यूरोप से भावनगर पहुंच रहे हैं विदेशी पक्षी

भावनगर शहर में जहां कुदरती सम्पत्तियों का भंडार भरा पड़ा है. इसके अलावा यहां लम्बा सौदरा किनारा है, कई पर्वत है और शहर के मध्य में हरे भरे वन है. पर भावनगर में वर्ष के अंतिम चरण में विविध प्रकार के विदेशी पक्षियों का झुंड हिमाचल को लांग कर गोहिलवाड की मेहमान नवाजी के लिए पहुंचे हैं. जिसकी वजह से देश और विदेश में से आ रहे विविध पक्षियों को देखने के लिए भावनगर वासी उत्सुक दिख रहे है.  

यूरोप से भावनगर पहुंच रहे हैं विदेशी पक्षी

गांधीनगर: गुजरात का भावनगर शहर अपनी खूबसूरती के लिए पहचानी जाती है. और अब इस शहर की खूबसूरती को एशिया से आने वाली विदेशी पक्षियों ने और भी अधिक बढ़ा दी है. हरियर पक्षियों की तीन जाती होती है जिसमे पेलीड हेरियर, मोंटेगस हेरियर और मार्श हेरियर शामिल है. और हेरोनरी में विवध जाती के बगले जैसे की पॉइंटेड स्टोर्क, लिटल इग्रेट, आईबीस जैसे पक्षियों का समावेश होता है.

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भावनगर शहर में खास करके समुद्र किनारे के क्षेत्र जैसे कुंभारवाड़ा खार इलाके, नारीरोड, रउवा रवेची तालाब पर जलाशयों में ब्राह्मिनी डक, मुरहेन, विस्लिंग डक, नकटो, वगेरे पक्षियों के झुंड देखने मिलते है. यूरोपियन देशो में सर्दियों में बेहद ठंड होने की वजह से विविध जाती की पक्षियां हिमालय पर्वत को लांग कर भारत के अनेक इलाको में और खास करके भावनगर में पहुंचती हैं. यहां पहुंचने के बाद भावनगर शहर में गंगाजलिया तालाब के आसपास के पीलगार्डेन, महिलाबाग, टाउन हॉल समेत के इलाके के पेड़ पर अपना निवास्थान बना रही हैं.

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विदेशों से आईं पक्षियां वृक्षों पर घोंसला बनाकर उसमे अंडे भी देती है और बच्चे बड़े हो तब तक उसका ख्याल रखती है. इन पक्षियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में पक्षी प्रेमियों की भीड़ उमड़ रही है. भावनगर शहर की मध्य में ये तमाम पक्षी अपना निवासस्थान बना रही है जो सामान्य तोर पर बाकि शहरो में देखने को नहीं मिलती है. जिससे उनका ख्याल रखने के लिए भावनगर वासियों की नैतिक जिम्मेदारी बनती है. सैलानियों को देखते हुए स्थानीय निवासी इस जगह को और विकसित करने की मांग कर रहे हैं.