Corona के लक्षणों का इलाज करेंगी ये औषधियां, जानें कैसे करें प्रयोग

आयुर्वेद में ऐसी कई वनस्पतियां हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्राकृतिक तौर पर बढ़ाती हैं. इनमें से ऐसी कई वनस्पतियां हैं जो सामान्य तौर पर हमारे आस-पास घास के तौर पर उगती हैं. इनका प्रयोग कोरोना के लक्षणों के तौर पर उपजी परेशानियों को दूर करेगा.

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Apr 11, 2021, 12:19 PM IST
  • पुर्ननवा की जड़ों को दूध में उबालकर पिलाने से बुखार में आराम मिलता है
  • दूबघास एक शक्तिवर्द्धक औषधि है, इसका सेवन शारीरिक स्फूर्ति देता है
Corona के लक्षणों का इलाज करेंगी ये औषधियां, जानें कैसे करें प्रयोग

नई दिल्लीः Corona को लेकर एक बार फिर डर का माहौल बन रहा है. आलम यह है कि Night Curfew, Lockdown जैसी घोषणाएं फिर से सिर उठाने लगी हैं.

वहीं Corona new strain ने दुनिया भर में लोगों को परेशान कर रखा और भारत में भी इसका असर देखा जा रहा है. ऐसे में जरूरी है कि आप अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत रखें और खान-पान आहार में उन चीजों को शामिल करें, जिनसे प्रतिरोधात्मक क्षमता बढ़ती है. 

इसके अलावा कोरोना के कुछ लक्षण ऐसे हैं जो सामान्य तौर पर पनपते रहते हैं. इनमें सर्दी-खांसी-जुकाम, बदन दर्द, बुखार और सिरदर्द शामिल हैं. आयुर्वेद इनके लिए कुछ ऐसे उपचार बताता है जो सामान्य तौर पर हमारे आस-पास ही हैं और हम इन्हें महज घास या पतवार समझते हैं. लेकिन ऐसे माहौल में ये बड़े काम के हैं. 

ऊंटकटेरा से होगा खांसी का इलाज
हमारे खेतों के आस-पास मेड़ पर एक कंटीली घास अक्सर दिख जाती है. इसके फलों के चारों तरफ लंबे कांटे होते हैं. यह ऊंटकटेरा कहलाती है, इसका वानस्पतिक नाम एकीनोप्स एकिनेटस है.

इसकी जड़ की छाल का चूर्ण तैयार कर लिया जाए और चुटकी भर चूर्ण पान की पत्ती में लपेटकर खाने से लगातार चली आ रही कफ और खांसी में आराम मिलता है.

पुनर्नवा घास से उतरेगा बुखार 
पुनर्नवा को आमतौर पर जवानी बढ़ाने वाली बूटी कहा जाता है. वनस्पति विज्ञान इसे बोरहाविया डिफ्यूसा कहता है. पुर्ननवा की ताजी जड़ों का रस (2 चम्मच) दो से तीन माह तक लगातार दूध के साथ सेवन करने से चेतना और शक्ति का अहसास होता है.

पुर्ननवा की जड़ों को दूध में उबालकर पिलाने से बुखार में तुरंत आराम मिलता है.

लीवर (यकृत) में सूजन आ जाने पर पुर्ननवा की जड़ (3 ग्राम) और सहजन या मुनगा की छाल (4 ग्राम) लेकर पानी में उबाला जाए व रोगी को दिया जाए तो जल्दी आराम मिलता है.

अगर बुखार महसूस हो तो इस घास से आराम मिलेगा.

द्रोणपुष्पी (गुम्मा) भी मिटाएगी खांसी
नमी वाली जगहों पर उगने वाली द्रोण पुष्पी भले ही एक घास है, लेकिन वह बड़े काम की औषधि है. द्रोण यानी प्याले (दोने) की तरह के आकार के कारण इसे द्रोणपुष्पी कहा जाता है और यही इसकी पहचान भी है. यह पौधा विज्ञान की भाषा में ल्युकास एस्पेरा कहलाता है.

द्रोणपुष्पी की पत्तियों का रस (2-2) बूंद नाक में टपकाने से और इसकी पत्तियों को 1-2 काली मिर्च के साथ पीसकर इसका लेप माथे पर लगाने से सिर दर्द ठीक हो जाता है.

हर्र और बहेड़ा के फलों के चूर्ण के साथ थोड़ी मात्रा इस पौधे की पत्तियां का चूरन मिलाकर खांसने वाले व्यक्ति को दिया जाए तो इसमें आराम मिलता है. कोरोना के लक्षणों में यह काफी काम आएगी. 

दूब घास से बढ़ेगी इम्यूनिटी
पूजा-पाठ में शामिल दूब आरोग्य में भी लाभकारी है. इसे सायनाडोन डेक्टीलोन कहा जाता है. इसमें ग्लाइकोसाइड, अल्केलाइड, विटामिन 'ए' और विटामिन 'सी' की भरपूर मात्रा पाई जाती है.

इसका प्रतिदिन सेवन शारीरिक स्फूर्ति देता है और शरीर को थकान महसूस नहीं होती है. यानी दूबघास एक शक्तिवर्द्धक औषधि भी है. अगर कोरोना के लक्षणों में थकान महसूस हो हो या बदनदर्द हो तो दूब घास का सेवन किया जा सकता है. 

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अतिबला बनाती है ऊर्जावान
सामान्य सी घास की तरह उगने वाली अतिबला असल में बेहद असाधारण है. इसकी छाल, पत्ती, फूल, जड़ सभी गुणकारी हैं. इसका वानस्पतिक नाम एब्युटिलोन इंडीकम हैं.

दक्षिण एशियाई देशों में खूब पाई जाने वाली यह घास खेतों में खरपतवार के तौर पर उगी दिखती है. इसके बीज, छाल का उपयोग बुखार उतारने में किया जाता है.

तुलसी- इसके लिए क्या ही कहना
तुलसी कई औषधीय गुणों से भरपूर होती है. कई बीमारियों को आपसे कोसों दूर रखने में और आपकी इम्यूनिटी को बढ़ाने में भी तुलसी काफी मददगार साबित होती है.

अगर हर दिन तुलसी की चार से पांच पत्तियों को एक चम्मच शहद के साथ खाया जाए तो इससे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार होते हैं. साथ ही तुलसी के पत्ते चबाने से भी शरीर को फायदे मिलते हैं.

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