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नई दिल्ली: बीजेपी के वरिष्ठ नेता और साबिक राज्यसभा सदस्य प्रभात झा की शुक्रवार को लंबी बीमारी के बाद गुड़गांव के एक अस्पताल में मौत हो गयी. वह 67 साल के थे. कुछ दिन पहले उनकी तबीयत खराब होने के बाद उन्हें भोपाल से दिल्ली लाया गया था. उनके परिवार में उनकी बीवी और दो बेटे हैं. उनका आखिरी रसूमात शनिवार को बिहार के दरभंगा में उनके आबाई गांव में किया जाएगा.
प्रभात झा 4 जून 1957 को बिहार के दरभंगा जिले के हरिहरपुर में पैदा हुए थे. वह 8 मई 2010 से 15 दिसंबर 2012 तक मध्य प्रदेश भाजपा सदर के ओहदे पर रहे और अप्रैल 2008 में वह मध्य प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य चुने गए थे. बिहार में पैदा हुए झा ने ग्वालियर से एक सहाफी के तौर पर अपना करियर शुरू किया था. बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए थे. झा ने 2015 में बीजेपी के नायब कौमी सद्र के तौर पर भी काम किया था.
प्रभात झा पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच काफी मुमताज़ थे और उनकी एक ख़ास बात ये थी कि वह हर पार्टी कार्यकर्ता को नाम से जानते थे. वह अपनी बात कहने और रखने से कभी डरते नहीं थे. बिहार का बाशिंदा होने के बावजूद उन्होंने मध्य प्रदेश की सियासत में अपनी अलग पहचान और मुकाम बनाया था. झा मध्य प्रदेश भाजपा इकाई में एक कद्दावर नेता थे, हालांकि गुजिश्ता कुछ सालों में उन्हें पार्टी में कोई ख़ास ज़िम्मेदारी नहीं दी गई थी. झा ने कभी गुटबाजी की सियासत नहीं की, और बताया जा रहा है कि पार्टी में शाह और मोदी के उभार के बाद वो हाशिये पर भेज दिए गए थे.
प्रभात झा के मौत पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वी.डी. शर्मा और पार्टी के दीगर नेताओं ने अफ़सोस का इज़हार किया है.