जंबो जेट के कंधों पर जंबो जिम्मेदारी

कुंबले को उनके जमाने के साथी 'जंबो' नाम से पुकारते थे। दरअसल कुंबले का निक नेम जंबो है। एक स्पिन गेंदबाज के रूप में जंबो जेट जैसी तेजी वाली गेंद फेंकने के चलते उनका नाम जंबो नहीं पड़ा था, बल्कि अपने लंबे पैरों की वजह से कुंबले अपने साथियों के बीच जंबो नाम से मशहूर हो गए थे। अब इस जंबो जेट के कंधों पर टीम इंडिया को नई ऊंचाई पर ले जाने की जंबो जिम्मेदारी मिली है।

2015 में जिम्बाब्वे के डंकन फ्लेचर के जाने के बाद पिछले एक साल से खाली टीम के मुख्य कोच के पद के लिए 56 लोगों को पछाड़कर अनिल कुंबले ने बाजी मार ली। भारतीय टीम के कोच पद के लिए बीसीसीआई ने विज्ञापन जारी किया था जिसके तहत बोर्ड को 57 आवेदन मिले थे। इनमें से 21 लोगों की सूची बनाई गई। इन सभी का साक्षात्कार कर मुख्य कोच के लिए अनिल कुंबले का चयन किया गया। सूची को सचिन तेंदुलकर, वीवीएस लक्ष्मण और सौरव गांगुली की क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) को सौंपा गया था जिसने मंगलवार को उम्मीदवारों के साक्षात्कार कर चुनिंदा उम्मीद्वारों की सूची बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को सौंपी दी थी।

16 साल पहले कपिल देव भारतीय टीम के कोच थे। 2000 में उनके कोच पद छोड़ने के बाद पहली बार किसी भारतीय को ये जिम्मेदारी सौंपी गई है। कपिल देव के बाद कुंबले टीम इंडिया के स्थायी कोच बने हैं। भारत के सबसे कामयाब गेंदबाज अनिल कुंबले अपने क्रिकेट करियर की दूसरी पारी खेलने जा रहे हैं। कुंबले के कंधों पर अब नई जिम्मेदारी है। ये जिम्मेदारी है भारतीय क्रिकेटर को संवारने और उसे नई ऊंचाइयों पर ले जाने का। बीसीसीआई को लगता है कि अनिल कुंबले इस जिम्मेदारी के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति है।

जन्म : 17 अक्तूबर 1970
रिटायरमेंट : 2007-08
कुल टेस्ट मैच : 132
कुल वनडे मैच : 271
टेस्ट मैचों में विकेट : 619
टेस्ट मैचों में रन : 2506
वनडे मैचों में विकेट : 337
वनडे मैचों रन : 938

अनिल कुंबले हमेशा क्रिकेट के लिए प्रतिबद्ध रहे। उनकी प्रतिबद्धता की एक झलक दुनिया ने 14 साल पहले तब देखी थी जब एंटिगा में टूटे जबड़े के साथ वे गेंदबाज़ी करने उतरे थे। उन्होंने न केवल 14 ओवर की गेंदबाज़ी की बल्कि ब्रायन लारा को पवेलियन भी भेजा। विवियन रिचर्ड्स ने तब कहा था कि खेल के मैदान पर इससे ज़्यादा बहादुरी की मिसाल मैंने नहीं देखी। हालांकि इससे तीन साल पहले फिरोजशाह कोटला के मैदान पर पाकिस्तान के खिलाफ एक पारी में सभी 10 विकेट चटकाकर वे इतिहास में अपना नाम दर्ज करा चुके थे। अनिल कुंबले 1990 में टीम इंडिया में शामिल हुए थे। इसके बाद अगले 18 साल तक भारतीय गेंदबाज़ी की कमान उनके मज़बूत कंधों पर रही। 132 टेस्ट मैच में 619 विकेट और 271 वनडे में 337 विकेटों के इस सफर के दौरान समय के साथ अनिल कुंबले भी बदले। लेकिन क्रिकेट को लेकर प्रतिबद्धता बराबर बनी रही।

कुंबले के आलोचक उन्हें कभी विशुद्ध स्पिन गेंदबाज नहीं माने। बावजूद इसके कुंबले लेगब्रेक के साथ-साथ तेज गुगली का बेहतरीन इस्तेमाल करके सालों साल तक विकेट चटकाते रहे। करियर के आखिरी दिनों में उन्हें टीम इंडिया की कप्तानी करने का मौका भी मिला। उन्हें 2005 में पद्मश्री और 1995 में अर्जुन पुरस्कार मिल चुका है। 2008 में क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी उनका जुड़ाव क्रिकेट से बना रहा। 2010 में वे कर्नाटक क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बने, जबकि 2012 में इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल की आईसीसी क्रिकेट समिति के चेयरमैन बने। अब 46 साल की उम्र में वे भारतीय टीम के मुख्य कोच बनाए गए हैं टीम इंडिया को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए।