  • सभी पार्टियों ने शुरू की है जोर आजमाइश
कांग्रेस का मिशन यूपी: मुस्लिम वोट साधते हुए शुरू की तैयारी

नई दिल्ली: प्रियंका गांधी के नेतृत्व में मिशन यूपी की तैयारी शुरू करते हुए कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर अपने कोर मतदाताओं को रिझाने की कोशिश के साथ शुरू कर दी है.  मिशन यूपी के तहत कांग्रेस पार्टी का पूरा जोर ओबीसी मुस्लिम वोट को साधने में लगा दिया है.

कांग्रेस पार्टी पिछले एक साल से उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में सौ मौलाना, उलेमा, सौ डॉक्टर सौ अलग-अलग पेशे से जुड़े लोगों के साथ मिलकर सभी जिलों की महिला समूहों को चुनकर उनके साथ लगातार संवाद करने में जुटी है. कांग्रेस का सिर्फ और सिर्फ एक मकसद है कि किसी भी तरह मुस्लिम वोट को एक जुट करके सपा-बसपा के पाले से अलग अपने साथ लाना है.

ओबीसी मुसलमानों को एकजुट करना है कांग्रेस का लक्ष्य

कांग्रेस का मुख्य लक्ष्य ओबीसी मुसलमानों को एकजुट करना ही है. कांग्रेस के लिए आगामी यूपी चुनाव में मुख्य समीकरण होगा. क्योंकि यह कुल मुस्लिम आबादी का 80 फीसद है. कांग्रेस की जिन ओबीसी मुसलमानों पर खास नजर है उसमें सलमानी(नाई), सैफी(बढ़ई), मलिक(तेली), अंसारी(बुनकर), अब्बासी(भिस्ती), कुरैशी(कसाई), मंसूरी(धुनिया), अल्वी(फकीर) मुख्य रूप से शामिल हैं.

मदरसों के बच्चों के सहारे चढ़ना चाहते हैं सत्ता की सीढ़ियां

मुसलमानों के बीच पैठ बनाने के लिए कांग्रेस ने मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों का सहारा लेने का भी मन बनाया है.  आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने हर मोर्चे पर तैयारी शुरू कर दी है. उसकी कोशिश अलग-अलग जाति और धर्म के लोगों को साधने की है. इसके लिए कांग्रेस ने अलग-अलग प्लानिंग की है. मुसलमानों के बीच पैठ बनाने के लिए कांग्रेस ने मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों का सहारा लेने की योजना बनाई है. इसके लिए प्रदेश के 2 लाख मदरसों की सूची तैयार की गई है.

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लगातार हो रही है मुसलमानों की उपेक्षा

उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक कांग्रेस के अध्यक्ष शहनवाज आलम का कहना है कि पार्टी में मुस्लिमों की उपेक्षा के चलते 1990 के बाद से अल्पसंख्यक वोट खिसक कर सपा और बसपा की ओर जाने लगा. लेकिन इन पार्टियों में भी मुस्लिमों को तवज्जो नहीं मिली. यूपी में भी कांग्रेस के पास कोई मजबूत नेतृत्व नहीं था, इसके चलते मुस्लिम वोटर भाजपा के विरोध में सपा और बसपा के साथ जाने को मजबूर रहे. जिसका फायदा दोनों पार्टियां उठाती रहीं, लेकिन अब UP कांग्रेस को प्रियंका गांधी के रुप में एक अच्छी लीडरशिप मिली है. इसलिए नए सिरे से मुस्लिमों को कांग्रेस से जोड़ने की कवायद शुरू हो रही है.

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मुसलमानों को एकजुट करने की है कोशिश

यूपी के अधिकांश मुस्लिम बाहुल्य गांव कस्बों मोहल्लों में कई छोटे छोटे अनऑर्गनाइज़्ड मदरसे हैं, कांग्रेस माइनॉरिटी सेल का फोकस इन्ही मदरसों पर हैं यहां पढ़ाने वाले मौलानाओं और बच्चों के जरिये एक मुहीम के तहत जमीन पर कांग्रेस इन मुस्लिम परिवारों के बीच अपनी बात पहुंचाकर इन्हें कांग्रेस के लिए एक जुट करने में लगी हैं. इस कैम्पेन में लगे कांग्रेस के पदाधिकारियों की मानें तो इस तरह के छोटे छोटे मदरसों की संख्या 02 लाख से भी ज्यादा हैं.

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