दिल दहला देंगी यह तस्वीरें: एक एंबुलेंस में 22 लाशों को अंतिम संस्कार के लिए जाया गया

महाराष्ट्र के बीड़ में कोरोना से जान गंवाने वाले 22 लोगों की लाशों को एक ही एंबुलेंस में भरकर श्मशान ले जाने का मामला सामने आया है. जिला प्रशासन ने एंबुलेंस की कमी को इसका एक कारण बताया है.

दिल दहला देंगी यह तस्वीरें: एक एंबुलेंस में 22 लाशों को अंतिम संस्कार के लिए जाया गया

औरंगाबाद: महाराष्ट्र के बीड़ में कोरोना से जान गंवाने वाले 22 लोगों की लाशों को एक ही एंबुलेंस में भरकर श्मशान ले जाने का मामला सामने आया है. जिला प्रशासन ने एंबुलेंस की कमी को इसका एक कारण बताया है. घटना रविवार रात को हुई जब बीड़ के अंबाजोगाई में मौजूद स्वामी रामानंद तीर्थ ग्रामीण राजकीय चिकित्सा कॉलेज के शवगृह में रखी लाशों को अंतिम संस्कार के लिये ले जाया जा रहा था.

मेडिकल कॉलेज के डीन डॉक्टर शिवाजी शुक्रे ने मंगलवार को कहा,'अस्पताल प्रशासन के पास मुनासिब एंबुलेंस नहीं हैं, जिसकी वजह से ऐसा हुआ. उन्होंने कहा कि उनके पास पिछले साल कोरोना के पहले दौर में पांच एंबुलेंस थीं. उनमें से तीन को बाद में वापस ले लिया गया और अब अस्पताल में दो एंबुलेंस में कोरोना मरीजों को लाया और ले जाया जा रहा है.

अधिकारी ने कहा,'कभी-कभी, मृतकों के संबंधियों को ढूंढने में समय लग जाता है. लोखंडी सवारगांव के कोविड-19 केन्द्र से भी लाशों को हमारे अस्पताल में भेजा रहा है क्योंकि उनके पास कोल्ड स्टोरेज नहीं है.' अधिकारी ने कहा कि उन्होंने तीन और एंबुलेंस मुहैया कराने के लिये 17 मार्च को जिला प्रशासन को पत्र लिखा था.

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उन्होंने कहा,'अव्यवस्था से बचने के लिये हमने अंबाजोगाई नगर परिषद को पत्र लिखा था कि सुबह 8 से बजे से रात 10 बजे तक अंतिम संस्कार कराए जाएं और अस्पताल वार्ड से ही शवों को श्मशान भेजा जाए.' इस बीच, भाजपा नगर पार्षद सुरेश ढास ने आरोप लगाया कि अस्पताल और स्थानीय नगर निकाय एक दूसरे पर आरोप लगाने में व्यस्त हैं.

अंबाजोगाई नगर परिषद के मुख्य अधिकारी अशोक साबले ने कहा कि शवों को मांडवा रोड पर स्थित श्मशान (कोविड-19 रोगियों के अंतिम संस्कार के लिये तय श्मशान) ले जाना मेडिकल कॉलेज की जिम्मेदारी है. साबले ने कहा,'हमारी टीमें श्मशान में अंतिम संस्कार कर रही है. सोमवार को इस मुद्दे पर एक बैठक हुई थी, जिसमें मेडिकल कॉलेज के डीन ने कहा कि उनके पास मुनासिब तादाद में एंबुलेंस नहीं है. अगर यही समस्या है तो क्या उन्होंने अपने तंत्र की समीक्षा नहीं की? उन्होंने इस पर काम क्यों नहीं किया?'

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