संभलकर! कहीं लाडलों की आंखें न छीन ले सैनेटाइजर

हैंड सैनिटाइजर की अल्कॉहॉलिक प्रकृति छोटे बच्चों के लिए घातक साबित हो सकती है. इससे उनकी आंखों पर गहरा असर पड़ सकता है. 

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Jan 22, 2021, 03:25 PM IST
  • सैनिटाइजर स्प्रे के इस्तेमाल से बच्चों की आंखें खराब होने के मामले सात गुना बढ़े
  • आंखों में केमिकल जाने की वजह से बुरा असर पड़ रहा है
संभलकर! कहीं लाडलों की आंखें न छीन ले सैनेटाइजर

नई दिल्लीः साल 2020 में Corona ने कई रूप बदल कर हमें परेशान किया है. अब वैक्सीन के आने से लोगों ने कुछ राहत महसूस की है, लेकिन खतरा टला नहीं है. Corona के दौर में हम कई नए उत्पादों के आदी बने हैं. मास्क और हैंड सैनेटाइजर हमारे लिए New Normal हैं. दरअसल नई मुसीबत वही बचाव है जो अब तक हम कोरोना से बचने के लिए करते आए हैं. हैंड सैनेटाइजर भले ही हमें Corona से दूर रखता हो, लेकिन आपके लाड़लों की आखों की रौशनी छीन सकता है. एक अध्ययन में यह बात सामने आई है.

बच्चों की आंख खराब होने  के मामले सात गुना बढ़े

दरअसल, हैंड सैनिटाइजर (Hand Sanitizer) की अल्कॉहॉलिक प्रकृति छोटे बच्चों के लिए घातक साबित हो सकती है. इससे उनकी आंखों पर गहरा असर पड़ सकता है. यह तथ्य एक फ्रेंच स्टडी में सामने आया है. इस अध्ययन के मुताबिक,  2019 की तुलना में 2020 में हैंड सैनिटाइजर की वजह से बच्चों की आंखें खराब होने के मामलों में सात गुना बढ़ोतरी हुई है.

हालांकि सैनेटाइजर के उपयोग को लेकर पहले भी चेताया जा चुका है कि बच्चे हों या व्यस्क हैंड सैनेटाइजर के प्रयोग से आंखों तक इसकी पहुंच नहीं होनी चाहिए.

हैंड सैनिटाइजर में 70 फीसदी अल्कोहल

इस नई स्टडी (study) में सामने आया है कि बच्चों की आंखों में गलती से हो जाने वाला छिड़काव उन पर बुरा असर डाल रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2020 में आंखों में केमिकल जाने की वजह से जो भी दिक्कतें दर्ज की गईं थीं, उनमें से 15 फीसदी मामले हैंड सैनिटाइजर से भी संबंधित थे.

साल 2020 में सार्वजनिक स्थान पर बच्चों की आंखों मे गलती से हैंड सैनिटाइजर जाने के कई मामले सामने आए हैं, जबकि 2019 में ऐसा कोई मामला नहीं था. कोरोना (Corona) न होने के कारण 2019 में हैंड सैनिटाइजर का प्रयोग ही नहीं हुआ था. हैंड सैनिटाइजर में 70 फीसदी अल्कोहल होता है.  

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फ्रेंच स्टडी में सामने आया सच

फ्रेंच पॉइजन कंट्रोल सेंटर (पीसीसी) रिसर्च ग्रुप के वैज्ञानिकों ने एक स्टडी में लिखा कि दुनियाभर में हैंड सैनिटाइजर के इस्तेमाल के बढ़ने से बच्चों के लिए एक नई अनजानी समस्या खड़ी हो गई है. इसमें दो भारतीय वैज्ञानिकों ने भी इस बात पर सहमति जताई. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दो ऐसे बच्चों का अस्पताल में इलाज हुआ था, जिनकी आंखों में हैंड सैनिटाइजर गलती से पहुंच गया था. डॉक्टर्स ने लिखा कि छोटे बच्चों को इसका गंभीर खतरा हो सकता है और आंखों में सैनिटाइजर जाने की वजह से बच्चे की आंखों की रोशनी भी जा सकती है.

वैज्ञानिकों (scientists) ने कहा कि New Normal के इस दौर में अभी हैंड सैनिटाइजर पर रोक या प्रतिबंध जैसी बातें तो बेमानी होंगीं, लेकिन अभिभावकों को यह सलाह जरूर देंगे कि बच्चे उनकी निगरानी में ही सैनिटाइजर का प्रयोग करें. वह खुद भी इसके साथ विशेष अनुशासन बररते हुए पेश आएं.

FDA पहले ही दे चुका है चेतावनी

फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने इस मामले में जुलाई 2020 में ही चेतावनी दी थी कि सैनेटाइजर के इस्तेमाल से आपकी आंखों की रोशनी तक भी जा सकती है.  FDA ने चेताया था कि कुछ सैनिटाइजर में मौजूद एथनॉल (ethyl alcohol) में मेथानॉल भी पाया गया है. इसे 'वुड एल्कोहल' के नाम से भी जाना जाता है. यह स्वास्थ्य को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है.

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