Army Day 2021: भारतीय फौज के 6 बड़े मेडल, जानिए क्यों और कैसे दिए जाते?

Indian Army Day 2021: हर साल 15 जनवरी को सेना दिवस (Army Day) मनाया जाता है. इस साल भारत का 73वां सेना दिवस मनाया जा रहा है.

Army Day 2021: भारतीय फौज के 6 बड़े मेडल, जानिए क्यों और कैसे दिए जाते?

नई दिल्ली: Indian Army Day 2021: हर साल 15 जनवरी को सेना दिवस (Army Day) मनाया जाता है. इस साल भारत का 73वां सेना दिवस मनाया जा रहा है. आज का दिन सैन्य परेडों, सैन्य प्रदर्शनियों व अन्य कार्यक्रमों के साथ नई दिल्ली व सभी सेना मुख्यालयों में मनाया जाता है. 

यह भी पढ़े: आज से 11 अंकों का हो जाएगा आपका मोबाइल नंबर! जानिए क्या हुए बदलाव

सेना दिवस के अवसर पर पूरा देश थल सेना की बहादुरी, अदम्य साहस, शौर्य और उसकी कुर्बानी को याद करता है. इस लेख में हम आपको सेना सर्वात्तम मेडल्स के बारे में बता रहे हैं.

सेना में दो स्तर पर मेडल दिए जाते हैं. एक युद्ध के दौरान बहादुरी दिखाने पर और दूसरा शांति के दौरान वीरता दिखाने पर. ये वीरता पुरस्कार साल में दो बार घोषित किए जाते हैं. गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस के मौके पर. इन पुरस्कारों का वरीयता क्रम है परमवीर चक्र, अशोक चक्र, महावीर चक्र, कीर्ति चक्र, वीर चक्र और शौर्य चक्र.

यह भी पढ़े: Video: होम मिनिस्टर अमित शाह ने उत्तरायण के मौके पर उड़ाई पतंग, जानिए किसने काटी?

युद्ध के दौरान दिए जाने वाले मेडल
1 परम वीर चक्र-
परमवीर च्रक भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान है. ये अवॉर्ड ज्यादातर मरणोपरांत दिया जाता है. यह सम्मान सैनिकों और असैनिकों को असाधारण वीरता शूरता और बलिदान के लिए दिया जाता है. पहली बार 3 नवंबर, 1947 को भारतीय सेना की कुमाऊं रेजिमेंट की चौथी बटालियन के मेजर सोमनाथ शर्मा को ये पुरस्कार दिया गया था. हालांकि इस पुरस्कार को देने की औपचारिक घोषणा  26 जनवरी, 1950 को राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने की थी. खास बात ये है कि इस परमवीर चक्र को आर्मी के ही एक अफसर विक्रम खानोलकर की पत्नी सविता खानोलकर ने डिजाइन किया था.  इसे बैंगनी रंग के रिबन के साथ पहना जाता है. अब तक 21 लोगों को ये सम्मान मिल चुका है.

यह भी पढ़े: डिवाइडर पर चढ़ी गाड़ी तो ड्राइवर को बाहर निकाल कर दी धुनाई, देखिए VIDEO

2.- महावीर चक्र
ये मिलिट्री का दूसरा सबसे बड़ा अवॉर्ड है. यह सम्मान सैनिकों और असैनिकों को असाधारण वीरता, शूरता और बलिदान के लिए दिया जाता है. यह मरणोपरांत भी दिया जा सकता है. सेना, नौसेना और वायु सेना के सभी रैंक के अधिकारी, प्रादेशिक सेना, रिजर्व बल और किसी अन्य विधिवत सशस्त्र बल के लोगों को दिया जा सकता है. सुरक्षा बलों में से किसी भी विभाग से सम्बंधित व्यक्ति को इस अवार्ड के लिए युद्ध क्षेत्र में बहादुरी दिखाने के लिए चुना जाता है. 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान ये मेडल सबसे ज्यादा दिए गए थे.

यह भी देखें: प्रेग्नेंट महिला का कत्ल किया फिर पेट चीरकर निकाला बच्चा, अब मिली ऐसी सज़ा जो इतिहास में हुई दर्ज

3- वीर चक्र
युद्ध के समय वीरता के लिए दिया जाने वाला यह तीसरा सबसे बड़ा सम्मान है, जो दुश्मन के खिलाफ दिखाई गई बहादुरी के लिए दिया जाता है. यह पदक भी सैनिकों और असैनिकों को दिया जा सकता है. 26 जनवरी 1950 से इसकी शुरुआत हुई. इस मेडल को 16mm नीले और 16mm केसरिया रंग के रिबन के साथ पहना जाता है. वरियता में यह महावीर चक्र के बाद आता है.

