मेरे माता-पिता ने कभी मुझे लेखक बनने के लिए प्रेरित नहीं किया: पाओलो कोएलो

कोएलो ने कहा कि उनके माता-पिता का मानना था कि इस पेशे में मेरे लिए भूखों मरने की नौबत आ जाएगी

मेरे माता-पिता ने कभी मुझे लेखक बनने के लिए प्रेरित नहीं किया: पाओलो कोएलो
लेखक पाओलो कोएलो (फाइल फोटो साभार, @PauloCoelho)

नई दिल्ली: जाने-माने लेखक पाओलो कोएलो का कहना है कि उनके माता-पिता ने कभी उन्हें लेखक बनने के लिए प्रेरित नहीं किया क्योंकि उनका मानना था इस पेशे में वह भूखों मर जाएंगे.

बचपन में जब कोएलो ने अपनी मां को अपने जीवन का लक्ष्य बताया तो उन्होंने उनके पिता का जिक्र किया और कहा कि एक इंजीनियर के तौर पर वह एक तार्किक और जिम्मेदार शख्स हैं.

सोमवार को एक ट्वीट में कोएलो ने अपने उन दिनों को याद कर लिखा,‘अपनी पहली किताब लिखने में मुझे 40 साल लग गए. जब मैं छोटा था तो मुझे बतौर लेखक अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित नहीं किया गया क्योंकि मेरे माता-पिता का मानना था कि इस पेशे में मेरे लिये भूखों मरने की नौबत आ जाएगी.’

1947 में जन्मे कोएलो की पहली किताब ‘हेल आर्काइव्ज’ 1982 में प्रकाशित हुई, जो कुछ खास नहीं कर सकी. उनका पहला उपन्यास ‘द पिलग्रिमेज’ (1987) था. उनकी प्रसिद्ध रचना ‘द अल्केमिस्ट’ 1988 में आई. कोएलो ने एक साल पहले एक ब्लॉग में भी अपने बचपन के दिनों को याद किया था.

कोएलो ने किया अपने बचपन का जिक्र
उन्होंने लिखा,‘जब मैं छोटा था तो मेरे माता-पिता ने मुझे तीन बार (1966, 1967 और 1968 में) मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सालय भेजा था. मेरी मेडिकल फाइल में इसके लिए मामूली वजह बताई गई है. इसमें कहा गया है कि मैं स्कूल में अलग-थलग रहता हूं, सबसे दोस्ती नहीं करता और दीन-हीन की तरह रहता हूं. मैं कोई सनकी नहीं था लेकिन मैं तो महज 17 साल का एक किशोर था जो वाकई में एक लेखक बनना चाहता था.’’ 

उन्होंने अपने उन दिनों को याद करते हुए लिखा, ‘चूंकि कोई इसे समझता नहीं था इसलिए मैं महीनों खुद को बंद कर लेता और फिर मुझे दवा देकर शांत किया जाता. इलाज के दौरान मुझे बिजली के झटके दिए जाते. इस अनुभव के बाद मैंने अपने आप से वादा किया कि एक दिन मैं जरूर लेखक बनूंगा ताकि युवा यह समझ सकेंगे कि हमें अपने जीवन के शुरुआती चरण से ही अपने सपनों के लिए लड़ना होगा.’

'अपने नजरिए से तो वे मेरी मदद करने की कोशिश कर रहे थे'
क्या वह अपने माता-पिता को कभी माफ कर पाएंगे, इस सवाल पर उन्होंने अपने ब्लॉग में लिखा,‘मुझे उन्हें माफ करने की कोई नहीं जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि जो भी हुआ उसके लिए मैंने उन्हें कभी दोषी नहीं ठहराया. अपने नजरिए से तो वे मेरी मदद करने की कोशिश कर रहे थे और बतौर किशोर मुझे अपने सपनों को भूलने के लिये कहते थे. वे मुझे अनुशासन सिखा रहे थे जो बड़े होने पर मेरी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये जरूरी होता.’

कोएलो की दुनियाभर में 15 करोड़ से अधिक किताबें बिक चुकी हैं. उनकी रचनाएं 80 भाषाओं में प्रकाशित हुई हैं. उनकी ‘द अल्केमिस्ट’ को मलाला यूसुफजई और फैरेल विलियम्स जैसे लोगों ने प्रेरक बताया है.