ऑटो सेक्टर में मंदी, Maruti Suzuki ने लगातार चौथे महीने प्रोडक्शन में की कटौती

मई महीने में मारुती सुजुकी की बिक्री 22 फीसदी तक गिर गई. लगातार मांग में कमी की वजह से कंपनी ने प्रोडक्शन में कटौती की है.

ऑटो सेक्टर में मंदी, Maruti Suzuki ने लगातार चौथे महीने प्रोडक्शन में की कटौती
मई में बिक्री 22 फीसदी तक गिर गई है . (फाइल)

नई दिल्ली: ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए फिलहाल कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है. मांग में कमी की वजह से बिक्री में काफी गिरावट आई है. देश में सबसे ज्यादा बिकने वाली कार मारुती सुजुकी की बिक्री मई महीने में 22 फीसदी तक गिर गई. लगातार मांग में कमी की वजह से कंपनी ने प्रोडक्शन में कटौती की है. कंपनी ने मई महीने में प्रोडक्शन में 18 फीसदी की कटौती की है. यह लगातार चौथा महीना है जब कंपनी ने उत्पादन में कटौती की है. 

मारुति सुजुकी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में कहा कि उसने मई 2019 में हल्के वाणिज्यिक वाहन (LCV) समेत कुल 1,51,188 वाहनों का उत्पादन किया जबकि एक साल पहले इसी महीने कंपनी ने 1,84,612 इकाइयों का उत्पादन किया था. इस दौरान, उत्पादन में 18.1 प्रतिशत की कटौती की गई है. इसके अलावा मई में कॉम्पैक्ट और मिनी कार के प्रोडक्शन में भी भारी कटौती की गई है.

सभी कारों की बिक्री में गिरावट
मारुति ने ऑल्टो, स्विफ्ट और डिजायर समेत यात्री वाहनों का उत्पादन 18.88 प्रतिशत घटा कर 1,48,095 वाहन कर दिया. मई 2018 में उसने 1,82,571 इकाइयों का उत्पादन किया था. कंपनी ने ऑल्टो 800 जैसे छोटे खंडों में वाहनों का उत्पादन 42.29 प्रतिशत कम करके 23,874 इकाई कर दिया जबकि मई 2018 में यह 41,373 इकाइयों पर थी. मारुति ने सेलेरियो, स्विफ्ट जैसे कॉम्पैक्ट वाहनों का उत्पादन 9.54 प्रतिशत घटा कर 84,705 वाहन कर दिया, जो कि मई 2018 में 93,641 इकाइयों पर था. उपयोगी (यूटिलिटी) वाहनों का उत्पादन भी 3.21 प्रतिशत गिरकर 24,748 इकाई रहा. मई 2018 में उसने 25,571 वाहनों का उत्पादन किया था. कंपनी ने कहा कि वैन उत्पादन भी 34.99 प्रतिशत घटाकर 10,934 इकाई कर दिया, जो कि मई 2018 में 16,819 इकाई पर था. 

अप्रैल 10 फीसदी प्रोडक्शन में कटौती हुई थी
इससे पहले मारुति ने अप्रैल में उत्पादन में करीब 10 प्रतिशत की कटौती की थी. वहीं, मार्च में उत्पादन में 20.9 प्रतिशत और फरवरी में 8 प्रतिशत की कटौती की थी. वाहन निर्माता कंपनियां पिछले कुछ समय से बिक्री में सुस्ती का सामना कर रही हैं. इस सुस्ती के कारण कंपनियों को बाजार मांग के हिसाब से उत्पादन को समायोजित करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.