Gulzar Poetry: देर से गूँजते हैं सन्नाटे, जैसे हम को पुकारता है कोई

Gulzar Poetry: गुलज़ार को साल 2002 में सहित्य अकादमी पुरस्कार, साल 2004 में पद्म भूषण मिला है, साल 2009 में गुलजार ऑस्कर अवार्ड और ग्रैमी अवार्ड मिला है.

Gulzar Poetry: देर से गूँजते हैं सन्नाटे, जैसे हम को पुकारता है कोई

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Siraj Mahi

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सिराज माही युवा पत्रकार हैं. देश, दुनिया और मनोरंजन की खबरों पर इनकी अच्छी पकड़ है. ज़ी मीडिया से पहले वह 'ईटीवी भारत' और 'दि संडे पोस्ट' जैसे मीडिया हाउस में काम कर चुके हैं. लिखने-पढ़ने के अलावा इन्हें घूमना और खाना बनाना पसंद है.

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