शांति के दौरान दिए जाने वाले मेडल
शांति के दौरान यानी जब युद्ध नहीं हो रहा होता है, तब भी सेना के जवानों को वीरता पुरस्कार दिए जाते हैं. भारत ने अपनी आखिरी लड़ाई पाकिस्तान के साथ 1999 में लड़ी थी, लेकिन उसके बाद भी एयर स्ट्राइक, आतंकवादी घटनाएं, सीमा पर घुसपैठ और क्रास बॉर्डर फायरिंग जैसी चीजें होती रहती हैं, जिनमें असाधारण वीरता की ज़रूरत होती है और ऐसी वीरता दिखाने वालों को ये सम्मान मिलता है.

यह भी पढ़े: पति के गले में कुत्ते का पट्टा डालकर घूम रही थी, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

शांति के दौरान दिए जाने वाले मेडल
शांति के समय दिए जाने वाले ऐसे पुरस्कारों में है अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र शामिल हैं.

1. अशोक चक्र- अशोक चक्र को पीसटाइम का परम वीर चक्र माना जाता है. यानी युद्ध से अलग वीरता और साहस के लिए दिया जाने वाला ये सबसे बड़ा अवार्ड है. इसने ब्रिटिश जॉर्ज क्रॉस अवार्ड की जगह ली थी. फ्लाइट लेफ्टिनेंट सुहास बिस्वास पहले इंडियन थे, जिन्हें ये अवॉर्ड मिला. इस अवार्ड की शुरुआत 4 जनवरी 1952 को हुई थी. तब इसे अशोक चक्र क्लास 1 कहा जाता था. बाद में 1967 में इसे अशोक चक्र कहा जाने लगा. इसे हरे रिबन के साथ पहना जाता है, जिसमें एक केसरिया पट्टी बनी होती है.

यह भी पढ़े: Viral Video: देखिए कुत्ते की हिम्मत, जंगल में सीधे शेर से ही भिड़ गया,

2. कीर्ती चक्र- कीर्ति चक्र भारत का शांति के समय वीरता का पदक है. यह सम्मान सैनिकों और असैनिकों को असाधारण वीरता या प्रकट शूरता या बलिदान के लिए दिया जाता है. यह मरणोपरान्त भी दिया जा सकता है. कीर्ती चक्र को 1952 में अशोक चक्र क्लास 2 नाम दिया गया था. बाद में 1967 में इसे कीर्ति चक्र कर दिया गया. इसे भी हरे रिबन के साथ पहना जाता है, लेकिन केसरिया पट्टी दो होती हैं. शौर्य और वीरता के लिए कीर्ति चक्र दिया जाता है. यह शांति काल में दिया जाने वाला वीरता पदक है. यह मरणोपरांत भी दिया जा सकता है.

3. शोर्य चक्र- शौर्य चक्र भारत का शांति के समय वीरता का पदक है. यह सम्मान सैनिकों और असैनिकों को असाधारण वीरता या प्रकट शूरता या बलिदान के लिए दिया जाता है. यह मरणोपरान्त भी दिया जा सकता है। वरियता में यह कीर्ति चक्र के बाद आता है. इसका मेडल कांसे से बना होता है, जिसे हरे रंग की तीन खड़ी लाइनों द्वारा बराबर भागों में विभाजित फीते के साथ दिया जाता है. कह सकते हैं कि कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र, अशोक चक्र के ही दो वर्ग हैं.

यह भी पढ़े: Video: होम मिनिस्टर अमित शाह ने उत्तरायण के मौके पर उड़ाई पतंग, जानिए किसने काटी?

कई और पदक भी दिए जाते हैं
युद्ध के दौरान वीरता दिखाने और शांति के दौरान वीरता दिखाने वाले इन अवॉर्ड के अलावा और भी कई दूसरे अवार्ड हैं जो सैनिकों को दिए जाते हैं. जिनमें सेना पदक, नौसेना पदक, वायुसेना पदक, सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक, युद्ध सेवा पदक , विशिष्ट सेवा पदक के अलावा कई और पदक शामिल हैं.

क्यों मनाया जाता है भारतीय सेना दिवस
भारतीय सेना दिवस (Indian Army Day) हर साल 15 जनवरी को फील्ड मार्शल केएम करियप्पा (Field Marshal KM Cariappa) के सम्मान में मनाया जाता है. साल 1949 में आज ही के दिन भारत के अंतिम ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ जनरल फ्रांसिस बुचर  (General Sir Francis Butcher) की जगह तत्कालीन लेफ्टिनेंट जनरल के एम करियप्पा ने ली थी. करियप्पा ने 1947 में भारत-पाक के बीच हुए युद्ध में भारतीय सेना की कमान संभाली थी.  इसलिए 15 जनवरी को एक भारतीय नागरिक के हाथों में सेना की शक्ति का हस्तांतरण देश में सेना दिवस के रूप में चिह्नित किया जाता है. इस दिन, उन सभी बहादुर सेनानियों को सलामी दी जाती है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा और राष्ट्र की अखंडता को बनाए रखने के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया है.

ZEE SALAAM LIVE TV