ट्रम्प पर महाभियोग लगा पाना फिलहाल टेढ़ी खीर, लेकिन ऐसा हुआ तो...

क्या अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प बहुत लंबे समय तक प्रेसिडेंट नहीं रहेंगे. क्या अमेरिका को नया राष्ट्रपति मिलने वाला है. दरअसल, यह सारे सवाल इसलिए पूछे जा रहे हैं क्योंकि न्यायिक समिति ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प पर महाभियोग चलाए जाने के लिए प्राथमिक रिपोर्ट जारी कर दी है. अब आगे की प्रक्रिया यानी ट्रम्प को राष्ट्रपति के पद से अपदस्थ करने के लिए अन्य कार्रवाई की जाएगी.   

 ट्रम्प पर महाभियोग लगा पाना फिलहाल टेढ़ी खीर, लेकिन ऐसा हुआ तो...

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प वैसे तो बहुत से कारणों की वजह से विविध रूप से चर्चा में रहे, लेकिन अब मामला महाभियोग पर आ पहुंचा है. ट्रम्प पर 2020 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में विदेशी मदद लेने की कोशिश के तहत महाभियोग लगाया जा रहा है.

अमेरिका में वैसे तो महाभियोग लगाए जाने की प्रक्रिया काफी जटिल है, लेकिन न्यायिक समिति जो ट्रम्प के मामले में सभी पक्षों को सुनने देखने परखने के बाद फैसला लेने वाली थी, उसने आज अपना पक्ष साफ कर दिया है. उन्होंने कहा कि ट्रम्प पर महाभियोग चालाया जाएगा क्योंकि उन्होंने विदेशी मदद लेने के लिए देशहित से समझौता किया है. 

अब सवाल यह उठता है कि क्या वाकई ट्रम्प महाभियोग के जरिए हटाए जाने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बनेंगे. ऐसा लगता तो नहीं. दरअसल, अमेरिका में राष्ट्रपति को महाभियोग से हटाए जाने के लिए तीन से चार प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है. ट्रम्प को फिलहाल पहली वाली प्रक्रिया के तहत ही दोषी पाया गया है, वह भी साबित होने में तकरीबन 20 दिन लग गए. 

प्रस्ताव को बहुमत न मिला तो रफा-दफा हो जाएगा मामला

राष्ट्रपति ट्रम्प के खिलाफ छह संसदीय समितियों ने जांच कर अपनी रिपोर्ट न्यायिक समिति को सौंपी. न्यायिक समिति ने सौंपे गए रिपोर्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के खिलाफ कुछ अहम और पर्याप्त सबूतों के मद्देनजर उनपर महाभियोग की आगे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का फैसला लिया.

अब यहां से अमेरिकी सदन में ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पास किया जाएगा. वहां अगर प्रस्ताव को बहुमत न मिला तो मामला यहीं रफा-दफा हो जाएगा.

लेकिन कहीं अगर गलती से भी महाभियोग प्रस्ताव को सामान्य बहुमत यानी 51 फीसदी के आसपास मत मिले तो ट्रम्प पर राष्ट्रपति पद छोड़ने का खतरा मंडराते रहेगा. और प्रक्रिया अपने अगले चरण की ओर प्रस्थान कर जाएगी. 

कांग्रेस से सीनेट जा कर अटक जाए प्रस्ताव तो बच जाएंगे ट्रम्प

फिर अमेरिकी निचले सदन यानी सीनेट तक मामला पहुंचेगा. वहां राष्ट्रपति को हटाने के लिए सीनेट के लोग प्रस्ताव पास करेंगे. जाहिर है यहां पर भी वोटिंग होगी. वोटिंग के बाद अगर सीनेट में ट्रम्प को दोषी ठहराए जाने के महाभियोग पर दो-तिहाई से कम वोट मिले जिसे विशेष बहुमत कहा जाता है तो फिर मामला वहीं दम तोड़ देगा,

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लेकिन अगर कहीं सही से या गलती से भी विशेष मत से ट्रम्प पर यह महाभियोग प्रस्ताव पास कर लिया गया तो ट्रम्प की असल मुश्किल यहां से बढ़ जाएगी और राष्ट्रपति पद छोड़ने की नौबत भी आ सकती है. प्रस्ताव पारित कर लिए जाने के बाद ट्रम्प राष्ट्रपति की कुर्सी खाली करेंगे और उप-राष्ट्रपति तब तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कुर्सी संभालेंगे. 

क्या है पूरा मामला ?

ट्रम्प पर 2020 में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में विदेशी मदद लेने का आरोप लगा है, यह तो आपको अमूमन जानकारी मिल ही जाती होगी लेकिन असल में कैसी विदेशी मदद यह जानना भी जरूरी है.

रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड ट्रम्प ने कथित तौर पर यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमिर जेलेंस्की से फोन पर बातचीत की और बातचीत में यह कहा गया कि उन्होंने यूक्रेनी ऊर्जा कंपनी बुरिज्मा के लिए काम कर चुके बिडेन और उनके बेटे के खिलाफ जांच शुरू करें. अब यह बिडेन किस बला का नाम है.

दरअसल, बिडेन डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार हैं जो राष्ट्रपति के चुनाव में ट्रम्प के खिलाफ नजर आने वाले हैं. 

व्हाइट हाउस ने क्या कहा न्यायिक समिति के फैसले पर

ट्रम्प पर इसी मामले की तर्ज पर राजद्रोह या खराब आचरण के आधार पर संवैधानिक रूप से महाभियोग का मामला चलाया जा रहा है. और इसी को लेकर पिछले कुछ दिनों से अमेरिका की राष्ट्रीय सुर्खियों में और भारत की विदेशी सुर्खियों में यह मामला छाया हुआ है.

हालांकि, राष्ट्रपति ट्रम्प की मिल्कियत वाली व्हाइट हाउस ने न्यायिक समिति के रिपोर्ट को एकतरफा झूठी कार्रवाई करार दिया है. उन्होंने कहा कि तथ्यों की सही तरीके से जांच की जानी चाहिए. 

एक और जहां डेमोक्रेटिक पार्टी इस बात पर जोर देते हुए ट्रम्प को हटाने में जुटी है, वहीं व्हाइट हाउस और रिपब्लिकन पार्टी इस पूरे महाभियोग के प्रक्रिया को जल्द से जल्द दो हफ्तों के अंदर निपटाने के चक्कर में है.