Vijay Agarwal

खुलते हुए समाज की एक बानगी

खुलते हुए समाज की एक बानगी

'सैनिटरी नेपकिन पर जीएसटी जीरो', यह और कुछ इसी खबर वाले अन्य तरह के शीर्षकों को 22 जुलाई के अ

गोपालदास नीरज... मुरझा गया गीतों का कमल

गोपालदास नीरज... मुरझा गया गीतों का कमल

यह मेरा सौभाग्य रहा है कि गोपालदास नीरज को मुझे सालभर पहले ही सुनने का मौका तब मिला, जब वे भोपाल में एक कार्यक

एक कालजयी रचना है 'रागदरबारी'

एक कालजयी रचना है 'रागदरबारी'

‘मध्यकाल का कोई सिंहासन रहा होगा, जो अब घिसकर कुर्सी बन गया था.

एक देशज आधुनिक कवि का अवसान

एक देशज आधुनिक कवि का अवसान

सारा शहर छान लेने के बाद, मैं इस नतीजे पर पहुँचा, कि इतने बड़े शहर में, मेरी सबसे बड़ी पूँजी है, मेरी चलती हुई साँस, मेरी छाती में बन्द मेरी छोटी-सी पूँजी,

मार्क्सवादियों का सूरज क्यों ढला

मार्क्सवादियों का सूरज क्यों ढला

त्रिपुरा चुनावी नतीजों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कही गई उक्त मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी तथा भारतीय जनता पार्टी, इन दोनों के भविष्य का बहुत अच्छा प्रतीकात्मक विश्लेषण करती है.

एग्जाम टाइम: बच्चों को कैसे करें तनावमुक्त

एग्जाम टाइम: बच्चों को कैसे करें तनावमुक्त

परीक्षा के दिनों में बच्चों में जबर्दस्त तनाव की जो स्थिति देखने को मिलती है, पच्चीस-तीस साल पहले यह स्थिति इतनी

मन की सफाई का त्योहार है होली

मन की सफाई का त्योहार है होली

हमारे यहां बहुत से त्योहार मनाये जाते हैं, जिनमें होली सबसे अलग और अनोखा त्योहार है. त्योहारो को मूलतः संस्कृति की अभिव्यक्ति माना गया है.

RTI से बाहर सिविल सेवा परीक्षा: क्यों स्वागत योग्य है सुप्रीम कोर्ट का फैसला!

RTI से बाहर सिविल सेवा परीक्षा: क्यों स्वागत योग्य है सुप्रीम कोर्ट का फैसला!

सिविल सेवा परीक्षा के बारे में सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बारे में एक साथ दो विपरीत प्रतिक्रियाएं सुनने को

सौंदर्य का मिथक और प्रेम

सौंदर्य का मिथक और प्रेम

आपने फिल्में देखी हैं और प्रेम कहानियां भी पढ़ी होंगी. आपको इन सभी में एक बात आम नज़र आई होगी कि इनकी नायिकाएं बहुत सुंदर दिखाई या बताई जाती हैं.

किसी को चाहने का मतलब है, उसके संपूर्ण अस्तित्व को स्वीकारना

किसी को चाहने का मतलब है, उसके संपूर्ण अस्तित्व को स्वीकारना

कारण चाहे जो भी हो, लेकिन हर व्यक्ति किसी न किसी बात को लेकर कुंठित ज़रूर होता है. उसके अंदर अपने-आपको हीन समझने की भावना मौजूद रहती है, जिसे हम 'इनफीरियोरिटी कॉम्पलेक्स' कहते हैं.

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